ये कैसा प्‍यार- लड़की की हत्‍या कर, खुद को गोली मारी

Murder of Love
लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की राजधानी में शुक्रवार को प्‍यार में नाकाम रहे एक युवक ने अपने ही हाथों से उस लड़की की गोली मारकर हत्‍या कर दी, जिसे वो जी जान से चाहता था। यही नहीं उसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली। आशियाना कालोनी के इस कांड से पुलिस समेत सभी को चेत जाना चाहिए। खास तौर से 14 फरवरी यानी वैलेंटाइन डे तक।

पाश्‍चात्‍य सभ्‍यता के अंतर्गत इस समय वैलेंटाइंस स्‍प्‍ताह मनाया जा रहा है। स्‍कूल, कॉलेज, रेस्‍त्रां, पार्क, रिसॉर्ट यहां तक घरों में भी वैलेंटाइंस डे चर्चा में है। जाहिर है इस दौरान युवाओं के दिल में अपने प्‍यार के लिए कई प्रकार की फीलिंग्‍स भी पनप रही होंगी। जाहिर है आशीष के मन में भी ऐसी ही फीलिंग उठी हो कि इस साल वैलेंटाइन डे वो साक्षी के साथ मनाए।

प्रत्‍यक्षदर्शियों की मानें तो आशीष ने साक्षी को सुबह स्‍कूल जाते वक्‍त रास्‍ते में रोका और अपने प्‍यार का इज़हार किया। इस दौरान उसने अपनी बाइक पर उसे बैठने को भी कहा, लेकिन साक्षी ने उसकी बात नहीं मानी। चारों तरफ वैलेंटाइन डे की चकाचौंध में पूरी तरह एकतरफा प्‍यार के रस में डूब चुका आशीष प्‍यार में नाकामी बर्दाश्‍त नहीं कर सका। और उसने रिवॉल्‍वर निकाली और साक्षी की हत्‍या कर दी। बाद में घर पहुंच कर खुद को भी गोली मार ली। आशीष अस्‍पताल में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

इस कांड पर दिल्‍ली के मनोवैज्ञानिक डा. देबाशीष रॉय का कहना है कि जब कुल मिलाकर देखा जाए तो आशीष आज सुबह यह सोचकर निकला था कि अगर साक्षी उसकी नहीं हुई, तो वो उसे मार देगा। यही कारण है कि वो अपने साथ रिवॉल्‍वर लेकर गया था। हत्‍या के बाद घर जाकर खुद को गोली मारने से यह भी साफ है क‍ि उसने साक्षी को दुश्‍मनी की बिला पर नहीं मारा, बल्कि वो नहीं चाहता था कि वो किसी और की हो। यही कारण है कि उसने खुद को भी गोली मार ली।

इस कांड पर वैलेंटाइन वीक के प्रभाव पर पूछे जाने पर डा. रॉय ने कहा कि वैलेंटाइन डे, रोस डे, फ्रेंडशिप डे ने हमारे देश के युवाओं पर गहरी छाप छोड़ी है।

अधिकांश युवा इसे दोस्‍ती से ज्‍यादा प्रेम प्रसंग के परिप्रेक्ष्‍य में देखते हैं। ऐसे में हो दोस्‍तों के बीच गर्लफ्रेंड, ब्‍वॉयफ्रेंड, प्‍यार मोहब्‍बत आदि की बातें ज्‍यादा होती हैं। हो सकता है उसी प्रभाव के नतीजतन आशीष प्‍यार की हद तक चला गया हो।

खैर डा. रॉय की राय सिर्फ युवाओं की मानसिकता के आधार को दर्शाती है, लेकिन यदि ऐसा है, तो पुलिस ही नहीं बल्कि हर उन माता-पिता व अभिभावकों को चेत जाना चाहिए, जिनके बच्‍चे युवावस्‍था से गुजर रहे हैं। कम से कम इस सप्‍ताह जरूर चौकस रहना होगा, क्‍योंकि जब-जब प्‍यार का प्रतीक लाल रंग खून में तब्‍दील होता है, तब-तब परिवारों में, दोस्‍तों के बीच और पूरे समाज में मातम की लहर दौड़ जाती है।

इस पर आपकी क्‍या राय है। अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखें।

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