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क्‍यों हद से गुज़र जाते हैं सिरफिरे आशिक?

वैलेंटाइंस डे के ठीक पहले 11 फरवरी को लखनऊ की आशियाना कालोनी में आशीष नाम के युवक ने एक-तरफा प्‍यार में साक्षी की गोली मारकर हत्‍या कर दी। उसके बाद 11 अप्रैल को लखनऊ के ही गुडंबा क्षेत्र में अभय नाम के युवक ने नीतू को गोली से उड़ा दिया और अब रांची के सेंट ज़ेवियर्स में विजेंद्र ने बुधवार की शाम कुसुम की गला काटकर हत्‍या कर दी

ये तीनों वारदातें दिल दहला देने वाली थीं। तीनों वारदातों में प्‍यार में हारे लड़कों ने उन लड़कियों को मौत के घाट उतार दिया, जिन्‍हें वे दिल और जान से चाहते थे। लेकिन क्‍या आपको पता है आशीष, अभय और रविंद्र की जैसी मानसिकता रखने वाले हजारों युवक हर शहर में, हर कस्‍बे में और हर गांव में हैं। बस फर्क यह है कि ये तीनों हद से ज्‍यादा गुज़र गये।

सेंट ज़ेवियर्स की इस घटना ने प्‍यार करने वालों पर तमाम सवाल उठा दिये हैं। जब यह वारदात कॉलेज में हुई, तब प्रत्‍यक्षदर्शी छात्र-छात्राओं का दिल किस प्रकार सिहर उठा होगा। इस वारदात को देखने वाली तमाम वो लड़कियां जिनके पीछे लड़के पड़े रहते हैं, कितनी डर गई होंगी। अब अगर कोई लड़का उन्‍हें प्रपोज़ करेगा, तो ना करने से पहले वो हजार बार सोचेंगी...

खैर ये तो रही घटनाओं की बात, लेकिन क्‍या आपने सोचा है, कि इस प्रकार की वारदातों के बढ़ती वारदातों के पीछे क्‍या कारण हैं? आखिर कौन सी मानसिकता होती है, जो अपने ही प्‍यार की हत्‍या करने पर मजबूर कर देती है? हमने इस पर बात की लखनऊ के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्‍वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक डा. कृष्‍ण दत्‍त से।

डा. दत्‍त का कहना है कि ऐसा वही लोग करते हैं, जिनके अंदर धीरज की कमी होती है। ये वो लोग होते हैं, जिनका छोटे से छोटा काम नहीं बनने पर उबल पड़ते हैं। इस प्राकर की मानसिकता का विकास टीवी और फिल्‍मों से होता है। वर्तमान में बन रहीं फिल्‍में और धारावाहिक उनके लिए प्रेरक का काम करते हैं। अभय, आशीष और रविंद्र जैसे लोगों के अंदर सहनशक्ति काफी कम होती है। ऐसे लोग आत्‍महत्‍या के प्रयास भी आसानी से कर सकते हैं।

ऐसी मानसिकता का विकास कब और कैसे होता है? इस पर डा. दत्‍त ने कहा कि सही मायने में इसके जिम्‍मेदार माता-पिता/अभिभावक होते हैं। जो मां-बाप अपने बच्‍चों की छोटी से छोटी तकलीफ बर्दाश्‍त नहीं कर पाते हैं, यानी वे अपने बच्‍चों को जरा भी तकलीफ नहीं होने देते। उनकी हर मांग पूरी करते रहते हैं। वही बच्‍चा जब बड़ा होता है, और उसकी इच्‍छा पूरी नहीं होती, तो वो चिड़चिड़ा होने लगता है।

धीरे-धीरे यह मानसिकता दिमाग में प्रबल हो जाती है और युवावस्‍था में आने के बाद इस प्रकार के लोग मनचाही चीज़ पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं... किसी की हत्‍या भी।

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