Trump-Xi Meet: क्या खत्म होगा ट्रेड वॉर? चीन से क्या लेकर लौटे प्रेसिडेंट ट्रंप, जानें 5 बड़ी बातें। Explainer
Trump China Visit: 2025 से अमेरिका की सत्ता में वापस लौटे ट्रंप पूरी दुनिया के साथ रंगबाज की तरह पेश आ रहे थे। एक साल में कई देशों ने ट्रंप की दादागीरी के 5G तेवर दिखाने वाले ट्रंप बीजिंग भी 5G तेवरों के साथ ही पहुंचे थे लेकिन जब लौटे ये तेवर खाली 2G रह गए। उनका कॉन्फिडेंस कुछ यूं गायब हुआ जैसे फ्री के WiFi का नेटवर्क। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि चीन गए ट्रंप क्या देकर आए हैं और क्या लेकर लौटे हैं। बाहर से चेहरे पर मुस्कान के पीछे नुकसान है या फायदा समझते हैं।
जितनी बड़ी बातें उतनी डील नहीं?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump दो दिन की यात्रा के बाद चीन से अमेरिका लौट गए हैं। बीजिंग छोड़ने से पहले ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ हुए समझौतों को शानदार व्यापारिक सौदे बताया। उन्होंने कहा कि इन डील्स से दोनों देशों को बड़ा फायदा होगा। साथ ही ट्रंप ने Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए चीन की मदद स्वीकार करने की भी बात कही।

ट्रंप ने कहा, "हमने कुछ शानदार ट्रेड डील की हैं, जो दोनों देशों के लिए बहुत अच्छे हैं।" उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बातचीत के दौरान "कई समस्याएं सुलझाई" गई हैं। ट्रंप ने दावा किया चीन ने 200 बोइंग विमानों की डील पर सहमति जताई है। ये एकमात्र ठोस डील कही जा सकती है जो इस दौरे पर हुई लेकिन इस पर भी चीन ने कोई जवाब नहीं दिया है।
बीजिंग में ट्रंप का बदला हुआ अंदाज सबको चौंका गया
बीजिंग में ट्रंप की विदाई देखने पहुंचे स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों ने एक बात साफ नोटिस की। इस बार ट्रंप का व्यवहार पूरी तरह बदला हुआ था। आमतौर पर आक्रामक और टकराव वाली राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले ट्रंप इस दौरे में काफी शांत और संयमित नजर आए। कई मौकों पर वह शी जिनपिंग के प्रति सम्मान दिखाते दिखाई दिए। यही वजह है कि सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उनके बदले हुए लहजे पर लगातार चर्चा हो रही है।
जिनपिंग की तारीफ में पढ़े कसीदे
जेलेंस्की हों या पूर्व राष्ट्रपति बाइडन, एक साल में ट्रंप ने कई देसी-विदेशी नेताओं की बेइज्जती करने और मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन यही ट्रंप जिनपिंग के सामने बेहद सलीके के साथ व्यवहार करते दिखे। पहली बैठक के बाद ट्रंप ने शी को महान नेता और अपना मित्र बताया। साथ ही जिनपिंग के साथ होने को सम्मान की बात बताया। ट्रंप यहीं नहीं रुके बल्कि Fox News को दिए इंटरव्यू में भी ट्रंप ने शी जिनपिंग की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा-
"अगर आप हॉलीवुड जाएं और चीन के नेता की भूमिका निभाने के लिए किसी अभिनेता को ढूंढें, तो शी जिनपिंग बिल्कुल उसी तरह फिट बैठेंगे। शी जैसा व्यक्तित्व आसानी से नहीं मिलता। उन्होंने शी की लंबाई और व्यक्तित्व का भी जिक्र किया और उन्हें बहुत लंबा बताया"।ट्रंप के इस बदले बिहेवियर को सभी नोटिस किया और ट्रंप की किरकिरी भी हुई।
सम्मान या डर?
