पाकिस्तान भी देखता रह गया और अफगानिस्तान से भारत पहुंच गया पहला कार्गो प्लेन
काबुल। सोमवार को 60 टन के वजन से लदा पहला कार्गो एयरक्राफ्ट भारत से अफगानिस्तान पहुंचा और इसके साथ दोनों देशों के बीच हवाई मार्ग की शुरुआत भी हो गई। खास बात है कि इस बात का इल्म पाकिस्तान और वहां मौजूद आतंकियों को भी नहीं हो सका। इस कार्गो से दवाईयों को अफगानिस्तान से भारत पहुंचाया गया है।

पांच मिलियन डॉलर का कार्गो
जो कार्गो प्लेन भारत से अफगानिस्तान पहुंचा है उसकी कीमत करीब पांच मिलियन डॉलर है। इस कार्गो के सफलतापूर्वक अफगानिस्तान पहुंचने के बाद दोनों देशों के अधिकारियों को उम्मीद है कि पाकिस्तान को किनारे करते हुए दोनों देशों के बीच उड़ान में आने वाले समय में आसानी हो सकेगी। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच खतरनाक बॉर्डर की वजह से भारत और अफगानिस्तान के बीच जमीन से भेजे जाने वाले सामान में खासी दिक्कतें आती हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी ने पहली फ्लाइट के रवाना होने से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, 'हमारा मकसद अफगानिस्तान' को बदलना है। जब तब हम एक निर्यातक देश नहीं बनेंगे तब तक गरीबी और अस्थिरता को खत्म नहीं किया जा सकेगा।' वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर इस कार्गो प्लेन का स्वागत किया है। अगले हफ्ते एक और फ्लाइट भारत आएगी और यह कार्गो फ्लाइट कंधार से टेकऑफ करेगी। इसमें 40 टन ड्राइ फ्रूट भारत भेजा जाएगा।
पाक और अफगान सीमा विवाद बड़ी मुसीबत
भारतीय अधिकारियों ने इस पर कहा है कि कार्गो सेवा का मकसद अफगानिस्तान के विदेशी बाजारों से रुके हुए संबंधों को फिर से बहाल करना और कृषि और कालीन उद्योग, जो तालिबान आतंकवाद की वजह से चौपट हो चुका है उसे फिर से तरक्की के रास्ते पर वापस लाना है। अफगानिस्तान में भारत के राजदूत मनप्रीत वोहरा ने राष्ट्रपति घनी से कहा, 'इस कार्गो के आगे बढ़ने के बाद हम आपको अलग-अलग तरह से मदद करते रहेंगे और बाजार की मांग के मुताबिक कार्गो का नेटवर्क बढ़ता रहेगा।' उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी पहल में कुछ समस्याएं होती हैं लेकिन मेरा दूतावास और मेरी सरकार आपके साथ काम करने और सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। अफगानिस्तान विदेशी व्यापार के मामले में पाकिस्तान के बंदरगाहों पर निर्भर है। अफगानिस्तान को मंजूरी मिली है कि वह पाकिस्तान के जरिए कुछ सामान भारत पहुंचा सकता है लेकिन भारत से किसी भी सामान का आयात इस रास्ते के जरिए नहीं हो सकता है। वहीं सीमा विवाद की वजह से अफगानिस्तान का व्यापार चौपट हो चुका है। अफगानिस्तान के किसानों को इस बात का अफसोस है कि उसके फल और दूसरे जरूरी सामानों को निर्यात करने का कोई और तरीका नहीं है।
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