एच1एन1 वायरस से मौत का सुराग मिला

Swine Flu
टोरंटो। एक अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन से पता चला है कि एच1एन1 वायरस से संक्रमित (स्वाइन फ्लू) मरीजों में एक प्रकार का अणु पता जाता है। मरीज में इन अणुओं की संख्या ही बीमारी की गंभीरता या मौत का कारण बनती है।

एच1एन1 वायरस से संक्रमित कुछ लोगों में गंभीर निमोनिया विकसित होने की वजह का पहला सुराग मिला है। कनाडा और स्पेन के वैज्ञानिकों ने इस वायरस से संक्रमित मरीजों में 'इंटरल्युकिन' (आईएल-17) की उपस्थिति देखी है। इस साल जुलाई और अगस्त महीने में स्पेन के 10 अस्पतालों में यह अध्ययन किया गया।

स्पेन के 'हॉस्पिटल क्लिनिको यूनीवर्सिटेरियो डी वैलाडोलिड', टोरंटो के 'यूनीवर्सिटी हेल्थ नेटवर्क' और 'यूनीवर्सिटी ऑफ टोरंटो' के शोधकर्ताओं ने अस्पताल में भर्ती 20 मरीजों, 15 अन्य मरीजों और 15 अन्य लोगों में आईएल-17 की विभिन्न संख्या में उपस्थिति का विश्लेषण किया।

वैज्ञानिकों ने एच1एन1 से गंभीर रूप से संक्रमित लोगों के रक्त में आईएल-17 अणु की अधिक उपस्थिति देखी और जिन मरीजों में यह रोग खतरनाक नहीं था या शुरुआती अवस्था में था, उनमें इस अणु की उपस्थिति कम थी।

'यूनीवर्सिटी ऑफ टोरंटो' के एक वक्तव्य में कहा गया है कि शरीर आईएल-17 का निर्माण करता है, जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने वाली श्वेत रक्त कोशिकाओं के सामान्य नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है। पर कुछ स्थितियों में ये अणु अनियंत्रित होकर स्वाइन फ्लू जैसी सूजन और स्व-प्रतिरक्षित बीमारियों की वजह बन जाते हैं। 'क्रिटिकल केयर' पत्रिका के दिसम्बर के अंक में इस अध्ययन के परिणाम प्रकाशित किए गए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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