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Om Prakash Chautala Family Tree: 5 बार CM, 1 बार जेल! भाई-बेटा और बहू के वंशवाद के राज की कहानी

Om Prakash Chautala Family Tree: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला का 20 दिसंबर 2024 को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। गुरुग्राम स्थित अपने घर पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों की कोशिशें नाकाम रहीं, और उन्होंने दोपहर 12 बजे अंतिम सांस ली।

ओम प्रकाश चौटाला का जीवन उनके राजनीतिक सफर और परिवार में छाए विवादों की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहा। वे हरियाणा के सबसे बड़े राजनीतिक परिवारों में से एक, चौधरी देवीलाल के बेटे थे, जिनकी विरासत ने पूरे परिवार को राजनीति में सक्रिय बनाए रखा। आइए आपकाे रूबरू कराते हैं वंशवाद के असली खानदान से...

Om Prakash Chautala Family Tree

चौधरी देवीलाल (1914-2001): हरियाणा की राजनीति के स्तंभ

चौधरी देवीलाल को हरियाणा की राजनीति का ताऊ कहा जाता है। चौधरी देवीलाल हरियाणा की राजनीति का ऐसा नाम हैं, जिनके बिना राज्य की सियासत अधूरी मानी जाती है। सिरसा के तेजा खेड़ा गांव में 1914 में जन्मे देवीलाल हरियाणा के चार बार मुख्यमंत्री बने और देश के उप-प्रधानमंत्री भी रहे। उन्होंने किसानों और आम जनता के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। देवीलाल और हरखी देवी के चार बेटे हुए-ओम प्रकाश, रणजीत सिंह, प्रताप सिंह, और जगदीश सिंह। इनमें से ओम प्रकाश चौटाला ने उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया।

ओम प्रकाश चौटाला(1935-2024): हरियाणा के 5 बार CM, 1 बार जेल

ओम प्रकाश चौटाला ने 1968 में राजनीति की शुरुआत की। वे पहली बार 1989 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनका कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। 1999 में वे चौथी बार मुख्यमंत्री बने और 2000 में पांचवीं बार। उनकी सरकार ने शिक्षा और विकास के क्षेत्र में कई पहल कीं, लेकिन जूनियर बेसिक टीचर्स भर्ती घोटाले में उन्हें और उनके बेटे अजय चौटाला को जेल जाना पड़ा। ओम प्रकाश चौंटाला और स्नेहलता के दो बेटे हुए। चौटाला परिवार की अगली पीढ़ी भी राजनीति में सक्रिय है। ओम प्रकाश के बड़े बेटे अजय चौटाला और छोटे बेटे अभय चौटाला ने परिवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ाया।

संतान: अजय चौटाला, अभय चौटाला।

1- अजय चौटाला: अजय ने 1980 के दशक में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया, राजस्थान से दो बार विधायक पहले दांता रामगढ़ (1989) से और फिर नोहर (1993) से चुने गए। अजय की पत्नी नैना डबवाली निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रही हैं। दोनों के दो बेटे हैं, जिनमें दुष्यंत चौटाला (हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम) और दिग्विजय चौटाला (राष्ट्रीय अध्यक्ष एन आईएनएसओ) है। 2018 में अजय ने और उनके बेटों-दुष्यंत और दिग्विजय-ने इनेलो से अलग होकर जननायक जनता पार्टी (जजपा) बनाई। 2019 में छोटे बेटे दिग्विजय ने जींद उपचुनाव लड़ा। वे दूसरे स्थान पर रहे।

संतान: दुष्यंत चौटाला, दिग्विजय चौटाला।

2- अभय चौटाला: अभय सिंह चौटाला ने इनेलो की बागडोर संभाली और हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता बने। यह इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव हैं। हरियाणा ऐलनाबाद से लगातार 4 बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनकी पत्नी कांता ने भी 2016 में जिला परिषद का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गईं। कांता इनेलो की महिला विंग का नेतृत्व करती हैं। इनके दो बेटे करण और अर्जुन चौटाला। बड़े बेटे करण ने पार्टी के राजनीतिक मामलों में गहरी दिलचस्पी लेनी शुरू की। उधर, 2019 में छोटे बेटे अर्जुन कुरुक्षेत्र से लोकसभा चुनाव में उतरे थे।

