Bihar Chunav: वीआईपी चीफ मुकेश सहनी ने कही दिल की बात, 'डिप्टी सीएम पद के लिए ब्लैकमेल के दावे झूठे'
Bihar Chunav Mukesh Sahni: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए प्रचार का दौर जारी है। धुआंधार प्रचार के साथ राजनेता जमकर इंटरव्यू भी दे रहे हैं। बिहार तक को दिए इंटरव्यू में वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने सीट शेयरिंग और महागठबंधन में चल रही खींचतान पर भी जवाब दिया है। इंडिया टुडे समूह के साथ बातचीत में उन्होंने कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए राजी होने की भी वजह बताई है। सहनी पहले 60 सीटें मांग रहे थे, जबकि उन्हें सिर्फ 15 सीटें ही मिली हैं।
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि डिप्टी सीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने के लिए उन्होंने दबाव बनाया था। यही वजह है कि आखिरी में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को समझौते के लिए उतरना पड़ा। उन्होंने इन सारे दावों पर कहा कि ब्लैकमेलिंग वाली बातें निराधार हैं।

Mukesh Sahni ने आरोपों पर दी सफाई
मीडिया में ऐसी खबरें हैं कि डिप्टी सीएम कैंडिडेट बनाने के बदले ही वह कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुए थे। इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'ऐसी बातें पूरी तरह से भ्रामक हैं। हमने गठबंधन धर्म निभाते हुए कम सीटों पर संतोष किया है। हमने शुरू में सोचा था कि वीआईपी 60 सीटों पर लड़ेगी और पार्टी का ही डिप्टी सीएम बनेगा। चुनाव में उतरते हैं, तो गठबंधन में सबको एडजस्ट करना पड़ता है। हम नए दल हैं, इसलिए सहयोगी पार्टियों को सीटें छोड़ने में मुश्किल हुई। गठबंधन धर्म निभाते हुए हमने 15 सीटों पर सहमति दी।'
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ब्लैकमेल करने के दावों पर भी दिया जवाब
मुकेश सहनी ने चुनाव नहीं लड़ने पर कहा कि कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिला, इसलिए खुद चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। सहनी ने यह भी कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला अपने कार्यकर्ताओं के सम्मान में लिया है। ब्लैकमेल करने के दावों पर उन्होंने कहा, 'अगर हमें ब्लैकमेल करना होता, तो हम सीटें बढ़ा लेते। उपमुख्यमंत्री तो जनता बनाती है, कोई सौदेबाजी नहीं होती। ऐसी खबरें सिर्फ अफवाह हैं।'
Bihar Chunav में सीट शेयरिंग पर जमकर बवाल हुआ
महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर काफी बवाल हुआ और दिल्ली से लेकर पटना तक कई राउंड बैठकें हुईं। हालांकि, नामांकन वापस लेने वाले दिन तक 11 सीटें ऐसी थीं जहां सहमति नहीं बन सकी। तेजस्वी यादव ने निर्दलीय मैदान में उतरने वाले कई आरजेडी नेताओं को पार्टी से निकाला भी है। इसके बावजूद जमीन पर कई ऐसी सीटें हैं जहां वोट कटने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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