कश्मीर घाटी में दहशत फैलाने 22 साल बाद फिर लौटा पुराना आतंक
जम्मू कश्मीर। अगस्त माह में उत्तरी कश्मीर के हाजिन पैरे मोहल्ला इलाके से आतंकियों ने मुजफ्फर नाट्टा का सिर कलम कर दिया था। पुलिस ने मुजफ्फर की बिना सिर वाली बॉडी झेलम से बरामद की थी। हाल ही में आतंकियों ने इसी तरह की एक और घटना को अंजाम देकर पूरे कश्मीर घाटी में दहशत का माहौल बना दिया है। हालांकि, कश्मीर में आतंक का यह कोई नया रूप नहीं है, इससे पहले भी इस प्रकार की घटनाएं देखने को मिल चुकी है।

पिछले हफ्ते आतंकियों ने कश्मीर में बीजेपी के यूथ लीडर गौहर हुसैन भट्ट को अगवा कर उनका भी सिर धड़ से अलग कर दिया। पुलिस को सिर से अलग हुई भट्ट की मृत बॉडी शोपियां जिले के किलूर में मिली। पुलिस के मुताबिक, शोपियां में बोंगम के रहने वाले 30 वर्षीय भट्ट को पहले गोली मारकर आतंकियों ने उनका गला रेता। बीजेपी नेता की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में खौफ का नया माहौल पैदा हुआ है।
कश्मीर में लंबे समय बाद आतंक का यह पुराना दहशत फिर लौटा है, जिसमें नेताओं और पुलिस का सहयोग करने वाले लोगों पर निशाना बनाया जा रहा है। कश्मीर में 1995 में पहली बार इस प्रकार की घटना देखने को मिली थी। कश्मीर घाटी में 1995 में अल-फरान नामक आतंकी संगठन ने कुल छह विदेशी पर्यटकों का अपहरण कर उनका सिर काट दिया था। वहीं, अप्रैल 1998 में कश्मीर के उधमपुर इलाके में कुल 25 हिंदुओं का अपहरण कर सिर धड़ से अलग कर दिया था। इसके बाद 2002 में भी इस प्रकार की घटनाएं देखने को मिली थी। वहीं, आतंकियों ने 2009 में कश्मीर के कुपवाड़ा में फॉरेस्ट गार्ड का गला रेत कर हत्या कर दी थी। पुलिस के मुताबिक, इस प्रकार की घटना कोई एक ही आतंकी ग्रुप बार-बार अंजाम दे रहा है।
पिछले साल जुलाई में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद, कश्मीर घाटी में हालात बद से बदतर हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों के मानें तो पिछले एक साल से पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ प्रोक्सी वॉर को और तेज किया है। 2016 से लेकर अब तक 340 आतंकियों को मार गिराया गया है, लेकिन 150 से ज्यादा सुरक्षा बलों की भी जान गई हैं। 2016 की तुलना में इस साल मौतों की संख्या लगभग डबल है और पत्थरबाजों की संख्या में पिछले साल की तुलना में भी वृद्धि हुई है।












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