Lucknow Coaching Fire: 15 छात्रों की मौत के जिम्मेदार 16 आरोपी कौन? अफसरों का घालमेल! CM बोले- कोई नहीं बचेगा
Lucknow Coaching Fire Tragedy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार (22 जून 2026) दोपहर एक तीन मंजिला इमारत ने आग का भयानक रूप ले लिया। अलीगंज के पुरनिया/सेक्टर डी इलाके में नीचे पेट शॉप और क्लिनिक, ऊपर दूसरी मंजिल पर लर्निंग स्पेस कोचिंग-लाइब्रेरी और Head Hopper Studio (3D आर्ट प्रोडक्शन एवं गेम एसेट आउटसोर्सिंग) चल रहे था। दोपहर करीब 3 बजे ग्राउंड फ्लोर की Drools Aliganj Pet Shop या आसपास शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई आग तेजी से ऊपर फैली। धुएं ने पूरी मंजिल को घेर लिया। इमरजेंसी एग्जिट न होने और सिंगल एंट्री-एग्जिट के कारण छात्र बाहर नहीं निकल पाए।
इस हादसे में 15 युवा छात्रों और प्रोफेशनल्स की मौत हो गई। अधिकांश मौतें दम घुटने से हुईं। यह लखनऊ का अब तक का सबसे बड़ा अग्निकांड बन गया है। लेकिन यह महज हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही, अवैध निर्माण और अफसर-बिल्डर मिलीभगत का नतीजा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि जिम्मेदार किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आइए विस्तार से जानें कहां-कहां चूक और खामियां? किसकी गलती?

CM योगी का सख्त रुख और मुआवजे की घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) घटनास्थल और KGMU ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और घायलों का हाल जाना। योगी ने घोषणा की कि
- प्रत्येक मृतक परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता।
- प्रत्येक घायल को 50 हजार रुपये।
- PM मोदी ने PMNRF से अतिरिक्त 2 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की।
योगी ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए और कहा कि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी दिल्ली से लखनऊ पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पहले ही मौके पर पहुंचकर भावुक हो गए थे।
अब बात करते हैं किसने इन छात्रों को आग में झोंका?
16 आरोपी कौन? रामेश्वरम ग्रुप और अफसरों का तगड़ा कनेक्शन
जांच एजेंसियों ने 16 लोगों की प्रारंभिक लिस्ट तैयार कर ली है। इनमें बिल्डर और तत्कालीन अधिकारी-इंजीनियर दोनों शामिल हैं।
मुख्य आरोपी (बिल्डर):
- वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (Virendra Prasad Shukla-रामेश्वरम ग्रुप के मालिक, RITM कॉलेज संचालक, सीतापुर रोड, गोविंदपुरम)।
- सुरेंद्र प्रताप शुक्ला (Surendra Pratap Shukla)।
- धीरेंद्र प्रताप शुक्ला (Dhirendra Pratap Shukla)।
इमारत वीरेंद्र शुक्ला की जमीन पर बनी। नक्शा उनके और परिवार के सदस्यों के नाम से आवासीय पास हुआ था। लेकिन 2014 में बिना अनुमति कमर्शियल उपयोग शुरू कर दिया गया। यहां पेट शॉप, क्लिनिक, कोचिंग और 3D स्टूडियो चल रहे थे। नगर निगम 2022 से कमर्शियल टैक्स वसूल रहा था, यानी अवैध बदलाव की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
अफसरों पर आरोप क्या-क्या?
- नक्शा पास करने वाले तत्कालीन इंजीनियर और अधिकारी।
- फायर NOC और बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट न देने/न लेने वाले।
- विद्युत विभाग के अधिकारी (20 kW लोड पास था, 35.50 kW उपयोग हो रहा था)।
- LDA (लखनऊ विकास प्राधिकरण) और नगर निगम के इंस्पेक्शन अधिकारी।
- अन्य विभागों के कर्मचारी, जिन्होंने सालों तक अनदेखी की।
कुल 16 आरोपी। इनमें से कई तत्कालीन अफसर शामिल हैं। शुरुआती जांच में साफ हुआ कि इमारत पर फायर NOC, बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट कुछ भी नहीं था। फिर भी व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं।

शुरुआती जांच के अनुसार आग AC शॉर्ट सर्किट से लगी, लेकिन असली वजह सेफ्टी नॉर्म्स की अनदेखी थी।
कोचिंग हब अलीगंज की पुरानी समस्या
अलीगंज लखनऊ का बड़ा कोचिंग केंद्र है। JEE, NEET, स्किल कोर्सेस और 3D-गेमिंग ट्रेनिंग यहां आम हैं। लेकिन ज्यादातर संस्थान सिंगल एंट्री-एग्जिट वाले पुराने भवनों में चल रहे हैं। व्यावसायिक भवनों में पेट शॉप, क्लिनिक और कोचिंग का मिश्रण आग फैलने का खतरा बढ़ाता है। फायर नॉर्म्स का पालन नहीं करना यहां आम बात बन गई थी।
अग्निशमन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि NOC के लिए हजारों आवेदन आते हैं, लेकिन कई खारिज हो जाते हैं क्योंकि मानक पूरे नहीं होते। फिर भी कुछ संस्थान बिना NOC के चल रहे थे।
बड़े सवाल और जवाबदेही
- आवासीय बिल्डिंग को कमर्शियल कैसे बनाया गया?
- फायर NOC और सेफ्टी सर्टिफिकेट के बिना गतिविधियां कैसे चल रही थीं?
- फरवरी 2025 के नोटिस के बाद भी क्यों अनदेखी?
- बिजली विभाग, LDA, नगर निगम और फायर विभाग की भूमिका क्या थी?
यह हादसा दिल्ली के राजेंद्र नगर और अन्य कोचिंग हादसों की याद दिलाता है। योगी सरकार अब पूरे राज्य में कोचिंग संस्थानों, कमर्शियल भवनों का विशेष फायर ऑडिट कराने जा रही है।
युवाओं की जान की कीमत चुकानी होगी
15 युवा सपने आग में जल गए। सुखमणि, शहजान, अनामिका... हर नाम एक परिवार की उम्मीद था। यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
CM योगी का सख्त संदेश सही दिशा में है। अब जरूरत है तेज, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की। बिल्डर हो या अफसर, जो भी जिम्मेदार है उसे सजा मिलनी चाहिए। कोचिंग संस्थान ज्ञान के केंद्र हैं, मौत के अड्डे नहीं बन सकते।
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