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हरियाणा में एमबीबीएस की संशोधित बांड पॉलिसी लागू

सीएम मनोहर लाल खट्टर का मानना है कि जो व्यक्ति सस्ती पढ़ाई कर महंगी नौकरी करना चाहता है, कम से कम उसे हरियाणा में पांच साल सेवाएं देने के प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए।

Revised MBBS bond policy implemented in Haryana

हरियाणा सरकार ने एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए नयी बांड पॉलिसी लागू कर दी है। यह पॉलिसी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और आंदोलनकारी एमबीबीएस विद्यार्थियों के बीच हुई वार्ता के 22 दिन बाद जारी की गयी है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज चाहते थे कि राज्य सरकार एक साल तक इसे लागू न करे। वैसे 52 दिन से आंदोलनरत एमबीबीएस स्टूडेंट्स को सरकार से अधिक छूट मिलने की उम्मीद थी।

फिर भी समझा जा रहा है कि अब आंदोलन खत्म हो सकता है। वैसे बताया जा रहा है कि आंदोलनकारी छात्र पॉलिसी का पूरा अध्ययन करने के बाद ही कोई फैसला लेंगे। नयी बांड पालिसी में मेडिकल के विद्यार्थियों की बांड अवधि सात साल में दो साल कम कर पांच साल एवं राशि 40 लाख से घटाकर 25 लाख रुपये तक कर दी गई है। साथ ही एक साल में नौकरी देने की बात कही गयी है।

चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी अनुपमा ने बुधवार को इसकी अधिसूचना जारी की। यह पालिसी सरकारी और सहायता प्राप्त मेडिकल कालेजों पर लागू होगी। जिन स्टूडेंट्स के दाखिले 2020-21 में हुए, वे भी इसके दायरे में आएंगे। एनआरआई कोटे वालों पर यह लागू नहीं होगी।

पांच साल सेवा पर नहीं देनी होगी बांड राशि : बांड संबंधित कॉलेज के माध्यम से सीधे बैंक के जरिये होगा। सरकार भी उसमें पार्टी बनी रहेगी। हरियाणा के चिकित्सा संस्थानों में पांच साल सेवाएं देने वालों को कोई राशि नहीं देनी होगी। इसे न मानते हुए प्राइवेट सेक्टर में नौकरी के इच्छुक व्यक्ति को बांड राशि जमा करानी ही होगी। सरकार की मंशा है कि डॉक्टरों की अधिक से अधिक सेवाएं हरियाणा के लोगों को मिले। बांड पूरा होने के बाद कोई कहीं भी नौकरी करने के लिए स्वतंत्र है। उल्लेखनीय है कि सीएम मनोहर लाल खट्टर का मानना है कि जो व्यक्ति सस्ती पढ़ाई कर महंगी नौकरी करना चाहता है, कम से कम उसे हरियाणा में पांच साल सेवाएं देने के प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए।

बदलेगा फीस का ढांचा

नयी पॉलिसी के बाद फीस का ढांचा बदलेगा। सरकारी कॉलेज में पहले साल 80 हजार और अनुदान प्राप्त कॉलेजों में एक लाख 80 हजार फीस होगी। इसी क्रम में द्वितीय वर्ष में 86 हजार और 1 लाख 80 हजार, तीसरे साल 92 हजार 956 रुपये और 1 लाख 80 हजार, चौथे साल 1 लाख 327 रुपये और 1 लाख 80 हजार तथा अंतिम वर्ष में 63 हजार 546 रुपये एवं 90 हजार फीस होगी। यानी सरकारी कॉलेजों में कुल फीस 4 लाख, 22 हजार एवं अनुदान प्राप्त कॉलेजों में 8 लाख 10 हजार कुल फीस होगी।

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