Farming Tips: 45 डिग्री का टॉर्चर! आपकी हरी-भरी फसलों को न लगे लू की नजर, अपनाएं खेती के ये मॉडर्न तरीके
Farming Tips: देश के कई राज्यों में इस समय भीषण गर्मी और लू ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बढ़ते तापमान का असर अब खेतों में साफ दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में मिट्टी तेजी से सूख रही है, सब्जियों की फसल झुलसने लगी है और नई पौध कमजोर पड़ रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार गर्मी सामान्य मौसम से काफी अलग है, इसलिए किसानों को भी अब खेती के तरीके बदलने होंगे।
केवल सिंचाई करना काफी नहीं होगा, बल्कि खेत की नमी बचाने, पौधों को तेज धूप से बचाने और सही पोषण देने पर भी ध्यान देना जरूरी है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है, जिससे फसलों के साथ भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ रहा है। अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

सबसे ज्यादा खतरे में कौन सी फसलें?
भीषण गर्मी का असर सबसे ज्यादा सब्जियों, नर्सरी और हरी पत्तेदार फसलों पर पड़ रहा है। टमाटर, पालक, धनिया, मिर्च, ब्रोकली, फूलगोभी और नई पौध तेज धूप में जल्दी सूखने लगती है। कई जगहों पर पत्तियां पीली पड़ रही हैं और पौधों में फूल बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
फल वाली फसलों पर भी गर्मी का असर दिखने लगा है। आम, तरबूज, खरबूज और अंगूर जैसी फसलों में समय से पहले फल गिरने की समस्या बढ़ सकती है। अधिक तापमान के कारण फलों का आकार छोटा रह जाता है और गुणवत्ता पर असर पड़ता है।

बदलते मौसम में बदलना होगा सिंचाई का तरीका
गर्मी में खेतों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, लेकिन पारंपरिक सिंचाई में पानी की काफी बर्बादी होती है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
इन तकनीकों में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है। इससे कम पानी में ज्यादा सिंचाई हो जाती है और बिजली का खर्च भी कम होता है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर से होंगे ये फायदे
- कम पानी में बेहतर सिंचाई
- जड़ों तक लगातार नमी पहुंचती है
- तेज गर्मी में भी पौधे हरे रहते हैं
- मजदूरी और बिजली खर्च कम होता है
- फसल की बढ़वार तेज होती है
- मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है
मल्चिंग तकनीक से बच सकती है फसल
कृषि विभाग के अनुसार, इस मौसम में मल्चिंग तकनीक किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। इसमें खेत की मिट्टी को सूखी घास, पुआल, गन्ने की पत्तियों या प्लास्टिक शीट से ढक दिया जाता है।
ऐसा करने से मिट्टी जल्दी गर्म नहीं होती और अंदर की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। इससे बार-बार सिंचाई करने की जरूरत भी कम पड़ती है।

मल्चिंग से क्या मिलेगा फायदा?
- मिट्टी ठंडी बनी रहती है
- पानी की बचत होती है
- खरपतवार कम उगते हैं
- जड़ें मजबूत बनती हैं
- उत्पादन बेहतर होता है
- खेत में नमी लंबे समय तक रहती है
ग्रीन नेट बना सकता है सुरक्षा कवच
जो किसान इस समय नर्सरी तैयार कर रहे हैं या पत्तेदार सब्जियां उगा रहे हैं, उनके लिए ग्रीन नेट बेहद जरूरी माना जा रहा है।
ग्रीन नेट तेज धूप को सीधे पौधों तक पहुंचने से रोकता है। इससे पौधों को हल्की छांव मिलती है और गर्मी का असर कम होता है। टमाटर, चेरी टमाटर, पालक, धनिया और विदेशी सब्जियों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञ 50 से 75 प्रतिशत शेड वाले ग्रीन नेट के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं, ताकि पौधों को पर्याप्त रोशनी भी मिलती रहे और तेज गर्मी से सुरक्षा भी बनी रहे।
खेत की मेढ़ पर पेड़ लगाने की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खेत की मेढ़ों पर पेड़ लगाने से गर्म हवाओं का असर काफी कम किया जा सकता है। नीम, शीशम, करंज और बांस जैसे पेड़ खेत के लिए प्राकृतिक सुरक्षा दीवार की तरह काम करते हैं।
इन पेड़ों से गर्म हवा की रफ्तार कम होती है और खेत का तापमान संतुलित रहता है। इससे फसल को लू से बचाने में मदद मिलती है।
हीटवेव में अपनाएं ये जरूरी उपाय
विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार सूखी मिट्टी फसल के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में किसानों को खेत में हल्की नमी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
- तेज लू वाले दिनों में खेत की जुताई न करें
- छोटे पौधों पर अस्थायी छांव का इंतजाम करें
- खेत की नमी की नियमित जांच करें
- सूखी पत्तियां और कमजोर पौधे समय पर हटाएं
- जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद का इस्तेमाल न करें

पौधों को दें सही पोषण
भीषण गर्मी में पौधों की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर होने लगती है। ऐसे समय में जैविक खाद, गोबर खाद और पोटाश वाले उर्वरकों का इस्तेमाल फायदेमंद माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्री शैवाल से बने बायो स्टिमुलेंट और माइक्रो न्यूट्रिएंट स्प्रे भी पौधों को गर्मी सहने में मदद कर सकते हैं। इससे पत्तियां जल्दी नहीं सूखतीं और फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
कीटों का खतरा भी बढ़ा
गर्मी बढ़ने के साथ कई कीट तेजी से फैलने लगते हैं। सफेद मक्खी, थ्रिप्स और दूसरे छोटे कीट फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे पत्तियों में सिकुड़न और दाग की समस्या बढ़ सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को समय-समय पर खेत की जांच करने और जरूरत पड़ने पर जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं।
दोपहर में सिंचाई करने से बचें
कई किसान तेज धूप में ही खेतों में पानी दे देते हैं, लेकिन इससे पानी तेजी से भाप बनकर उड़ जाता है। कृषि विभाग किसानों को सुबह जल्दी या शाम के समय सिंचाई करने की सलाह दे रहा है। साथ ही खेत में पानी जमा न होने देने और जरूरत के हिसाब से ही सिंचाई करने की भी सलाह दी गई है।
मोबाइल और टेक्नोलॉजी की मदद लें किसान
अब कई किसान मौसम की जानकारी के लिए मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र और मौसम विभाग की सलाह किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। कई जगहों पर मिट्टी की नमी मापने वाले सेंसर का इस्तेमाल भी शुरू हो गया है, जिससे किसान जरूरत के हिसाब से सिंचाई कर पा रहे हैं।
सरकार की योजनाओं का उठा सकते हैं फायदा
केंद्र और राज्य सरकारें सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर सब्सिडी भी दे रही हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत कई किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने में मदद मिल रही है। कृषि विभाग की ओर से समय-समय पर जारी होने वाली हीट एडवाइजरी पर नजर रखना भी किसानों के लिए जरूरी माना जा रहा है।
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