Bihar SIR पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में EC की दलील, 'इतनी बड़ी प्रक्रिया में कुछ गलतियां रह सकती हैं'
Bihar SIR Supreme Court: बिहार में एसआईआर (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट संशोधन की प्रक्रिया में कई त्रुटियां हैं। आपने (सर्वोच्च न्यायालय) कहा था कि अगर गंभीर गड़बड़ी आती है, तो उसका संज्ञान लेंगे।
याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने दावा किया कि एक छोटे से निर्वाचन क्षेत्र में 12 जीवित लोगों को मृत दिखाया गया है। चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने जवाब में कहा कि यह ड्राफ्ट रोल है। इतनी बड़ी प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ी रह सकती है।

चुनाव आयोग ने किया स्वीकार, 'गलतियां रह सकती हैं'
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने अपनी दलील में कहा कि अभी सिर्फ ड्राफ्ट जारी किया गया है। मतदाताओं के पास यह छूट है कि वह अपनी आपत्ति जाकर दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट रोल में कुछ त्रुटियां होना स्वाभाविक है और उनमें सुधार किया जा सकता है। उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में कुछ न कुछ गलतियां छूट सकती हैं।
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Bihar SIR के दौरान BLO मनमानी कर रहे संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी हो रही
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए कहा कि SIR के दौरान संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी हो रही है। BLO और अन्य अधिकारियों ने मनमाने ढंग से काम किया है। सिब्बल ने यह भी कहा कि नए वोटर का नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 में जन्मतिथि दस्तावेज के रूप में आधार कार्ड को दूसरे नंबर पर रखा गया है। दूसरी ओर चुनाव आयोग आधार कार्ड को दस्तावेज के तौर पर नहीं मान रही है। वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने जब कहा कि छोटे से निर्वाचन क्षेत्र में 12 जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित कर दिया गया। इसके जवाब में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित किया गया है, तो उन्हें कोर्ट में लाएं।
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Supreme Court ने याचिकाकर्ताओं की आपत्ति पर पूछे सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी कुछ सख्त सवाल कपिल सिब्बल और याचिकाकर्ताओं के वकीलों की ओर से उठाए। कोर्ट ने कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या आप SIR के अस्तित्व पर ही सवाल उठा रहे हैं? या आपकी आपत्ति सिर्फ एसआईआर के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर है?
सिब्बल ने कहा कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में नियमों के अनुसार सूची दोबारा तैयार होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मसौदा जारी करने से पहले न तो फॉर्म 4 घर-घर भेजा गया, न दस्तावेज लिए गए। इसमें नियम 10 और 12 का उल्लंघन हुआ है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम स्पष्ट कहता है कि अगर मतदाता सूची से किसी का नाम हटाया जाता है, तो आप नागरिक नहीं हैं यह साबित करने की जिम्मेदारी आपत्ति दर्ज कराने वाले पर होती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपकी बात से हम सहमत हैं। अगर आपका नाम गलत तरीके से हटा दिया गया है, तो यह साबित करने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है कि आप नागरिक नहीं हैं।
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SIR पर सुनवाई में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने पर दोनों पक्षों ने दी दलील
पिछली सुनवाई में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा था कि अगर बड़े पैमाने पर मतदाताओं को हटाया गया, तो कोर्ट कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) ने चुनाव आयोग से 65 लाख हटाए गए मतदाताओं की लिस्ट और हटाने का कारण सार्वजनिक करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि 65 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं।
65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने पर चुनाव आयोग ने कहा कि 22 लाख मृत मतदाता हैं, 7 लाख दो जगह पंजीकृत, 35 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित या लापता और 1.2 लाख के नामांकन फॉर्म अभी लंबित हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि जनवरी 2023 में एक रिवीजन हो चुका है, तो अब SIR की जरूरत क्यों है? कपिल सिब्बल ने इस पर कहा कि हमारा भी यही तर्क है। सिब्बल ने यह भी कहा कि बूथ लेवल अधिकारी के लिए इतने कम समय में 3 लाख आपत्तियां सुनना संभव नहीं है।












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