रौशन सर पर टूटा दुखों का पहाड़! छोटे भाई की नेपाल में संदिग्ध मौत, कौन था प्रिंस यादव और कैसे गई जान?
Roshan Anand Sir Brother Prince Yadav Death Case: पटना के मशहूर कोचिंग 'ज्ञान बिंदु' के डायरेक्टर रौशन आनंद सर के परिवार पर इस समय मुसीबतों का सबसे बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। एक तरफ जहां रौशन सर खुद जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके छोटे भाई प्रिंस यादव की नेपाल के विराटनगर होटल में संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई है। टीवी रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंस यादव का शव नेपाल के विराटनगर के होटल में 13 जून की देर रात संदिग्ध स्थिति में मिली है। नेपाल पुलिस मौत या हत्या दोनों एंगल को लेकर जांच कर रही है। खान सर के कोचिंग पर हुए हमले में प्रिंस आरोपी भी था।
घटना के समय प्रिंस यादव के साथ मौजूद सभी युवकों को नेपाल पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फिलहाल मौत के कारणों का अभी तक स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है, जिससे मामला और भी रहस्यमय बन गया है। नेपाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। घटना ऐसे समय हुई है जब रौशन आनंद खुद पटना में चर्चित कोचिंग विवाद और मारपीट मामले में जेल में बंद हैं। ऐसे में प्रिंस यादव की मौत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

कौन था प्रिंस यादव? (Who was Prince Yadav)
मूल रूप से सहरसा के रहने वाले और पटना के चर्चित शिक्षक रौशन आनंद के छोटे भाई प्रिंस कुमार यादव की अपनी एक अलग पहचान थी। प्रिंस यादव बिहार के सहरसा जिले से जुड़े बताए जाते हैं और ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद के छोटे भाई थे। स्थानीय स्तर पर उनकी राजनीतिक सक्रियता की भी चर्चा रही है। जानकारी के मुताबिक, वे भविष्य में जिला परिषद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे और अपने क्षेत्र में लगातार सक्रिय थे।
हाल के दिनों में उनका नाम पटना के हाई-प्रोफाइल कोचिंग विवाद से भी जोड़ा जा रहा था। खान सर के कोचिंग पर हमले के मामले में प्रिंस यादव का नाम भी आरोपियों में शामिल बताया गया था। FIR दर्ज होने के बाद वह अपने 6-7 करीबी साथियों के साथ नेपाल में रह रहा था। इससे पहले 2021 में भी खान सर की कोचिंग पर हुए हमले के एक मामले में प्रिंस यादव का नाम सामने आया था और उस पर आरोप लगाए गए थे।

नेपाल के होटल में क्या हुआ? मौत की मिस्ट्री
नेपाल के एक होटल के कमरे से प्रिंस यादव की लाश मिलने के बाद से ही कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, प्रिंस की मौत बेहद संदेहास्पद हालात में हुई है। हालांकि मौके पर मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए प्रिंस के समर्थकों और परिजनों का साफ कहना है कि उसकी हत्या की गई है।
घटना के वक्त प्रिंस अकेला नहीं था। होटल के कमरे में उसके साथ कुछ अन्य दोस्त और युवक भी मौजूद थे। वारदात की सूचना मिलते ही नेपाल पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और मौके पर मौजूद सभी युवकों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस इन सभी से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि मौत के असली कारणों से पर्दा उठाया जा सके।

क्या पटना कोचिंग विवाद से जुड़ रहे हैं तार?
पटना में पिछले कुछ समय से कोचिंग संस्थानों के बीच विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग से जुड़े विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी जन्म दिया था। इसी मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और तब से वे बेऊर जेल में बंद हैं। ऐसे में उनके छोटे भाई की नेपाल में हुई संदिग्ध मौत ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
क्यों जेल में बंद हैं ज्ञान बिंदु के रौशन सर?
प्रिंस के बड़े भाई और ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद खुद इस समय पटना की बेऊर जेल में बंद हैं। बिहार में कोचिंग सेंटर्स के बीच वर्चस्व की लड़ाई अब पूरी तरह से एक क्रिमिनल केस का रूप ले चुकी है। 'खान ग्लोबल स्टडीज' के साथ हुई मारपीट और फायरिंग के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीते 3 जून को रौशन आनंद को गिरफ्तार किया था। तभी से वह न्यायिक हिरासत में हैं और उनके बाहर आने के रास्ते फिलहाल बंद नजर आ रहे हैं।

रौशन आनंद को उम्मीद थी कि उन्हें अदालत से जल्द राहत मिल जाएगी, लेकिन उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में उनकी नियमित जमानत याचिका (Regular Bail Application) दाखिल की गई थी, जिसे सुनवाई के लिए एडीजे-33 (ADJ-33) की अदालत में भेजा गया।
11 जून को इस पर अहम सुनवाई होनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर एक बड़ी तकनीकी दिक्कत सामने आ गई। केस से जुड़े बेहद जरूरी कानूनी दस्तावेज और केस डायरी समय पर अदालत के पटल पर पेश नहीं किए जा सके। इस जरूरी कागजी कमी की वजह से माननीय न्यायाधीश ने सुनवाई को अगली तारीख तक के लिए टाल दिया। इसका सीधा मतलब यह है कि कागजात न पहुंचने के कारण रौशन सर को फिलहाल बेऊर जेल की सलाखों के पीछे ही दिन काटने होंगे। एक तरफ जेल का संकट और दूसरी तरफ इकलौते भाई की मौत ने रौशन आनंद के परिवार को झकझोर कर रख दिया है।














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