झारखंड में 26 फीसदी एसटी आबादी, ज्यादातर समाज की मुख्यधारा से अलग हैं: सेमिनार
झारखंड में 26 फीसदी एसटी आबादी, अधिकतर समाज की मुख्यधारा से अलग हैं: सेमिनार
हजारीबाग, 28 जुलाई: विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में नवगठित मल्टी डिसीप्लीनरी रिसर्च प्लेटफार्म के तहत पहला सेमिनार झारखंड की जनजातियां विषय पर आयोजित किया गया। इसमें जनजातियों की वर्तमान स्थिति पिछड़ेपन की वजह समाज की मुख्यधारा से कटे रहने की वजह और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर रिसर्च स्कॉलर और रिसोर्स पर्सन ने मंथन किया। आयोजन स्नातकोत्तर मानव विज्ञान विभाग, ट्राइबल रीजनल लैंग्वेजेस डिपार्टमेंट, अर्थशास्त्र और इतिहास विभाग ने मिलकर किया था।

सेमिनार की शुरुआत कुलपति डॉ मुकुल नारायण देव ने किया। उन्होंने कहा कि हमारी नियुक्ति के समय 500 शब्दों में हमसे विश्वविद्यालय के लिए किए जाने वाले कार्यों की जानकारी मांगी गई थी। मैंने उसमें 70% चर्चा रिसर्च का किया था। दुर्भाग्य से मेरे योगदान के बाद कोरोना आ गया। देर से ही सही अच्छी शुरुआत हो गई है। बड़े वैज्ञानिक संस्थानों में भी मल्टीडिस्पिलनरी रिसर्च प्लेटफार्म गठित है और उसमें सब मिलकर काम करते हैं। मेरी सोच है कि विश्वविद्यालय में शोध की सुविधा तैयार हो। जनजातियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका जीवन आज भी सरल और सादा है।
उनमें कई स्किल है, जिसको विकसित कर उनका उत्थान किया जा सकता है। विषय प्रवेश कराते आयोजन सचिव मानव विज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ गंगानाथ झा ने कहा कि झारखंड की जनजातीय आबादी 26% है। उनकी स्थिति, विकास पर मनन होना चाहिए। पहाड़, जंगल, पहाड़ की तलहटी में निवास करने वाले जनजातियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाना चाहिए। जनजातियों के विकास के लिए योजना तैयार करने में विश्वविद्यालय शोध के माध्यम से संबंधित निकायों को मदद कर सकती है।मल्टीडिसीप्लिनरी रिसर्च प्लेटफार्म की सोच व्यापक है।
हमें जनजातियों के मूल समस्या का खोज कर उसमें उसके समाधान का उपाय बताना चाहिए। सेमिनार को समाज विज्ञान संकाय की डीन डॉ नमिता गुप्ता संबोधित किया कहा कि जनजातियों की आबादी ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है उनकी महिलाएं हमसे ज्यादा सबल है। लिंगानुपात के मामले में भी जनजातियों में महिलाओं की संख्या ऊपर है। समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए सम्मिलित प्रयास करना होगा।
संचालन मनोविज्ञान विभाग की डॉ जॉनी रूफीना तिर्की और धन्यवाद ज्ञापन डॉ गंगा नंद सिंह ने किया। यह पहला सेमिनार था जिसमें तकनीकी सत्र में पहले शोधार्थी/ विद्यार्थियों ने अपनी बातें रखी उसके बाद इतिहास विभाग के अशोक मंडल विकास कुमार, अर्थशास्त्र के पीसी देवघरिया, इफ्शा खुर्शीद, ट्राइबल रीजनल लैंग्वेज के नीरज डांग और मानव विज्ञान विभाग के रिसोर्स पर्सन जॉनी रुफीना तिर्की ने जनजातियों के विकास के लिए कई मुद्दों पर चर्चा किया।












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