नेता नहीं, अफसर नहीं, जेवर एयरपोर्ट की पहली उड़ान के हकदार बनेंगे 160 किसान! कब शुरू होगी पहली उड़ान
Noida International Airport: उत्तर प्रदेश को लंबे समय से जिस एयरपोर्ट का इंतजार था, वह अब पूरी तरह तैयार है। गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) 15 जून से कमर्शियल उड़ानों की शुरुआत करने जा रहा है। यह केवल एक नया एयरपोर्ट नहीं, बल्कि राज्य की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इसके शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को दिल्ली के एयरपोर्ट पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी।
इस एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ ही व्यापार, उद्योग, पर्यटन और निवेश को भी नई गति मिलेगी। एयरपोर्ट का पहला चरण पूरा हो चुका है और भविष्य में इसे कई गुना बड़ा बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट देश के सबसे व्यस्त हवाई केंद्रों में शामिल हो सकता है। रोजगार सृजन से लेकर लॉजिस्टिक्स सेक्टर तक, इस परियोजना का असर कई क्षेत्रों में दिखाई देने की उम्मीद है।

पहली उड़ान में कौन होगा सवार?
कमर्शियल संचालन की शुरुआत इंडिगो की उड़ान से होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विमान 15 जून की सुबह 7:05 बजे लखनऊ स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरेगा और एक घंटे बाद सुबह 8:05 बजे जेवर एयरपोर्ट पहुंचेगा। इस उड़ान को एयरपोर्ट के नियमित परिचालन की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। लंबे समय से इस दिन का इंतजार किया जा रहा था और अब एयरपोर्ट यात्री सेवाओं के लिए पूरी तरह तैयार है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेवर एयरपोर्ट के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों को पहली उड़ान का हिस्सा बनाया जाएगा। बताया गया है कि एयरपोर्ट परियोजना में किसानों के योगदान को देखते हुए उद्घाटन उड़ान में उन्हें विशेष रूप से शामिल किया जा सकता है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले करीब 160 किसानों को 15 जून की विशेष उड़ान में शामिल किया जाएगा। शनिवार को मेडिकल डिवाइस पार्क में जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने किसानों से मुलाकात कर उन्हें पास सौंपे और यात्रा से जुड़ी जानकारी दी। बताया गया कि पास पर दर्ज क्रमांक ही विमान में उनकी सीट संख्या होगी।
जानकारी के मुताबिक, इंडिगो के एयरबस A320 विमान से किसान लखनऊ जाएंगे, जहां मुख्यमंत्री से मुलाकात का कार्यक्रम है। किसानों ने इस यात्रा को सम्मान का पल बताते हुए खुशी जताई है।
बेंगलुरु के लिए शुरू होगी पहली नियमित सेवा
पहली उड़ान के आगमन के बाद एयरपोर्ट से पहली नियमित कमर्शियल सेवा बेंगलुरु के लिए संचालित की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार यह शुरुआती चरण की योजना का हिस्सा है। धीरे-धीरे उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाएगी और नए शहरों को भी नेटवर्क में शामिल किया जाएगा। एयरलाइंस कंपनियों की दिलचस्पी को देखते हुए भविष्य में यहां से देश के कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध होने की संभावना जताई जा रही है।
पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में बने इस एयरपोर्ट का पहला चरण तैयार हो चुका है। मौजूदा व्यवस्था के तहत एयरपोर्ट हर साल करीब 1.2 करोड़ यात्रियों की आवाजाही संभाल सकता है। पहले चरण में एक आधुनिक टर्मिनल भवन, रनवे, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के लिए आधुनिक तकनीक और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।
मार्च में मिला था DGCA का लाइसेंस
एयरपोर्ट को नियमित उड़ानों के लिए आवश्यक मंजूरी इस साल 6 मार्च को मिली थी। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद एयरोड्रोम लाइसेंस जारी किया था। इसके बाद से एयरपोर्ट प्रबंधन और एयरलाइंस कंपनियां संचालन शुरू करने की तैयारियों में जुटी हुई थीं। लाइसेंस मिलने के साथ ही यह साफ हो गया था कि जल्द ही यहां से यात्री उड़ानें शुरू हो जाएंगी।
1334 हेक्टेयर में फैला है पूरा प्रोजेक्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण करीब 1,334 हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया है। यह परियोजना चार चरणों में विकसित की जानी है और हर चरण के साथ इसकी क्षमता बढ़ती जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह एयरपोर्ट केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण एविएशन हब बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। इसके आसपास औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने की भी संभावना है। सरकारी अनुमान के अनुसार वर्ष 2031 तक एयरपोर्ट की सालाना क्षमता बढ़कर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी।
इसके बाद विस्तार के अगले चरणों के जरिए 2036 तक यह क्षमता 5 करोड़ और 2040 तक 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को देखते हुए यह विस्तार योजना तैयार की गई है ताकि भविष्य में यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होने की तैयारी
परियोजना के अंतिम चरण की योजना बेहद महत्वाकांक्षी है। अधिकारियों के मुताबिक भविष्य में यहां कुल पांच रनवे होंगे। जब पूरा विकास कार्य समाप्त होगा तब एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता 22.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा इसे केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। इसी वजह से इस परियोजना पर देश और विदेश के निवेशकों की भी नजर बनी हुई है। जेवर एयरपोर्ट का लाभ केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के लाखों यात्रियों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण विकल्प बनेगा। खासकर उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है जिन्हें अब तक उड़ान पकड़ने के लिए दिल्ली के एयरपोर्ट तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।
16 से ज्यादा शहरों को जोड़ने की योजना
इंडिगो ने घोषणा की है कि वह चरणबद्ध तरीके से इस एयरपोर्ट को देश के 16 से अधिक शहरों से जोड़ेगी। शुरुआती सूची में लखनऊ, हैदराबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, जयपुर, श्रीनगर और पंतनगर जैसे शहर शामिल हैं। जैसे-जैसे यात्री संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे नए रूट भी जोड़े जाएंगे। इससे उत्तर भारत और देश के अन्य हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री कर चुके हैं उद्घाटन
इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना का उद्घाटन किया था। उद्घाटन के बाद से ही लोगों के बीच यह चर्चा थी कि यहां से नियमित उड़ानें कब शुरू होंगी। अब 15 जून से संचालन शुरू होने के साथ यह इंतजार भी खत्म हो रहा है।
राज्य सरकार का अनुमान है कि एयरपोर्ट परियोजना के कारण करीब एक लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, होटल, रिटेल और अन्य सहयोगी क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से बड़े निवेश आने की भी उम्मीद जताई जा रही है।












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