LPG Crisis के बीच सरकार ने 40,000 KL केरोसिन क्यों दिया? क्या है पीछे का कारण और इंपैक्ट? Explainer
LPG Crisis India Impact: पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के बीच भारत में LPG सिलेंडर की अचानक कमी ने पूरे देश को हिला दिया है। बुकिंग पर 20-25 दिन की वेटिंग, ब्लैक मार्केट में 2,000-3,000 रुपये तक सिलेंडर और बाजार से इंडक्शन, गैस स्टोव की गायब हो जाना। ये सब देखकर लग रहा है कि क्या LPG संकट भारत को 70 साल पीछे, उस दौर में ले जा रहा है जब रसोई में लकड़ी, उपले, कोयला और केरोसिन चूल्हे ही सहारा थे? इसी बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को 40,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित करने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हालात को लेकर कहा कि देश इस वैश्विक संकट से जरूर बाहर निकलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि जैसे देश ने मिलकर कोविड संकट का सामना किया था, वैसे ही इस चुनौती को भी पार कर लिया जाएगा। लेकिन सरकार का यह कदम यह भी दिखाता है कि वह संभावित संकट के लिए बैकअप तैयार कर रही है। अब बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकार कह रही है कि पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य है, तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में केरोसिन देने की जरूरत क्यों पड़ी? आइए समझते हैं पीछे का कारण और इंपैक्ट?...

Why Government Provide 40000 Kiloliters Kerosene: सरकार ने 40,000 किलोलीटर केरोसिन क्यों दिया?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, यह फैसला एहतियाती कदम के तौर पर लिया गया है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि LPG की बढ़ती मांग को देखते हुए केरोसिन को विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में LPG सिलेंडर की बुकिंग में 20 से 25 दिन तक की वेटिंग बताई जा रही है। इसी वजह से कई जगहों पर घबराहट में ज्यादा बुकिंग होने लगी है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि ब्लैक मार्केट में सिलेंडर की कीमत 2000 से 3000 रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में सरकार ने केरोसिन का अतिरिक्त कोटा जारी करके यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि गरीब और ग्रामीण परिवारों की रसोई पर संकट न आए।
LPG Shortage Update: क्या सच में LPG की कमी है?
सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। पेट्रोल पंपों पर किसी तरह की कमी नहीं है और तेल कंपनियां लगातार सप्लाई बनाए हुए हैं। हालांकि, LPG के मामले में अचानक मांग बढ़ने से दबाव जरूर बढ़ गया है। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों की खबरों ने भी बाजार में चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए ऐसे हालात में सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
यही वजह है कि सरकार ने पहले रिफिल बुकिंग का गैप 25 दिन किया, घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की और दूसरे देशों से आयात भी तेज किया। इसके साथ ही केरोसिन को बैकअप विकल्प के रूप में तैयार रखा गया है।
त्योहारों की बौछार के बीच संकट, केरोसिन से राहत?
यह संकट ठीक उस समय आया है, जब रमजान चल रहा है। ईद आने वाली है। 19 मार्च से नवरात्रि शुरू हो रही है। रसोई का संकट न सिर्फ त्योहार बिगाड़ सकता है, बल्कि रोजगार और दैनिक जीवन पर भी असर डाल सकता है। अतिरिक्त केरोसिन इसी राहत के लिए है।
क्या भारत फिर पुराने दौर में लौट रहा है?
LPG संकट ने भारत को फिर से 60-70 साल पीछे पहुंचा दिया है। उस दौर में देश के ज्यादातर घरों में खाना लकड़ी, कोयला, उपले और मिट्टी के चूल्हों पर बनता था। हाल के दिनों में बाजार में इंडक्शन चूल्हे, इलेक्ट्रिक कुकर, केरोसिन स्टोव और छोटी भट्टियों की मांग तेजी से बढ़ी है। कई दुकानों में यह उपकरण जल्दी खत्म भी हो रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थायी बदलाव नहीं बल्कि अस्थायी घबराहट का असर है। अगर सप्लाई सामान्य रही तो स्थिति जल्द स्थिर हो सकती है।
LPG Beginning In India: भारत में LPG की शुरुआत कब हुई?
भारत में LPG का इस्तेमाल आज जितना आम है, पहले ऐसा नहीं था। देश में पहली बार 1955 में LPG पेश की गई थी। उस समय यह सेवा Burmah Shell नाम की कंपनी ने शुरू की थी, जो बाद में भारत सरकार के नियंत्रण में आकर Bharat Petroleum बन गई।
उस दौर में LPG को 'Burshane' नाम से प्रचारित किया जाता था और इसे साफ-सुथरे ईंधन के रूप में पेश किया गया था। लेकिन शुरुआत में यह सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित था। 1964 में आधुनिक घरेलू किचन के लिए Indane ब्रांड की योजना बनाई गई और 22 अक्टूबर 1965 को कोलकाता में भारत का पहला घरेलू LPG कनेक्शन जारी किया गया। उस समय पूरे देश में केवल लगभग दो हजार ग्राहक थे।
शुरुआत में लोग गैस से डरते थे, 1980 के बाद बढ़ा इस्तेमाल
1960 और 1970 के दशक में बहुत से लोग LPG सिलेंडर से डरते थे। कई लोगों को लगता था कि सिलेंडर फट सकता है या घर में रखना खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा गैस एजेंसियां भी बहुत कम थीं और सेवा बड़े शहरों तक सीमित थी। इसी वजह से उस समय ज्यादातर भारतीय परिवार लकड़ी, कोयला और केरोसिन के चूल्हों पर ही खाना बनाते थे।
1980 और 1990 के दशक में भारत सरकार ने तेल कंपनियों के जरिए LPG का वितरण तेजी से बढ़ाया। इस दौरान Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियों ने देशभर में गैस एजेंसियों का नेटवर्क फैलाया। इसके बाद शहरों और कस्बों में लाखों घरों तक LPG पहुंचने लगी और धीरे-धीरे यह रसोई का मुख्य ईंधन बन गया।
2016 के बाद सबसे बड़ा विस्तार
भारत में LPG का सबसे बड़ा विस्तार 2016 के बाद हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala Scheme) शुरू की। इस योजना के तहत गरीब महिलाओं को मुफ्त LPG कनेक्शन दिए गए। इस योजना की वजह से करोड़ों ग्रामीण परिवारों के घरों में पहली बार गैस सिलेंडर पहुंचा। LPG कवरेज लगभग 62 प्रतिशत से बढ़कर लगभग पूरे देश तक पहुंच गया।
आज भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में से एक है। देश में 31 करोड़ से ज्यादा LPG कनेक्शन हैं और हर दिन लाखों सिलेंडर घरों तक पहुंचाए जाते हैं।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ सकता है। शहरों में रहने वाले परिवारों को सलाह दी जा रही है कि वे समय पर LPG बुकिंग करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों को अतिरिक्त केरोसिन मिलने से राहत मिल सकती है, क्योंकि इससे खाना पकाने का एक वैकल्पिक साधन मिल जाएगा।
सरकार का संदेश साफ है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सप्लाई को सामान्य बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
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