पिछले डेढ़ साल को समझें तो ट्रंप हमेशा दबाव बनाने वाले नेता माने जाते हैं, पीछे हटने वाले नहीं। ऐसे में उनका नरम रवैया किसी बड़े संकेत की तरफ इशारा करता है। जब लहजा नरम पड़ता है, तो यह कुछ गहरा संकेत देता है। सम्मान या शायद डर? आप खुद तय कीजिए।
ताइवान पर एक लफ्ज न बोल पाए ट्रंप
ट्रंप के चीन दौरे से पहले माना जा रहा था कि ताइवान का मुद्दा बातचीत का सबसे बड़ा विषय होगा। कई एक्सपर्ट्स को डर था कि ट्रंप कहीं ताइवान के प्रति अमेरिका की पुरानी नीति में बदलाव न कर दें। चीन ताइवान को अपना अलग हुआ प्रांत मानता है, जबकि अमेरिका लंबे समय से ताइवान का समर्थन करता रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पूरी यात्रा के दौरान ट्रंप ने ताइवान का नाम तक नहीं लिया। यहां तक कि व्हाइट हाउस की आधिकारिक रिपोर्ट में भी इसका कोई जिक्र नहीं था। ये कुछ ऐसा था कि जैसे पहले से किसी ने इस बारे में सख्त चेतावनी दी है।
शी जिनपिंग ने पहले ही दे दी थी युद्ध की चेतावनी
ट्रंप की चुप्पी से पहले शी जिनपिंग ने ताइवान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ताइवान की स्वतंत्रता और ताइवान स्ट्रेट में शांति एक साथ संभव नहीं हैं। शी ने चेतावनी दी कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि अगर इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो दोनों देशों के बीच टकराव और यहां तक कि युद्ध भी हो सकता है। उन्होंने कहा था, "अगर इस मुद्दे को सही तरीके से संभाला गया तो संबंध स्थिर रहेंगे, नहीं तो संघर्ष पूरे रिश्ते को खतरे में डाल देगा।"
अमेरिका की बेइज्जती पर ट्रंप की सहमति
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भी ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को चौंका दिया। उन्होंने अमेरिका को गिरता हुआ राष्ट्र कहने वाली शी जिनपिंग की बात से सहमति जताई। हालांकि ट्रंप ने कहा कि शी का इशारा बाइडेन प्रशासन के चार सालों की भारी क्षति की तरफ था। ट्रंप ने खुली सीमाओं, हेवी टैक्स, खराब व्यापारिक समझौतों और बढ़ते अपराध को अमेरिका की कमजोरी बताया।
क्या है थ्यूसीडाइड्स ट्रैप? जिसमें फंसे ट्रंप
कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह पोस्ट "थ्यूसीडाइड्स ट्रैप" (thucydides trap) सिद्धांत से जुड़ी थी। यह सिद्धांत Graham Allison ने दिया था। इसके मुताबिक जब कोई नई ताकत तेजी से उभरती है, तो पुरानी महाशक्ति खुद को खतरे में महसूस करती है और दोनों के बीच युद्ध की संभावना बढ़ जाती है। कई एक्सपर्ट बार-बार इशारा करते रहे हैं कि ये दौर अमेरिका और चीन के बीच पावर ट्रांजिशन की ओर इशारा करता है।
चीन के खिलाफ सख्त रवैये से बिल्कुल उलट दिखे ट्रंप
यह दौरा ट्रंप की पुरानी चीन नीति से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। पहले ट्रंप चीन पर अमेरिका की नौकरियां छीनने, अनुचित व्यापार करने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में चीन पर भारी टैरिफ भी लगाए थे। लेकिन इस बार उनका रवैया कहीं ज्यादा नरम दिखाई दिया।
ईरान युद्ध ने ठंडे किए ट्रंप के तेवर
विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रंप के बदले रवैये की एक बड़ी वजह ईरान संकट भी है। अमेरिका के दबाव के बावजूद ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। ऐसे में ट्रंप चीन को अपने पक्ष में लाना चाहते थे क्योंकि चीन पर ईरान की मदद के आरोप लग रहे थे। माना जा रहा है कि इसी वजह से ट्रंप को बातचीत में ज्यादा लचीला रवैया अपनाना पड़ा।
सौदे की कला या चापलूसी की राजनीति?
ब्रिटिश अखबार The Mirror में पत्रकार Christopher Bucktin ने अपने कॉलम में ट्रंप के रवैये पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, "सौदे की कला अब उस समय चापलूसी की कला जैसी लगती है, जब दूसरे आदमी के पास सारे पत्ते हों।" उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग यह बात जानते थे, दुनिया का सबसे महान" व्यवसायी भी यह जानता था, लेकिन शायद कमरे में मौजूद एकमात्र व्यक्ति जिसे इसका एहसास नहीं हुआ, वह खुद ट्रंप थे।
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