Bhojshala को HC ने वाग्देवी मंदिर माना, Ram Mandir के बाद हिंदू पक्ष की दूसरी बड़ी जीत, Timeline में कहानी

Bhojshala-Kamal Maula Dispute High Court Verdict: 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार की विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर करार दिया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने ASI के 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वे, 2000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर हिंदू पक्ष के मुख्य दावों को मंजूर किया।

कोर्ट ने ASI को परिसर का संरक्षण जारी रखने का निर्देश दिया, जबकि हिंदुओं को नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया। मुस्लिम पक्ष को सरकार से वैकल्पिक जमीन मांगने की सलाह दी गई। यह फैसला न केवल भोजशाला विवाद का टर्निंग पॉइंट है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मंदिर-मस्जिद विवादों, Places of Worship Act 1991, ASI की भूमिका और सांप्रदायिक सद्भाव की बहस को नई दिशा देता है। आइए विस्तार से जानते हैं कोर्ट के फैसले के बुलेट्स Points...

indore-hc-descision-dhar-bhojshala
  • भोजशाला परिसर मूल रूप से परमार राजा भोज द्वारा स्थापित सरस्वती विद्या मंदिर है।
  • मौजूदा संरचना में प्राचीन हिंदू मंदिरों के अवशेष, शिलालेख, मूर्ति खंड और स्थापत्य प्रमाण मिले।
  • ASI संरक्षण जारी रहेगा।
  • हिंदुओं को पूजा का अधिकार; मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन का विकल्प।
  • प्रशासन ने धार और इंदौर में भारी सुरक्षा व्यवस्था की। 12 लेयर सुरक्षा, 1200+ पुलिसकर्मी, RAF तैनात।

Bhojshala Historical Background: भोजशाला का ऐतिहासिक बैकग्राउंड क्या है?

राजा भोज का स्वर्ण युग (1010-1055 ई.): परमार वंश के महान शासक भोज ने धार को अपनी राजधानी बनाया। वे विद्वान, कवि, वास्तुशास्त्री और योद्धा थे। समरांगण सूत्रधार जैसे ग्रंथों में उन्होंने मंदिर निर्माण के मानदंड दिए। भोजशाला को सरस्वती सदन या वाग्देवी मंदिर के रूप में स्थापित किया गया, जो प्राचीन काल का प्रमुख विद्या केंद्र था।

dhar-bhojshala

13वीं-14वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के आक्रमणों (अलाउद्दीन खिलजी, दिलावर खान) के दौरान कई हिंदू मंदिर क्षतिग्रस्त हुए। 15वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत के दौरान कमाल मौला (सूफी संत) की दरगाह बनी। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। 1875 में वाग्देवी प्रतिमा: खुदाई में मिली मूर्ति ब्रिटिश म्यूजियम में है। हिंदू पक्ष इसे वापस लाने की मांग करता रहा है।

Bhojshala Case Timeline: 1995 से 2026 तक

dhar-bhojshala

ASI रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष (2026)

  • परिसर में प्राचीन विशाल हिंदू संरचना के अवशेष।
  • मंदिरों के खंभे, मूर्ति टुकड़े (39+ टूटी हुई मूर्तियां), शिलालेख।
  • मौजूदा ढांचा पुराने मंदिर अवशेषों से बनाया गया।
  • कभी मस्जिद के रूप में डिजाइन नहीं किया गया था।

ASI ने रिपोर्ट कोर्ट में पेश की, जिसमें 1710+ अवशेष का जिक्र। मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट को 'पक्षपाती' बताया, लेकिन कोर्ट ने ASI की वैज्ञानिकता पर भरोसा जताया।

हिंदुओं के पक्ष में कौन-कौन से फैसले? ASI की क्या भूमिका रही?

dhar-bhojshala
हिंदुओं के पक्ष में कौन-कौन से फैसले?

