मध्य प्रदेश के अस्पतालों में पीने के पानी की भारी किल्लत, मरीज दवा खाने से भी परेशान: रिपोर्ट

भोपाल, 22 मार्च: मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पताल पानी की कमी से जूझ रहे हैं। प्रदेश में 2200 से ज्यादा सरकारी अस्पताल ऐसे हैं, जहां पानी की कमी से मरीज को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ये खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से ही हुआ है। जलसंकट के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और पीएचसी लेवल के कई अस्पतालों में प्रसव नहीं हो पा रहे।

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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा 290 सरकारी अस्पतालों में पानी का संकट है। यही नहीं आदिवासी क्षेत्रों और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर-चंबल अंचल के अस्पतालों में भी पानी नहीं है। कई अस्पतालों में दवा खाने तक के लिए समय पर पानी नहीं मिल पाता है।

भोपाल के 23 अस्पतालों में पानी की कमी

प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में ही नहीं, बल्कि राजधानी भोपाल के भी 23 अस्पतालों में पानी का संकट है। भोपाल के गांधीनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में पानी का संकट है। इस कारण यहां प्रसव कराने, सर्जरी से लेकर शौचालय का उपयोग करने के लिए पानी की दिक्कत है। भोपाल के एयरपोर्ट से सटे इस अस्पताल में नगर निगम के टैंकरों से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

मरीज ही नहीं, स्टाफ भी परेशान

इसके अलावा नजीराबाद, फंदा, तूमड़ा, गुनगा, धमर्रा, रूनाहा, बरखेडी देव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी यहीं हाल हैं। आदमपुर, भौंरी, गोल, अरवलिया, जमुनियांकला, मुंड़ला, रसूलिया पठार, गढ़ा कला, सूरजपुरा, नया समंद, खितमास, बरखेड़ा बरमाड, निपानिया सूखा, मुगालिया छाप, खजूरी सड़क, टीलाखेड़ी, दीपड़ी के उप स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की कमी के कारण मरीज ही नहीं स्टाफ भी परेशान है। कर्मचारियों की मानें तो पानी की कमी के कारण आए दिन अस्पतालों में विवाद की स्थिति बन रही है।

आदिवासियों के अस्पतालों का गला सूखा

स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में 2228 स्वास्थ्य संस्थाएं जलसंकट से जूझ रही हैं। इनमें आदिवासी क्षेत्रों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। छिंदवाड़ा में सर्वाधिक 290, सिवनी में 129, डिंडोरी में 188, बड़वानी में 168, मंदसौर में 160, रतलाम में 151 अस्पताल पानी की परेशानी का सामना कर रहे हैं। उप-स्वास्थ्य केंद्र, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सीएचसी और सिविल अस्पतालों में यह समस्या बनी हुई है। मुरैना जिले के सीएमएचओ ऑफिस और स्टोर में पानी की परेशानी है।

सिंधिया के क्षेत्र में भी पानी के तरस रहे अस्पताल

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र ग्वालियर-चंबल अंचल में सैकड़ों अस्पतालों में पानी का संकट बना हुआ है। शिवपुरी जिले में 173, गुना में 104, भिंड में 168 अस्पताल पानी की कमी से जूझ रहे हैं। हर घर नल का जल पहुंचाने का दावा करने वाले पीएचई मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव के गृह जिले अशोकनगर में 22 अस्पताल पानी की कमी से त्रस्त हैं।

सीएम की विधानसभा क्षेत्र में भी समस्या कम नहीं

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में 106 अस्पतालों में पानी का संकट है। सीएम के विधानसभा क्षेत्र बुधनी के 16 और नसरुल्लागंज के 15 उप स्वास्थ्य केंद्रों में पानी का संकट है। दिवाली के दिन अपने गृह ग्राम जैत में पहुंचे सीएम से लोगों ने जलसंकट की समस्या बताई थी। इसके बाद अफसरों को सीएम ने फटकार लगाते हुए हर घर नल जल की व्यवस्था करने के लिए निर्देश दिए थे। यह वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हुआ था।

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