संतान: करण,अर्जुन।

Om Prakash Chautala Family Tree

रणजीत सिंह चौटाला: देवी लाल के दूसरे बेटे

चौटाला के एक और भाई रणजीत सिंह 1987 में देवीलाल के कार्यकाल के दौरान विधायक और कैबिनेट मंत्री भी रहे। वे ओम प्रकाश से दूरी बनाए रखते थे। वे 2019 में कांग्रेस से जुड़े, जबकि उनके बेटे गगनदीप एक व्यवसायी हैं और सक्रिय राजनीति में नहीं हैं।
संतान: गगनदीप और स्व. संदीप सिंह।

प्रताप सिंह चौटाला: देवी लाल के तीसरे बेटे

प्रताप सिंह राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन अब इस दुनिया में नहीं हैं। चौटाला के भाई प्रताप सिंह 1967 में कांग्रेस के टिकट पर एलानाबाद से विधायक चुने गए थे। उन्होंने 1977 और 1982 में दो और विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन दोनों में हार गए। जून 2014 में उनका निधन हो गया। प्रताप ने ही 1997 में चौटाला के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय बंसीलाल मुख्यमंत्री थे।

चौटाला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि, तीन साल बाद जब चौटाला हरियाणा के सीएम बने तो पुलिस ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। हालांकि, प्रताप के बेटे रवि 2019 में इनेलो के सदस्य बने। उनकी पत्नी सुनैना को इसी साल इनेलो की महिला विंग का महासचिव नियुक्त किया गया।

संतान:रवि और जितेंद्र।

जगदीश सिंह चौटाला: चौथे बेटे

जगदीश सिंह राजनीति से दूर रहे। जगदीश सिंह देवीलाल के इकलौते बेटे थे, जिन्होंने कभी सक्रिय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि, उनके बेटों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। अक्टूबर 2014 के विधानसभा चुनावों से पहले, जगदीश के बेटे आदित्य और अनिरुद्ध विधानसभा चुनाव लड़ने की ख्वाहिश लेकर भाजपा में शामिल हुए थे। हालांकि, भाजपा ने उन पर विचार नहीं किया। आदित्य ने जनवरी 2016 में सिरसा के जोन 4 में पंचायत चुनावों में अभय की पत्नी कांता को भी हराया था।
संतान: आदित्य , अभिषेक और अनिरुद्ध।

परिवार की महिला शक्ति

  • नैना चौटाला:अजय चौटाला की पत्नी और जजपा की नेता। उन्होंने 2014 और 2019 में विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाई।
  • कांता चौटाला:अभय चौटाला की पत्नी, जो इनेलो की महिला विंग का नेतृत्व करती हैं।

चौटाला परिवार: सियासी विरासत और विवाद

चौटाला परिवार की अगली पीढ़ी भी राजनीति में सक्रिय है। ओम प्रकाश के बड़े बेटे अजय चौटाला और छोटे बेटे अभय चौटाला ने परिवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ाया। 2018 में परिवार में विवाद उभरा, जब दुष्यंत चौटाला और अभय चौटाला के बीच मतभेद बढ़ गए। इसके बाद दुष्यंत और दिग्विजय ने जजपा का गठन किया और इनेलो से अलग हो गए।

अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक, ओम प्रकाश चौटाला ने पार्टी को दोबारा खड़ा करने की कोशिश की। उनका योगदान और संघर्ष हरियाणा की राजनीति में हमेशा याद किया जाएगा।

ये भी पढ़ें- Om Prakash Chautala: कितनी संपत्ति के मालिक थे ओमप्रकाश चौटाला, 87 साल की उम्र में पास की थी 12वीं की परीक्षा

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