संसद के संट्रल हॉल में रो पड़े नरेंद्र मोदी, आडवाणी की अांखों में भी आंसू

नरेंद्र मोदी तो उसी दिन भारत के प्रधानमंत्री बन गए थे जिस दिन राजनाथ ने उन्हें सिर्फ उम्मीदवार मात्र बनाया था। देश की जनता तो कब से इंतजार कर रही थी कि नरेंद्र मोदी का दामन थामने को मिले और विकास की रुकी एक बार फिर से चली पड़े।
संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद मोदी का संबोधन
नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले सभ को धन्यवाद ज्ञापित किया। विशेष रूप से लाल कृष्ण आडवाणी और राजनाथ सिंह का आभार प्रकट किया। अटल जी का स्वास्थ्य अच्छा होता और आज वो यहां होते तो सोने पे सुहागा होता। यह लोकतंत्र का मंदिर है, यहां हम पूरी पवित्रता के साथ, पद के लिये नहीं, सवा सौ करोड़ देशवासियों की आकाक्षाओं को हम समेट कर बैठे हैं।
मोदी ने आगे कहा- इसलिये पदभार बड़ी चीज नहीं, कार्यभार, जिम्मेदारी ज्यादा महत्वपूर्ण है। हमें उसे परिपूर्ण करने के लिये अपने आप को समर्पित करना होगा। 13 सितंबर को भाजपा के पार्लियमेंट बोर्ड ने मेरे लिये जिम्मेवारी तय की, 13 तारीख से ही मैंने अपना काम शुरू कर दिया। और पूरी तरह मन में एक कार्यकर्ता के भाव से मैंने काम शुरू किया।
शरीर का प्रत्येक कण, समय का प्रत्येक क्षण अपने दायित्वों के निर्वहन के लिये समर्पित कर देना चाहिये। 15 सितंबर से जो परिश्रम यज्ञ शुरू किया और 10 मई को जब चुनाव प्रचार समाप्त हुआ मैंने अध्यक्ष जी को फोन किया और कहा कि मैं अहमदाबाद जाकर दिल्ली आपसे मिलने आउंगा। उन्होंने कहा थके नहीं हो क्या? मैंने कहा मुझे रिपोर्ट करना है। जो आपने मुझे काम दिया है, मुझे उसे आपको रिपोर्ट करना है।
डिसीप्लिन सोल्जर की तरह काम किया
मैं दिल्ली पहुंचा और उनके पास गया और एक डिसीप्लिन सोल्जर की तरह मैंने अपने अध्यक्ष जी को रिपोर्ट दी। आपने जो काम दिया मैंने वो सारे काम किये, लेकिन एक कार्यक्रम मेरा नहीं हो पाया। वो मेरी तरफ देखते रहे। मैंने कहा मैं इतने दिनों से दौड़ रहा हूं, लेकिन 9 मई को ही इतने सारे अभियान में मुझे एक कार्यक्रम मुझे कैंसल करना पड़ा, एक जिलाध्यक्ष के बुलावे पर नहीं जा पाया।
मुख्यमंत्री बना उसके बाद मैंने मुख्यमंत्री की कुर्सी देखी, उसके बाद भी पहली बार विधानसभा देखी। आज वैसा ही अवसर आया है। लेकिन हम इस ऐतिहासिक क्षण में सवा सौ करोड़ देशवासियों को नहीं भूल सकते। मैं भारत माता को प्रणाम करता हूं, मैं इस संसद भवन को प्रणाम करता हूं। हमारे संविधान की ताकत देखिये कि आज एक गरीब घर का बेटा यहां खड़ा हुआ है। यह लोकतंत्र की ताकत है।
गरीबों के लिये जियेगी सरकार
इस चुनाव में भाजपा की जय, किसी की पराजय, एक अलग मुद्दा है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि भारत के समान नागरिक के दिल में एक विचार दौड़ गया है, कि मेरे अंदर सबसे बड़ी ताकत है। संविधान के प्रति आस्था बढ़ी है। आखिरकार सरकार किसकी है? सरकार वो हो जो गरीबों के लिये सोचे, सरकार वो हो जो गरीबों को सुने, सरकार वो हो जो गरीबों के लिये जिये, इसलिये नई सरकार गरीबों को समर्पित है। युवकों को समर्पित है। मान सम्मान के लिये तरस्ती मां-बहनों के लिये समर्पित है। गांव-गरीब, दलित, किसान, पीड़ित, वंचित सबके लिये है यह सरकार। हम सबकी जिम्मेदारी है क्योंकि हमें गरीब से गरीब आदमी ने यहां भेजा है।
मैंने ऐसे लोग देखे हैं, कि शरीर पर एक वस्त्र और कंधे पर भाजपा का झंडा। इसी तबके ने हमें यहां पहुंचाया है। आडवाणी जी ने एक शब्द प्रयोग किया, 'मोदी ने कृपा की है'। क्या मां की सेवा कृपा हो सकती है, जैसे भारत मेरी मां है वैसे ही भाजपा भी मेरी मां है।
बीजेपी संसदीय दल की बैठक में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव किया, जिसका मुरलीमनोहर जोशी, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, करिया मुंडा, अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद और मुख्तार अब्बास नकवी ने अनुमोदन किया, जिसके बाद मोदी बीजेपी संसदीय दल के नेता चुन लिए गए।
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नरेंद्र मोदी की संसद में भावुक तस्वीरें:

नरेंद्र मोदी हुए नतमस्तक
नरेंद्र मोदी ने संसद में प्रवेश करने से अपना सिर संसद के मुख्य द्वार पर झुकाया।

सादगी का पहला परिचय
नरेंद्र मोदी ने सिर झुकाया तो भाजपा का कद बढ़ गया। संसद को भी गर्व हुआ होगा।

सुषमा को भी मना लिया
नरेंद्र मोदी की बातों में जादू हैं। वो किसी को भी अपने बातों से ही मना लेते हैं।

जब मां ने दिए नरेंद्र मोदी को 100 रुपए
चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र मोदी जब अपनी मां से मिलने पहुंचे तो उन्होंने नेक के तौर पर उन्हें 101 रुपए देकर देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए शुभकामनाएं दीं।
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