दक्षिणी राज्यों के लिया लोकसभा में 33% प्रतिनिधित्व की मांग, परिसीमन पर क्या बोले सीएम रेवंत रेड्डी?
CM Revanth Reddy: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने लोकसभा में दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दक्षिण भारत की हिस्सेदारी 24% है, जिसे 33% तक बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी चेताया कि यदि यह प्रतिशत और घटा तो दक्षिण भारतीय राज्य राष्ट्रीय राजनीति में केवल दर्शक बनकर रह जाएंगे, जिससे लोकतंत्र की भावना कमजोर होगी।
मुख्यमंत्री रेड्डी ने यह भी कहा कि "यदि हमें एक निष्पक्ष और संतुलित लोकतंत्र चाहिए, तो हमें इस असमानता को खत्म करना होगा।" उन्होंने सभी प्रभावित राज्यों से एकजुट होकर इस मुद्दे पर संयुक्त प्रयास करने की अपील की।

चेन्नई में संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक
शनिवार (22 मार्च 2025) को चेन्नई में संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) की बैठक में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि दक्षिणी राज्यों की कुल 130 सीटें ही लोकसभा में हैं, जबकि कुल सीटों की संख्या 543 है। उन्होंने कहा, "यह बहुत कम है और इससे दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत कमजोर हो रही है।"
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रेड्डी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की इस पहल की सराहना की और अगले चरण की बैठक हैदराबाद में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे को आगे ले जाने के लिए चर्चा करेंगे और सभी नेताओं की एक सार्वजनिक सभा भी आयोजित करेंगे।"
'जनसंख्या आधारित परिसीमन स्वीकार नहीं'
मुख्यमंत्री रेड्डी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'जनसांख्यिकीय दंड' नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 1971 के बाद से दक्षिण भारत ने परिवार नियोजन को गंभीरता से अपनाया और जबरदस्त विकास किया। इसके विपरीत, उत्तर भारत के कई बड़े राज्य इसमें पीछे रह गए।
दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी, प्रति व्यक्ति आय अधिक हुई, बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित हुआ और सामाजिक कल्याण के मामले में दक्षिणी राज्य आगे रहे। रेड्डी ने कहा कि "अगर जनसंख्या को परिसीमन का आधार बनाया गया तो दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी। यह उन राज्यों को सजा देने जैसा होगा जिन्होंने विकास किया है। हमें बीजेपी को किसी भी अनुचित परिसीमन को लागू करने से रोकना होगा।"
दक्षिण भारत को मिलता है कम हिस्सा
मुख्यमंत्री रेड्डी ने दावा किया कि दक्षिण भारत को केंद्र सरकार से उतना नहीं मिलता, जितना वह करों के रूप में योगदान करता है।
- तमिलनाडु को ₹1 टैक्स देने पर 26 पैसे वापस मिलते हैं।
- कर्नाटक को 16 पैसे, तेलंगाना को 42 पैसे और केरल को 49 पैसे मिलते हैं।
इसके उलट,
- बिहार को ₹1 टैक्स देने पर ₹6.06,
- उत्तर प्रदेश को ₹2.03,
- मध्य प्रदेश को ₹1.73 मिलते हैं।
रेड्डी ने इस असमानता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह भेदभाव खत्म किया जाना चाहिए।
'मोदी सरकार भी पूर्ववर्ती सरकारों की तरह करे परिसीमन'
रेड्डी ने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजनीतिक असंतुलन से बचने के लिए परिसीमन किया लेकिन सीटें नहीं बढ़ाईं। 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने भी यही नीति अपनाई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी यही करने की मांग की। उन्होंने कहा, "हम प्रधानमंत्री को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि दक्षिण भारत जनसंख्या आधारित परिसीमन को स्वीकार नहीं करेगा।"
रेड्डी ने चेताया कि अगर प्रोराटा फॉर्मूला लागू किया गया तो दक्षिण भारत की राजनीतिक शक्ति और कमजोर हो जाएगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि केंद्र सरकारें कई बार एक सीट के बहुमत से बनी या हारी हैं।
अगली बैठक हैदराबाद में
मुख्यमंत्री रेड्डी ने घोषणा की कि हैदराबाद में जल्द ही एक और बैठक होगी, जिसमें दक्षिणी राज्यों और पंजाब के नेता शामिल होंगे। उन्होंने सभी नेताओं से इस बैठक में शामिल होकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाने की अपील की।
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