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Constitution Club के चुनाव में BJP Vs BJP की दिलचस्प जंग, सभी दलों के सांसद हैं वोटर, PM मोदी-शाह किसके साथ?

Constitution Club Elections 2025: देश की राजधानी दिल्ली में स्थित संविधान क्लब ऑफ इंडिया में इस बार का चुनाव राजनीति के गलियारों में खूब चर्चा बटोर रहा है। 12 अगस्त को होने जा रहे इस चुनाव में सचिव (प्रशासन) और 11 कार्यकारी सदस्यों के पदों के लिए वोटिंग होगी। खास बात यह है कि इस बार मुकाबला बीजेपी के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच है, राजीव प्रताप रूडी (Rajiv Pratap Rudy) और डॉ. संजीव बालियान (Dr. Sanjeev Baliyan)

राजनीतिक रसूख, संगठनात्मक पकड़ और सांसदों के जुड़ाव वाले इस क्लब का यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सभी दलों के सांसद मतदाता होते हैं। यानी यह मुकाबला केवल एक क्लब के पद का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी बन गया है। वहीं, मतदान से पहले ही कुछ प्रमुख पदों पर निर्विरोध चयन हो चुका है।

constitution club of India elections

कौन-कौन बनेंगे वोटर?

इस चुनाव की खासियत यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सभी दलों के सांसद वोटर हैं। सभी लोकसभा और राज्यसभा के वर्तमान सांसदों को वोटिंग का अधिकार है। कार्यकारी सदस्य के 11 पदों के लिए 14 नामांकन आए हैं जिनमें बीजेपी, कांग्रेस, शिवसेना, टीएमसी और एसपी जैसे दलों के सांसद शामिल हैं।

निर्विरोध हुए कई पदाधिकारी

मतदान से पहले ही डीएमके के त्रीचि शिवा, कांग्रेस के राजीव शुक्ला, और एपी जितेन्दर रेड्डी जैसे सांसद निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इन नेताओं ने क्रमशः सांस्कृतिक सचिव, खेल सचिव और कोषाध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा था लेकिन बाद में अन्य प्रत्याशियों के नाम वापस लेने के बाद वे निर्विरोध चुने गए।

क्लब का गौरवशाली इतिहास

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब की स्थापना 1947 में संविधान सभा के सदस्यों के आपसी संवाद हेतु हुई थी। 1965 में इसका औपचारिक उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने किया था। वर्ष 2002 में इसे सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत किया गया और 2009 में लोकसभा अध्यक्ष स्व. सोमनाथ चटर्जी के निर्देश पर क्लब में चुनाव आधारित गवर्निंग व्यवस्था लागू की गई।

सांसदों का पसंदीदा ठिकाना है कॉन्स्टिट्यूशन क्लब

दिल्ली का कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया अब सिर्फ एक क्लब नहीं रहा, बल्कि यह संसद से इतर संवाद, मेल-मुलाकात और लोकतांत्रिक सहभागिता का सजीव मंच बन चुका है। पहले जहां यह एक उपेक्षित और जर्जर भवन था, आज यह आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक प्रतिष्ठित संस्था में तब्दील हो चुका है, जहां देश के सांसद, पूर्व सांसद, पत्रकार, राजनेता और राजनीतिक दलों के पदाधिकारी नियमित रूप से आते हैं और राजनीति से इतर खुलकर संवाद करते हैं।

यहां आज मॉडर्न रेस्टोरेंट, जिम, स्पा, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, क्रिकेट नेट और एक बहुउद्देशीय हॉल जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। खास बात यह है कि इन सुविधाओं का लाभ सभी दलों के नेता और उनके परिवार उठाते हैं। क्लब में न केवल राजनीतिक बैठकें होती हैं बल्कि सामाजिक समारोह, पारिवारिक आयोजनों और विभिन्न कॉन्फ्रेंसों का भी आयोजन नियमित रूप से किया जाता है।

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क्यों है ये चुनाव अहम?

हालांकि यह चुनाव संसद से बाहर का है, लेकिन इसकी राजनीतिक अहमियत किसी भी संसदीय प्रक्रिया से कम नहीं मानी जा रही है। जहां एक ओर यह सांसदों के बीच सामाजिक और पेशेवर संवाद का मंच है, वहीं दूसरी ओर यह राजनीतिक ताकत और गुटबाजी का भी प्रतिबिंब बनता जा रहा है।

नज़रें अब 12 अगस्त पर हैं, जब यह दिलचस्प और सियासी गर्माहट से भरा चुनाव संपन्न होगा और यह तय होगा कि रूडी की पकड़ बरकरार रहती है या बालियान कोई नया अध्याय लिखते हैं।

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