IPCC Highlights: जानिए कैसे ऊंची इमारतें बढ़ा रही हैं आपके शहर का तापमान
जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) के वर्किंग ग्रुप-1 की रिपोर्ट सोमवार को रिलीज़ हुई, जिसमें साफ कहा गया है कि संपूर्ण मानवजाति पृथ्वी को विनाश की ओर धकेल रही है। इसी रिपोर्ट में शहरों को लेकर एक अलग अध्ययन प्रकाशित किया गया, जिसमें बताया गया है कि किस तरह से ऊंची-ऊंची इमारतें शहरों का तापमान बढ़ा रही हैं। वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि शहरों ता तापमान उसके आस-पास मौजूद ग्रामीण व वन क्षेत्रों की तुलना में अधिक होने की वजह से वहां के मौसम पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है।

शहरों के तापमान बढ़ने के पीछे बड़े कारण
• आईपीसीसी से जुड़े पर्यावरण वैज्ञानिकों की मानों तो शहरों में मौजूद ऊंची-ऊंची कॉन्क्रीट की इमारतें जो एक दूसरे के करीब मौजूद हैं, ऊष्म (गर्माहट) को अवशोषित कर लेती हैं और हवा के प्राकृतिक बहाव में बाधा उत्पन्न करती हैं। इसका बड़ा प्रभाव शहरों के मौसम पर पड़ता है।
• शहरों की ऊंची-ऊंची इमारतों में कूलिंग सिस्टम, एयरकंडीशन और बिजली के अन्य उपकरणों की वजह से भी ऊष्म उत्पन्न होती है, जिससे तापमान बढ़ता है।
• इमारतें बनाने में प्रयोग होने वाली सीमेंट, कॉन्क्रीट, सरिया, आदि वस्तुएं ऊष्म को लंबे समय तक अवशोषित करती हैं और रात के समय उसी ऊष्म को उत्सर्जित करती हैं। यही कारण है कि घनी आबादी वाले शहरों में रात का तापमान औसत से अधिक रहता है।
• शहरों में जलाशयों की कमी भी तापमान के बढ़ने का एक बड़ा कारण है।
• शहरीकरण के कारण जल चक्र यानि वॉटर साइकिल भी प्रभावित होती है, जिस वजह से शहरी इलाकों में बारिश पहले की तुलना में कम होने लगी है। शहरों में हवा की गति धीमी पड़ने और तापमान अधिक होने की वजह से जो बारिश वहां होनी होती है, वह उसके आस-पास के वन क्षेत्रोंं में हो जाती है।
• शहरों की हवा में मौजूद एयरोसोल (छोटे-छोटे कण) में कई सारी गैसें व रासायनिक तत्व होते हैं, जो प्रदूषण का कारण बनते हैं। उनका प्रभाव न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि उस क्षेत्र के मौसम पर भी पड़ता है।

• वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि आने वाले वर्षों में शहरों को गर्म हवाओं के थपेड़ों का और अधिक सामना करना पड़ेगा।
• कार्बन डाइऑक्साइड व अन्य ग्रीनहाउस गैस जैसे मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड को वातावरण में घोलने का काम सबसे ज्यादा शहर ही करते हैं। आईपीसीसी की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की मात्रा बीते 20 लाख साल में सबसे अधिक रही है। वहीं मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा बीते 8 लाख वर्षों में सबसे अधिक 2019 में रही। हालांकि मीथेन का उत्सर्जन कृषि कार्यों में भी होता है।
तटीय शहरों के लिए क्या कहा वैज्ञानिकों ने
• तटीय इलाकों में स्थित शहरों में तापमान बढ़ने के साथ-साथ समुद्र जलस्तर भी बढ़ रहा है। इस वजह से उन पर खतरा निरंतर बढ़ता जा रहा है।
• समुद्र के किनारे स्थित शहरों में भारी बारिश का सिलसिला आने वाले समय में बढ़ सकता है। यही नहीं समुद्र की ओर से उठने वाले चक्रवातों की तीव्रता अधिक होने की वजह से तटीय शहर खतरे के पैमाने पर हैं।
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