Who Is Mahrang Baloch: कौन हैं महरंग बलोच? बलूचों की 'शेरनी' को पाकिस्तान ने क्यों सुनाई उम्रकैद की सजा?

Mahrang Baloch Life Imprisonment: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूच लोगों के अधिकारों की आवाज मानी जाने वालीं महरंग बलोच को पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह सजा वर्ष 2024 में ग्वादर में हुए एक आंदोलन के दौरान एक सुरक्षा अधिकारी की कथित हत्या से जुड़े मामले में दी गई है।

महरंग बलोच लंबे समय से बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन, जबरन गुमशुदगी और सरकारी कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं।

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उनकी पहचान सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उन्हें बलूच समुदाय की मजबूत आवाज माना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर महरंग बलोच कौन हैं, जिन्होंने पाकिस्तान की सत्ता के लिए इतनी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी?

Who Is Mahrang Baloch: कौन हैं महरंग बलोच? पिता की मौत और भाई की गुमशुदगी ने बदल दी जिंदगी

33 वर्षीय महरंग बलोच पेशे से एक डॉक्टर हैं, लेकिन बलूचिस्तान में उन्हें 'बलूच की शेरनी' कहा जाता है। उन्होंने बलूच लोगों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया और कभी शादी न करने का फैसला किया। उनके संघर्ष के पीछे उनके परिवार की एक दर्दनाक दास्तान भी है।

साल 2009 में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने महरंग के पिता अब्दुल गफ्फार लांगो (एक मजदूर नेता) को जबरन अगवा कर लिया था। दो साल तक भयानक टॉर्चर देने के बाद 2011 में उनकी लाश एक निर्जन स्थान पर फेंक दी गई थी। साल 2017 में पाकिस्तानी सेना ने महरंग के भाई को भी अगवा कर लिया, जो महीनों तक लापता रहा। इन हादसों ने महरंग को एक निडर एक्टिविस्ट बना दिया।

बलूच लोगों की आवाज बनी महरंग को दुनिया भर में मिली पहचान

महरंग बलोच का नाम केवल बलूचिस्तान तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने दिसंबर 2023 में लापता बलूच लोगों के मुद्दे को लेकर तुर्बत से इस्लामाबाद तक लगभग 1600 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का नेतृत्व किया था। इस अभियान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित किया। उनके काम को देखते हुए उन्हें BBC की 100 Women सूची में शामिल किया गया। इसके अलावा TIME100 Next 2024 की सूची में भी उन्हें जगह मिली। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्हें मानवाधिकारों की मजबूत आवाज माना गया।

क्या था मामला, जिसमें महरंग बलोच को मिली उम्रकैद की सजा?

क्वेटा एटीसी के जज मुहम्मद अली मोबिन ने सोमवार, 22 जून को यह फैसला सुनाया। महरंग बलोच पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने जुलाई 2024 में ग्वादर में एक बहुत बड़े आंदोलन 'बलोच रजी माची' (Baloch Raji Muchi) का नेतृत्व किया था। जुलाई 2024 में बलूच यकजहती कमेटी (BYC) के बैनर तले ग्वादर में एक शांतिपूर्ण धरना शुरू हुआ था, जिसमें बलूचिस्तान के अलावा ईरान और अफगानिस्तान के बलूच समुदाय के लोग भी शामिल हुए थे।

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जब यह धरना एक जन-आंदोलन बनने लगा, तो पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने इसे बेरहमी से कुचलने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों की बर्बरता के कारण बलूच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें पुलिस की गोलीबारी से कई बलूच नागरिक मारे गए।

इसी हिंसा के दौरान कथित तौर पर एक सुरक्षा अधिकारी (पुलिसकर्मी) की भी मौत हो गई थी। पाकिस्तान सरकार ने इस मौत का सीधा जिम्मेदार महरंग बलोच और उनके संगठन को ठहराते हुए आतंकवाद का मुकदमा दर्ज कर दिया।

पहले से तय था फैसला, जेलें हमारा रास्ता नहीं रोक सकतीं- BYC

अदालत का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब जेल में बंद महरंग बलोच, सिबग़तुल्लाह शाह और उनके वकीलों ने इस पूरी अदालती कार्यवाही का बहिष्कार कर रखा था। वे 12 जून से क्वेटा डिस्ट्रिक्ट जेल में इसके खिलाफ धरने पर बैठे थे।

फैसले के बाद बलूच यकजहती कमेटी ने इसे बलूच राष्ट्र के खिलाफ अन्याय बताया। संगठन ने कहा कि जेल और सजा से आंदोलन को नहीं रोका जा सकता। बलूच कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच ने इसे न्यायिक आतंकवाद बताते हुए कहा कि न्याय देने के बजाय राज्य संस्थाओं ने दमन का रास्ता चुना है।

महरंग बलोच को सजा मिलने के बाद पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर फिर सवाल उठने लगे हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बलूचिस्तान में लंबे समय से जबरन गुमशुदगी और राजनीतिक दमन के आरोप लगते रहे हैं। अब महरंग बलोच को उम्रकैद मिलने के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि क्या यह फैसला कानून के आधार पर लिया गया है या फिर बलूच आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश है।

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