पायलट कैंप के मंत्री मुरारी लाल मीणा और BJP MP की जुगलबंदी से राजस्थान में नए सियासी समीकरण
जयपुर, 19 मार्च। पायलट कैंप के मंत्री मुरारी लाल मीणा और भाजपा सांसद किरोड़ीलाल मीणा की जुगलबंदी से पूर्वी राजस्थान में नए सियासी समीकरण बनकर उभरे हैं। कभी एक दूसरे के धुर विरोधी रहे दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक साथ नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि मंत्री मुरारी लाल सचिन पायलट और किरोड़ी को एक जाजम पर बैठाने का दांव खेलकर कांग्रेस-भाजपा का खेल बिगाड़ सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले पायलट नई पार्टी बना सकते हैं। दौसा विधायक एवं गहलोत सरकार के मंत्री मुरारीलाल नई पार्टी की पटकथा लिख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सचिन पायलट को कद्दावर नेता किरोड़ीलाल का साथ मिलने पर कांग्रेस-भाजपा के सियासी समीकरण बिगड़ सकते हैं। सियासी जानकार इससे पायलट कैंप की बड़ी रणनीति मान रहे हैं। गहलोत और पायलट की खींचतान जगजाहिर है।
भाजपा में किरोड़ी की अनदेखी
प्रदेश भाजपा इकाई ने किरोड़ी से दूरी बना रखी है। पिछले लोकसभा चुनाव में किरोड़ीलाल की पत्नी गोलमा देवी का टिकट कटा था। इसके बाद से ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने दूरी बना ली थी। किरोड़ीलाल अलग-अलग मुद्दों पर आंदोलत करते हैं। लेकिन भाजपा नेताओं की दूरी बरकार रखी। मंत्री मुरारी लाल हर मुद्दे पर किरोड़ी का साथ दे रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में महुवा विधासनभा सीट किरोड़ी लाल के भतीजे का हार का सामना करना पड़ा था। सपोटरा के किरोड़ी की पत्नी गोलमा देवी को मंत्री रमेश मीणा ने चुनावी शिकस्त दी थी। दौसा से भाजपा की सांसद जसकौर मीणा की अदावत किसी से छिपी नहीं है। लोकसभा चुनाव में किरोड़ी की पत्नी गोलमा देवी को टिकट नहीं मिला। किरोड़ी ने चुनाव प्रचार से दूरी बना ली और मंत्री मुरारी लाल की पत्नी सविता मीणा को परदे के पीछे समर्थन दे दिया।
मंत्री परसादी लाल के पायलट से सुलह के संकेत
हाल ही में दौसा जिले के कांग्रेस कार्यकर्ता शिविर में गहलोत कैंप के स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय राजेश पायलट के मुक्तकंठ से प्रशंसा की थी। राजेश पायलट के बेहद करीबी रहे परसादी लाल की तारीफ का सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। परसादी के बयान को पायलट से सुलह के तौर पर माना जा रहा है। सचिन पायलट ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए परसादी का टिकट काट दिया था। परसादी निर्दलीय लड़कर चुनाव जीते।
विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली थी बंपर जीत
पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्वी राजस्थान का दबदबा रहा है। पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए भी मजबूत रही। अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर,दौसा और जयपुर जिले पूर्वी राजस्थान के हिस्से है। पिछले विधानसभा चुनाव मे 54 में से 37 सीटों पर कांग्रेस चुनाव जीती थी। किरोड़ीलाल इस बात को जानते हैं कि लोग उन्हें पंसद जरूर करते हैं लेकिन वोट नहीं देते हैं। राज्य की सियासत में पूर्वी राजस्थान की कितनी अहमियत है कि अंदाजा लगाया जा सकता है कि गहलोत कैबिनेट में 30 में से 14 मंत्री पूर्वी राजस्थान से आते हैं। गहलोत कैबिनेट में पूर्वी राजस्थान का दबदबा है।












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