Iran US War Peace Talks: संकट में ईरान-अमेरिका शांति वार्ता, नहीं गया ईरान! धरी रह गई शरीफ की तैयारी!
Iran US War Peace Talks: ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता (Peace Talk) अब रद्द होती नजर आ रही है। जिसके कारण अब इस्लामाबाद में सभी तैयारियों के बावजूद एक अनिश्चितता का माहौल बन गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर को समझ नहीं आ रहा कि करें तो करें क्या? क्यों पहले इस बातचीत को एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा था, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि जबरदस्त शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है।
जोर-शोर और प्रचार के साथ तैयारी
7 अप्रैल को दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल की मीटिंग शनिवार 11 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली थी। जिसके लिए दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बातचीत के लिए एक दिन पहले यानी 10 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंचना था। इस मीटिंग के लिए पाकिस्तान ने भारी सुरक्षा इंतजाम किए थे। बच्चों के बोर्ड एग्जाम कैंसिल कर दिए गए थे, सेरेना होटल के आसपास की सड़कों को पूरी तरह सील कर दिया गया था और पूरे शहर में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। इसके लिए पाकिस्तानी मीडिया ने काफी माहौल बनाया था, नेताओं ने रातों-रात बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर वाहवाही लूटना शुरू कर दी थी लेकिन सुबह होते-होते सब कुछ बदलने लगा।

क्यों सवालों की घेरे में आती पीस टॉक?
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ये कथित शांतिवार्ता होगी भी या नहीं? शुरुआत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बातचीत का ऐलान किया था। इसके बाद ईरान के राजदूत रजा अमीर मोगादम ने भी सोशल मीडिया पर बताया कि 10 सदस्यों का ईरानी डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंचने वाला है।
ईरानी बयान आया और तुरंत हटा भी दिया गया
इसके कुछ ही देर बाद राजदूत मोगादम ने पोस्ट में लिखा था कि इजरायल बार-बार युद्धविराम तोड़ रहा है, फिर भी ईरान पाकिस्तान के निमंत्रण पर बातचीत के लिए तैयार है और अपने 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा करेगा। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने यह पोस्ट डिलीट कर दी। इसके बाद कन्फ्यूजन और बढ़ गया कि ईरान सच में इस वार्ता में शामिल होगा या नहीं।
ईरान ने पाकिस्तानी मीडिया के दावों को बताया गलत
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम (जो कि ईरानी सरकार का मुखपत्र भी है) ने पाकिस्तानी मीडिया द्वारा किए इन दावों को पूरी तरह गलत बताया। एजेंसी ने साफ कहा कि न तो विदेश मंत्री अब्बास अराघची और न ही संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ किसी वार्ता के लिए रवाना हुए हैं। मतलब जिन नेताओं को बात करनी है वे अभी तक ईरान में ही हैं।
हमरी उंगलियां अभी भी ट्रिगर पर- ईरान
इसके साथ ही ईरान ने सख्त लहजे में कहा है कि लेबनान में हमले रोके बिना शांति समझौता नहीं हो सकता। अगर इजरायल लेबनान पर हमले करता है तो फिर ईरान कभी भी इजरायल पर दोबारा हमले शुरू कर सकता है। इजरायल के हमलों और ईरान के बयान ने पाकिस्तान की पीस टॉक पर पानी फेर दिया है। अगर आज हालात नहीं सुधरे तो फिर ये डील शायद रद्द भी हो सकती है।
कैसे बिगड़ा पूरा खेल?
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह इजरायल के लेबनान पर हमले बताए जा रहे हैं। सीजफायर के बावजूद, इजरायल ने सिर्फ 10 मिनट में 100 हमले किए, जिसमें 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। ईरान ने इसे सीधा समझौते का उल्लंघन बताया और कहा कि ऐसे माहौल में बातचीत करना सही नहीं है। बता दें कि ईरान की तरफ से आने वाले डेलिगेशन में मुख्य वार्ताकार और मोहम्मद बाघेर गालिबफ हैं जो ईरानी संसद के अध्यक्ष हैं। गालिबफ ने य भी कहा कि इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले बढ़ाकर शर्तों को तोड़ा है।
उन्होंने अमेरिका पर भी आरोप लगाया कि वह ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करने का दबाव बना रहा है, जो समझौते के खिलाफ है।राष्ट्रपति पेज़ेशेकियन की चेतावनी। साथ ही, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि ये हमले धोखे और समझौते के उल्लंघन का संकेत हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान सतर्क है और लेबनान को समर्थन देता रहेगा। दूसरी तरफ फार्स न्यूज एजेंसी ने भी पुष्टि की कि लेबनान में युद्धविराम होने तक ईरान बातचीत नहीं करेगा। मतलब अब ईरानी नेता शायद इस्लामाबाद नहीं जाने का मन बना चुके हैं।
पाकिस्तान अब भी उम्मीद में
इन सबके बावजूद पाकिस्तान अभी भी इस बातचीत को लेकर उम्मीद लिए बैठा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि इस्लामाबाद आने वाले प्रतिनिधियों और पत्रकारों को वीजा ऑन अराइवल मिलेगा। साथ ही, जो पत्रकार दूसरे देशों से इसे कवर करने के लिए इस्लामाबाद पहुंचेंगे उन्हें भी वीजा ऑन अराइवल दिया जाएगा।
राजधानी में हाई अलर्ट और भारी सुरक्षा
इस्लामाबाद को वार्ता से पहले रेड अलर्ट पर रखा गया है। शहर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बातचीत शुरू भी होती है, तो कई जटिल मुद्दे इसे फैल कर सकते हैं। जिनमें खासकर ईरान की तरफ से की गई 10 मांग और न्यूक्लियर एजेंडे पर मतभेद हो सकता है। जिसे अमेरिका ने सिरे से खारिज करते हुए अस्वीकार्य योग्य प्रस्ताव बताया है।
न्यूक्लियर कार्यक्रम और होर्मुज बना बड़ा मुद्दा
ईरान के प्रस्ताव में उसका न्यूक्लियर कार्यक्रम और यूरेनियम एनरिचमेंट प्रोग्राम शामिल है, जिसे अमेरिका स्वीकार नहीं कर रहा है। इसके अलावा, Strait of Hormuz पर कंट्रोल भी बड़ा मुद्दा है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। ईरान इस पर नियंत्रण और टोल लगाने की बात कर रहा है, जिस पर अमेरिका सहमत नहीं है।
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क्या होगी वार्ता?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह शांति वार्ता होगी या नहीं। फिलहाल इसके न होने की संभावना हर बीतते मिनट के साथ बढ़ रही है। लेकिन इतना तय है कि यदि यह होती है, तो पूरी दुनिया की नजर इस पर रहेगी। इसकी सफलता या विफलता का असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर व्यापक रूप से पड़ेगा।
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