Fact Check: डिजिटल इंडिया के तहत मोबाइल Wi-fi नेटवर्क टावर लगा रही सरकार, जानिए वायरल लेटर का सच?
नई दिल्ली, 30 जुलाई: सोशल मीडिया के इस दौर में सूचनाओं के साथ-साथ अफवाहों की भी भरमार है। लोग भी ऐसी फेक न्यूज के चक्कर में आकर फंस जाते हैं। अब ऐसी ही एक खबर इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि डिजिटल इंडिया के तहत केंद्र सरकार वाई-फाई टावर लगवा रही है। आखिर क्या है इस वायरल पोस्टर की सच्चाई, जानिए हकीकत?

जानिए वायरल लेटर में क्या लिखा है?
सोशल मीडिया पर हाईटेक मोबाइल के नाम से एक एग्रीमेंट लेटर वायरल हो रहा है, जिसमें दावा करते हुए लिखा है कि "यह पत्र आपके (मोबाइल वाई-फाई) नेटवर्क डिजिटल इंडिया की तरफ से भेजा गया है। आपको सूचित किया जाता है कि आपके ग्राम सभा में आपके जगह को (वाई-फाई डिजिटल इंडिया) के तहत नेटवर्क द्वारा सर्वे टीम उस जगह की जांच पड़ताल करके (फ्रीक्वेंसी) चेककर लिया गया है, जगह आपके नाम पर पास है। ऐसा सुरक्षा कि दृष्टि एवं दूसरी कंपनियों के नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए किया गया है।"
लेटर में आगे बताया गया है कि आपको सूचित किया जाता है कि जिस जगह पर (वाई-फाई नेटवर्क) लगेगा उस जगह पर किराए के रूप में प्रतिमाह 25000/- रुपए जगह के एडवांस के रुपए में कम्पनी 30 लाख रुपए और 20 वर्षों का कोर्ट एग्रीमेंट व एक व्यक्ति को स्थाई कर्मचारी के रुप में नौकरी दी जाती है, जिन्हें प्रति महीने 25000 रुपए दिए जाएंगे। उनकी योग्यता 10वीं पास होना अनिवार्य है। किराया प्रतिवर्ष 10 फीसदी तक बढ़ाया जाएगा।"
जानिए पोस्ट की हकीकत
वायरल लेटर में टावर लगवाने के नाम पर नौकरी और किराया देने की बात कही जा रही है। वहीं योजना के नाम पर लोगों से पैसे मांगे जा रहे हैं। इस वायरल मैसेज पर पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्ववीट करते हुए इसकी असलियत लोगों को बताई है। पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्वीट करते हुए बताया कि "एक पत्र में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार डिजिटल इंडिया मोबाइल वाई-फाई नेटवर्क के तहत टॉवर लगा रही है, जिसके आवेदन शुल्क के रूप में ₹ 740 जमा करने होंगे।" यह दावा फर्जी है। यह पत्र भारत सरकार द्वारा जारी नहीं किया गया है। यह धोखाधड़ी का एक प्रयास है। इसी के साथ लोगों से ऐसी अफवाहों से बचने की भी अपील की है।

Fact Check
दावा
डिजिटल इंडिया वाईफाई मोबाइल टावर इंस्टालेशन के लिए एक लेटर वायरल हो रहा है, जिसमें नौकरी और किराया देने की बात कही गई है।
नतीजा
पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्वीट करते हुए बताया कि यह लेटर पूरी तरह से फेक है।












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