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India Pakistan War: पाकिस्तान से लौटे BSF जवान की नौकरी पर संकट? जानिए क्या है नियम?

India Pakistan War: पाकिस्तान रेंजर्स (Pakistan Rangers) द्वारा हिरासत में लिए गए बीएसएफ कांस्टेबल पूर्णम कुमार साहू (Purnam Kumar Sahu) 14 अप्रैल को भारत लौट आए हैं। वाघा अटारी बॉर्डर के जरिए पूर्णम कुमार भारत वापस आए। वहीं अब लोगों के मन में सवाल उठता है कि, अगर कोई जवान गलती से बॉर्डर पार कर जाए और फिर भारत लौट आए, तो क्या होता है? क्या उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है? आइए जानते हैं ऐसे मामलों में क्या कहता है नियम और प्रोटोकॉल।

India Pakistan

23 अप्रैल से पाकिस्तान के कब्जे में थे

वहीं पूर्णम कुमार की वापसी को लेकर BSF ने बताया कि, 23 अप्रैल 2025 से पाकिस्तान रेंजर्स की हिरासत में रहे बीएसएफ (BSF) जवान पूर्णम कुमार साहू को भारत को वापस सौंप दिया गया। यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत संपन्न हुई।

जानिए क्या है प्रोटोकॉल?

वहीं दूसरे देश से वापस लौटे जवानों को सबसे पहले भारत में कई तरह के टेस्ट से गुजरना पड़ता है। उनका मेडिकल टेस्ट किया जाता है। साथ ही सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूछताछ की जाती है।

मेडिकल और साइकोलॉजिकल जांच

वापसी के बाद जवान का स्वास्थ्य परीक्षण होता है जिसमें यह देखा जाता है कि उसे कोई शारीरिक या मानसिक क्षति तो नहीं हुई।

प्राथमिक जांच (Preliminary Inquiry)

सबसे पहले यह देखा जाता है कि जवान जानबूझकर सीमा पार गया था या असावधानीवश / गलती से। अगर गलती से गया है (जैसे भ्रम में, रात में गश्ती के दौरान), तो जांच में उसे क्लीन चिट मिल सकती है। अगर संदेह होता है कि वह जानबूझकर गया था (जैसे जासूसी या दुश्मन से संपर्क के इरादे से), तो मामला गंभीर हो जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूछताछ

जवान की IB, RAW और मिलिट्री इंटेलिजेंस जैसी एजेंसियाँ गहराई से पूछताछ करती हैं। इस दौरान उनके कई तरह के सवाल किए जाते हैं। जिसमें कुछ ये हैं

  • क्या जवान से दुश्मन देश ने कोई जानकारी ली?
  • क्या उस पर कोई दबाव डाला गया?
  • कहीं वह दुश्मन देश के लिए काम तो नहीं कर रहा?

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क्या नौकरी बची रहेगी?

अगर साबित हो जाए कि जवान जानबूझकर नहीं गया था, और दुश्मन देश से कोई संपर्क नहीं किया तो उसकी नौकरी सुरक्षित रहती है। लेकिन अगर साजिश, जासूसी या देश के खिलाफ गतिविधि के सबूत मिलते हैं तो उसे बर्खास्त किया जा सकता है, और आर्मी एक्ट / ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि, जब ये साबित हो जाता है कि,जवान जानबूझकर नहीं गया था तो जवान को कुछ दिनों के लिए ऑपरेशन से बाहर रखा जाता है। फिर एक निश्चित समय के बाद उसे ड्यूटी पर वापस बुलाया जाता है।

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