हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं तांत्रिक करते हैं इलाज, वायरल Video ने खोली बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल
Bihar Supaul Snakebite treatment: बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल की शर्मनाक हकीकत ने एक बार फिर सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस अस्पताल में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी के कारण मरीजों को तांत्रिकों के भरोसे छोड़ना पड़ रहा है।
जब सर्पदंश जैसी गंभीर स्थिति में भी चिकित्सा सेवाएं नदारद हों, तो सवाल उठता है कि बिहार सरकार की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा कहां फिसल रही है। यह घटना सिर्फ अस्पताल की लापरवाही ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बेबसी और जनता के प्रति उपेक्षा को दिखाती है।

क्या है पूरा मामला?
firstbihar.com के मुताबिक बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में डॉक्टर की गैरमौजूदगी के कारण एक सर्पदंश पीड़िता का इलाज महिला तांत्रिक ने किया। 18 वर्षीय आरती कुमारी को सांप ने काटा था और परिजन उसे अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। मजबूरी में परिजनों ने तांत्रिक रजनी देवी को बुलाया, जिसने अस्पताल में झाड़फूंक कर इलाज किया। ड्यूटी पर रहने वाले डॉक्टर संजीव कुमार सुमन उस समय अनुपस्थित थे और कोई अन्य चिकित्सक भी मौजूद नहीं था। यह घटना बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही और प्रशासन की बेबसी को उजागर करती है।
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वीडियो ने खोली बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल
झाड़फूंक का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अस्पताल में डॉक्टर की जगह एक महिला तांत्रिक को सर्पदंश से पीड़ित की देखभाल करते देखा जा सकता है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में परिजन मजबूर होकर अपने रिश्तेदार तांत्रिक रजनी देवी को लेकर आए, जिन्होंने अस्पताल के इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर (ओटी) में लगभग 15 से 20 मिनट तक झाड़फूंक की। सरकारी अस्पताल में ऐसी तंत्र-मंत्र की प्रथाओं का खुलकर इस्तेमाल बिहार की स्वास्थ्य सेवा की बदतर स्थिति को बयां करता है और प्रशासन की भारी लापरवाही को उजागर करता है।
करोड़ों रुपये से बना अस्पताल, फिर भी मरीजों को नहीं मिल रही सही इलाज की सुविधा
लगभग 14 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से बना यह अस्पताल भवन जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए था, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। डॉक्टरों की लगातार गैरमौजूदगी और अस्पताल परिसर में खुलेआम झाड़फूंक जैसी प्रथाओं का होना सरकार के स्वास्थ्य सेवा के दावों की सच्चाई खोलकर रख देता है। इससे पहले भी यहां कई बार ऐसी लापरवाही की घटनाएं सामने आई हैं, मगर प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सवाल यही उठता है कि जब करोड़ों रुपए खर्च कर स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा तैयार किया गया है, तो मरीजों को इसका फायदा क्यों नहीं मिल रहा?
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