पहली जीत: अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद (2019)

  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला (9 नवंबर 2019): विवादित 2.77 एकड़ जमीन राम लला विराजमान (हिंदू पक्ष) को सौंपी गई। मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।
  • वैकल्पिक जमीन: मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए दी गई।
  • ASI की भूमिका: ASI की 2003 रिपोर्ट को कोर्ट ने महत्वपूर्ण माना। रिपोर्ट में बाबरी ढांचे के नीचे गैर-इस्लामिक (हिंदू मंदिर जैसी) संरचना के प्रमाण मिले - स्तंभ, मूर्ति अवशेष आदि।
  • परिणाम: 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। यह स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा धार्मिक-कानूनी फैसला माना जाता है।

दूसरी जीत: भोजशाला-कमाल मौला विवाद (धार, मध्य प्रदेश)

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट फैसला (15 मई 2026): इंदौर बेंच ने भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर करार दिया। हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला।
  • ASI की भूमिका: 2024 में 98 दिनों का वैज्ञानिक सर्वे (GPR, कार्बन डेटिंग आदि)। ASI रिपोर्ट (2000+ पृष्ठ) में परमार काल (राजा भोज, 11वीं सदी) के मंदिर अवशेष, देवी मूर्तियां (गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह आदि), स्तंभ और शिलालेख मिले। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को आधार बनाया।
  • अन्य: 2003 ASI आदेश (नमाज की अनुमति) को खारिज किया गया। ASI को संरक्षण जारी रखने का निर्देश। मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन का सुझाव।

तीसरा लंबित: ज्ञानवापी मस्जिद विवाद (काशी)

  • कोर्ट के प्रमुख आदेश: वाराणसी जिला अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना। पूजा अधिकार (व्यास जी तहखाने) दिए गए।
  • ASI सर्वे: 2023 में ASI को वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति। सुप्रीम कोर्ट ने भी सर्वे पर रोक नहीं लगाई।
  • ASI रिपोर्ट (2023-24): रिपोर्ट में मंदिर अवशेष मिले - हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां, स्तंभ, स्वस्तिक चिन्ह, "ॐ" शिलालेख आदि। रिपोर्ट में कहा गया कि 17वीं शताब्दी में मौजूदा संरचना पहले के बड़े हिंदू मंदिर पर बनी।
  • वर्तमान स्थिति: अंतिम फैसला लंबित, लेकिन हिंदू पक्ष को मजबूत कानूनी और पुरातात्विक आधार मिला। काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तार से जुड़े दावों को बल।

चौथा लंबित: शाही ईदगाह मस्जिद-कृष्ण जन्मभूमि विवाद (मथुरा)

  • कोर्ट की प्रगति: मथुरा जिला अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना। Places of Worship Act 1991 के बावजूद कुछ अपवादों के तहत मामले आगे बढ़े।
  • ASI की भूमिका: अभी पूर्ण सर्वे नहीं हुआ, लेकिन अयोध्या और ज्ञानवापी के ASI सर्वे के नजीर के आधार पर हिंदू पक्ष मजबूत स्थिति में है। कोर्ट में ASI सर्वे की मांग लंबित।
  • वर्तमान स्थिति: मामले लंबित, लेकिन अयोध्या मिसाल से कानूनी राह आसान हुई।

Places of Worship Act 1991: 15 अगस्त 1947 की स्थिति फ्रीज। आलोचक कहते हैं कि ASI सर्वे और ऐतिहासिक प्रमाण इस कानून की सीमाएं चुनौती देते हैं।

इतिहास का न्याय

धार भोजशाला का फैसला भारत के सभ्यतागत इतिहास को पुनर्परिभाषित करने की दिशा में एक कदम है। राजा भोज जैसे शासकों की विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जो केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक पुनरुत्थान का प्रतीक है। भोजशाला अब सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक बन गई है। लाखों हिंदू भक्तों के लिए वाग्देवी की पूजा का मार्ग खुला है, लेकिन सद्भाव बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है।

MP धार भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला—बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा भी, शुक्रवार को नमाज भी; जानिए समय
MP धार भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला—बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा भी, शुक्रवार को नमाज भी; जानिए समय
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+