'खड़गे नहीं, राहुल गांधी अध्यक्ष!', हजीना सैयद का बगावती इस्तीफा लेटर वायरल, कांग्रेस में क्यों मचा तूफान?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के मौके पर कांग्रेस के भीतर एक ऐसा 'पॉलिटिकल न्यूक्लियर बम' फटा है, जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दे रही है। तमिलनाडु महिला कांग्रेस की (अब पूर्व) अध्यक्ष एम. हजीना सैयद (M. Hazeena Syed) ने न केवल पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, बल्कि अपने विदाई पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी नेतृत्व पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कांग्रेस के भीतर चल क्या रहा है? आइए इस पूरे मामले को समझते हैं।

Hazeena Syed resignation

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के बीच कांग्रेस ने हजीना सैयद को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पद से हटा दिया। यह कार्रवाई अलका लांबा ने की, जो महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी की ओर से कहा गया कि हजीना सैयद संगठन के खिलाफ काम कर रही थीं, इसलिए यह कदम उठाया गया। लेकिन हजीना ने इस फैसले को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वह पहले ही इस्तीफा दे चुकी थीं। उनका दावा है कि 10 अप्रैल को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया।

सबसे बड़ा झटका: खड़गे 'किनारे', राहुल गांधी को माना 'अध्यक्ष'

हजीना सैयद के इस्तीफे में सबसे चौंकाने वाली और प्रतीकात्मक बात उनका 'संबोधन' है। तकनीकी और वैधानिक रूप से मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लेकिन हजीना सैयद ने अपना इस्तीफा 'राहुल गांधी - अध्यक्ष, 24, अकबर रोड' के नाम से भेजा है।

यह कदम सीधे तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे की अथॉरिटी को चुनौती देना है। हजीना ने अपने पत्र में साफ लिखा कि उन्होंने खड़गे जी से गुहार लगाई थी, लेकिन उन्होंने हमेशा की तरह भ्रष्टाचार का ही साथ दिया। राहुल गांधी को अध्यक्ष संबोधित करके हजीना ने कांग्रेस के उस 'ओपन सीक्रेट' पर मुहर लगा दी है कि पार्टी में अंतिम फैसला आज भी गांधी परिवार (विशेषकर राहुल) ही लेता है, खड़गे सिर्फ एक 'रबर स्टैम्प' हैं।

विवाद की जड़: टिकट न मिलना और अपमान

हजीना सैयद लगभग 30 सालों से कांग्रेस की समर्पित कार्यकर्ता रही हैं। NSUI से अपनी यात्रा शुरू करने वाली हजीना, AICC सदस्य और पार्टी प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। अप्रैल 2024 में खुद खड़गे ने उन्हें तमिलनाडु महिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था।

हजीना का दावा है कि केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) और खुद राहुल गांधी ने उन्हें मेलूर (Melur) विधानसभा सीट से टिकट देने की मंजूरी दे दी थी। लेकिन, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगाई और प्रदेश प्रभारी गिरीश चोडंकर जैसे नेताओं ने साज़िश के तहत उनका टिकट काट दिया। हजीना ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु महिला कांग्रेस से एक भी महिला को टिकट नहीं दिया गया, जो इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी के 33% महिला आरक्षण के सपने का क्रूर मजाक है।

अलका लांबा और केसी वेणुगोपाल पर 'निजी' और 'गंभीर' हमले

10 अप्रैल 2026 को महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने हजीना सैयद को 'कांग्रेस विरोधी गतिविधियों' के आरोप में पद से हटा दिया। इसके जवाब में हजीना ने जो गुबार निकाला, उसने सोशल मीडिया पर आग लगा दी।

वायरल मेल और पोस्ट की बड़ी बातें (Oneindia Hindi स्वतंत्र जांच नहीं करता):

  • निजी हमला: हजीना ने अलका लांबा को संबोधित करते हुए लिखा, "जाओ, अपना अहंकार अपने बॉयफ्रेंड के.सी. वेणुगोपाल को दिखाओ, मुझे नहीं।" केसी वेणुगोपाल कांग्रेस के संगठन महासचिव हैं और राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं।
  • आर्थिक आरोप: हजीना ने आरोप लगाया कि अलका लांबा सदस्यता फीस के पैसों पर 'ऐश' कर रही हैं। उन्होंने AIMC (ऑल इंडिया महिला कांग्रेस) के खातों के ऑडिट की चुनौती दी।
  • अपमान: उन्होंने अलका लांबा को 'सैडिस्ट' (दूसरों को दुख देकर खुश होने वाली) कहा और पूछा कि "क्या तुम प्रिंसेस डायना हो?"
  • 'आप' कनेक्शन: हजीना ने ताना मारा कि अलका लांबा आम आदमी पार्टी (AAP) से कूदकर यहां कांग्रेस को बर्बाद करने आई हैं।

कौन हैं हजीना सैयद? (Who is Hazeena Syed)

हजीना सैयद कांग्रेस की पुरानी और अनुभवी नेता रही हैं। करीब 30 साल तक उन्होंने पार्टी के साथ काम किया है। उन्होंने अपनी राजनीतिक शुरुआत NSUI से की थी और बाद में युवा कांग्रेस के टैलेंट हंट प्रोग्राम में भी हिस्सा लिया।

अप्रैल 2024 में उन्हें महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा वह AICC सदस्य और पार्टी प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। सोशल मीडिया पर उनकी कई तस्वीरें कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ मौजूद हैं, जिनमें अलका लांबा के साथ भी उनकी करीबी नजर आती है।

चुनाव से पहले क्यों बढ़ा विवाद?

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाने हैं। ऐसे समय में प्रदेश महिला अध्यक्ष का इस तरह बागी होना कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

महिला वोट बैंक पर चोट: हजीना ने महिला आरक्षण को 'जुमला' बताकर आधी आबादी के बीच कांग्रेस की साख को बट्टा लगाया है।

गुटबाजी उजागर: यह विवाद साबित करता है कि प्रदेश स्तर के नेता आलाकमान (राहुल गांधी) के फैसलों को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। सेल्वपेरुंथगाई और वेणुगोपाल गुट के बीच की लड़ाई अब सड़क पर आ गई है।

भाजपा को मौका: भाजपा, जो तमिलनाडु में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, इस मुद्दे को लपककर कांग्रेस को 'महिला विरोधी' और 'भ्रष्ट' साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

हजीना सैयद का यह इस्तीफा सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में लगी 'दीमक' का सार्वजनिक प्रदर्शन है। खड़गे को दरकिनार कर राहुल को पत्र भेजना पार्टी के भविष्य के नेतृत्व संकट की ओर भी इशारा करता है।

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