फटा कुर्ता पहन कार्यक्रम में पहुंचे थे Karpoori Thakur, चंदे से जुटाए गए थे धन, जानिए उनकी सादगी के अमर किस्से
Karpoori Thakur: बिहार के लिए इस वक्त गौरव की बात है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से नवाजा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती पर भारत रत्न के लिए उनके नामों की घोषणा कर सच्ची श्रद्धांजलि दी है।
लेकिन बहुत कम ही लोग उनकी सादगी और ईमानदारी के बारे में जानते हैं। आपको उनसे जुड़े कई किस्से बता रहे हैं। जिसे जानकर आपको आश्चर्य होगा कि क्या यह संभव है? लेकिन यह सच है कि कर्पूरी ठाकुर जैसा जननायक अब मुश्किल ही होंगे।

ना घर था और ना ही गाड़ी
आप जानकर चौंक सकते हैं कि वे दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उनके पास ना तो एक घर था और ना ही गाड़ी। जब उनका निधन हुआ तो परिवार को देने के लिए एक मकान तक उनके नाम नहीं था। ना ही उन्होंने अपने पैतृक गांव में एक इंच जमीन खरीद पाए।
#WATCH | Patna: Granddaughter of former Bihar Chief Minister and social justice icon Karpoori Thakur, Dr Jagriti says, "I feel very proud...I did not see him but have heard his stories from my parents..." pic.twitter.com/lU0K5YJISL
— ANI (@ANI) January 24, 2024
कुर्ता के लिए चंदा इकट्ठा किया गया
एक बार तो वे एक कार्यक्रम में फटा हुआ कुर्ता पहन कर चले गए। तब पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने उनके लिए कुर्ता खरीदने के लिए वहीं चंदा करके धन इकट्ठा किया था। उन्होंने खुश होकर कहा था कि यदि अधिक धनराशि होगी, तो मैं इसे पार्टी को दान कर दूंगा। प्रतिनिधिमंडल में ऑस्ट्रिया जाने के लिए उनके पास अपना कोट भी नहीं था।
#WATCH | Patna: Grandson of former Bihar Chief Minister and social justice icon Karpoori Thakur, Dr Abhinav Vikas says, "I feel very good...I would like to thank PM Modi and Union Home Minister Amit Shah..." pic.twitter.com/Ofj4fTJdDI
— ANI (@ANI) January 24, 2024
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मुख्यमंत्री रहते कई लोगों के दाढ़ी बना देते थे
कर्पूरी ठाकुर ने मुख्यमंत्री रहते हुए कभी निजी कार्यक्रमों के लिए सरकारी वाहनों का उपयोग नहीं किया। रांची में एक शादी समारोह में जाना था तो टैक्सी से गए। कर्पूरी ठाकुर की सादगी और ईमानदारी की मिसाल इसी से समझ सकते हैं कि वे मुख्यमंत्री रहते हुए भी कई लोगों के दाढ़ी बना दिया करते थे।
सादगी और ईमानदारी के किस्से अमर हैं
उनकी ईमानदारी ऐसी थी कि वे कभी अपने सगे-संबंधियों की सिफारिश नहीं की। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान बहनोई के लिए भी नौकरी के लिए सिफारिश नहीं की। जब तक वे राजनीति में रहे तब तक उन्होंने अपने बेटे रामनाथ को भी राजनीति में नहीं आने दिया। उनकी सादगी और ईमानदारी के किस्से अमर हैं।
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