'पाकिस्तान से आपकी बात होती है क्या', अखिलेश यादव और अमित शाह के बीच तीखी बहस, क्यों भिड़े दोनों नेता?
Amit Shah vs Akhilesh Yadav Parliament: लोकसभा में मंगलवार (29 जुलाई) को Operation Sindoor को लेकर बहस के दौरान सदन का माहौल उस वक्त गरमा गया जब गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बहस आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर हो रही थी, लेकिन एक टिप्पणी ने सदन का तापमान बढ़ा दिया।
दरअसल, गृह मंत्री शाह 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत भारत की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी सदन में दे रहे थे। इसी बीच अखिलेश यादव ने बीच में टोका जिसके बाद गृह मत्री अमित शाह ने जो जवाब दिया वो अब वायरल हो गया।

जब अखिलेश और शाह के बीच हुआ जुबानी युद्ध
गृह मंत्री शाह 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत भारत की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी सदन में दे रहे थे। उन्होंने कहा, मोदी जी ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए जिन आतंकवादियों को भेजा गया था, उनके आकाओं को भी मिटा दिया... सेना और सीआरपीएफ ने सभी आतंकियों को खत्म कर दिया।
इस पर अखिलेश यादव ने बीच में टोका और कहा, 'आका तो पाकिस्तान है।' इस टिप्पणी पर शाह ने पलटवार करते हुए तीखे लहजे में कहा, पाकिस्तान से आपकी बात होती है क्या? अरे बैठ जाओ भाई, बैठ जाओ।'
अमित शाह का बयान हुआ वायरल
इसके बाद सदन में शोरगुल शुरू हो गया और माहौल कुछ देर के लिए पूरी तरह गरमा गया। अमित शाह ने आगे कहा कि वे आतंकियों के आकाओं के नाम, स्थान और समय तक बताने को तैयार हैं। 'मैं अपेक्षा करता था कि विपक्ष को भी इस पर गर्व होगा, लेकिन इनके चेहरे पर तो सियाही छा गई है। आतंकवादी मारे गए, आपको इसका भी आनंद नहीं है।
अखिलेश यादव ने एक बार फिर टोकाटाकी की, जिसके जवाब में गृह मंत्री ने कहा, 'भाई आप आतंकवादियों का धर्म देखकर दुखी मत होइए। अखिलेश जी बैठ जाइए।'
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ये नरेन्द्र मोदी सरकार है-अमित शाह
इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा को बताते हुए कहा कि, 'हमारे समय में जो भी आतंकी घटनाएं हुई हैं, वो पाक प्रेरित और कश्मीर centric हुई, देश के अन्य हिस्से में 2014 से 2025 के बीच एक भी आतंकी घटना नहीं हुई है। ये नरेन्द्र मोदी सरकार है। कश्मीर में भी आज ऐसी स्थिति है कि उनको पाकिस्तान से आतंकवादी भेजने पड़ते हैं, कश्मीर में अब हमारे आतंकवादी नहीं बनते हैं।'
न रहता बांस न बजती बांसुरी- शाह
1971 में पूरे देश ने इंदिरा जी का समर्थन किया था। उन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए, ये भारत की बहुत बड़ी विजय थी, इसपर पूरा भारत गर्व करता है, हम भी करते हैं। उस समय 93 हजार युद्धबंदी और 15 हजार वर्ग किमी क्षेत्र हमारे कब्जे में था। मगर शिमला समझौता हुआ, तो ये PoK मांगना ही भूल गए। अगर उस समय PoK मांग लेते, तो न रहता बांस न बजती बांसुरी। इन्होंने PoK तो नहीं लिया, उल्टा 15 हजार वर्ग किमी की जीती हुई भूमि भी वापस दे दी।
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