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Panchang: भारतीय पंचांग को क्यों कहते है पंचांग?

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लखनऊ। जब भी हमारे हिन्दू धर्म में कोई त्यौहार पड़ता है तो उसकी सही तिथि जानने के लिए हम पंडित जी सम्पर्क करते है और पंडित फटाक से पंचांग अथवा पत्रा देखकर सही तिथि आपको बता देते है। लेकिन क्या आप सभी ने यह जानने की कोशिश कि पंचांग को पंचांग क्यों कहा जाता है ?

चलिए हम आपको देते है पंचांग के बारें में विस्तृत जानकारी...

इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण ये पाॅच प्रमुख अंग होते है। इन्हीं पांच अंगों के कारण इसे पंचांग कहा भी जाता है। तिथि नक्षत्र आदि का साधन चन्द्रमा और सूर्य के योगांशो से किया जाता है। इसीलिए भारतीय पंचांगों को चान्द्र-सौर पंचांग भी कहा जाता है। अमान्त को आकाश में चन्द्र एवं सूर्य का क्रान्तिवृत्तीय आभासिक पूर्वापरान्तराभाव होता है। उसके पश्चात सामान्यतया अपनी अधिक गति के कारण चन्द्र, सूर्य से आगे जाता हुआ प्रतीत होता है।

चन्द्र एवं सूर्य के मध्य 12 अंश का अन्तर होता है

चन्द्र एवं सूर्य के मध्य 12 अंश का अन्तर होता है

जब चन्द्र एवं सूर्य के मध्य 12 अंश का अन्तर होता है तब एक तिथि की पूर्ति होती है। इसीलिए एक चन्द्रमास में {360 अंश भ्रमण करने में} 30 तिथियाॅ होती है। दिन का मान एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय पर्यन्त होता है। नक्षत्रमण्डल अथवा क्रान्तिवृत्त को आठ सौ कलाओं से विभक्त करने पर 27 समान भाग होते है। प्रत्येक भाग को नक्षत्र और उसे भोगने में चन्द्र को जितना समय लगता है, उसे नक्षत्र का मान कहते हैं। कुल 27 नक्षत्र होते है।

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योग नामक अंग का साधन

योग नामक अंग का साधन

सूर्य एवं चन्द्र के भोगांशो को जोड़ने से योग नामक अंग का साधन होता है। सूर्य एवं चन्द्र की गति का योग 800 कला होने में जितना समय लगता है, उसे योग कहते है। इन योगों की संख्या 27 होती है। ‘करण' नामक अंग तिथि का आधा माना जाता है। यह कह सकते है सूर्य एवं चन्द्र में 6 अंश का अन्तर जितने समय में पड़ता है, उसे करण कहते है। वस्तुतः करण का अलग से साधन नहीं किया जाता है। किन्तु तिथिकाल के आधे को करणकाल कहा जाता है। उपर्युक्त पांच अंगो के अतिरिक्त सम्प्रति पंचांग पत्रको में दैनिक व्यवहारोपयोगी दिनमान, ग्रहो के उदायस्त, ग्रहण विवरण, दैननन्दिन स्पष्ट ग्रह, दिनांक आदि सामग्रियाॅ भी दी जाती है।

भारतीय पंचांग पद्धित निरयण चान्द्र सौरात्मक हैं

भारतीय पंचांग पद्धित निरयण चान्द्र सौरात्मक हैं

भारतीय पंचांग पद्धित निरयण चान्द्र सौरात्मक हैं। वर्ष प्रमाण निरयण सौरवर्ष के अनुसार तथा मास चान्द्रमान के अनुसार दिये जाते हैं किन्तु सौर एवं चान्द्र वर्षो में प्रायः 11 दिन का अन्तर प्रत्येक वर्ष परिलक्षित होता है। इसीलिए लगभग प्रति तीसरे वर्ष { 32 मास 16 दिन 4 घटी पर} एक अधिमास प्रक्षेपण का अविष्कार हमारे मनीषियों ने किया है, जिसके कारण ऋतुओं एवं मासों में सामांजस्य बना रहता हैं। इस प्रकार भारतीय पंचांग पद्धित में सौर चान्द्रमासों का सन्तुलन स्वमेव होता है।

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English summary
Literally it means Five Limbs (parts). It is an astrological diary that gives useful astrological information required by an astrologer.
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