Iran Rejects Trump Meeting: खामेनेई से मुलाकात पर ईरान का साफ इनकार, अमेरिका के सामने रखीं तीन बड़ी शर्तें
Iran Rejects Trump Khamenei Meeting: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से मुलाकात की इच्छा जताए जाने के बाद, ईरान ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
खामेनेई के करीबी और वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसेन रजाई (Mohsen Rezaei) ने साफ कर दिया है कि ट्रंप के साथ सर्वोच्च नेता की कोई मुलाकात नहीं होगी।

इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है कि यदि उनके फ्रीज (जब्त) किए गए 24 अरब डॉलर (करीब $24 Billion) के फंड जारी नहीं किए गए और समुद्री नाकेबंदी नहीं हटाई गई, तो वे युद्ध का दायरा हिंद महासागर (Indian Ocean) और लाल सागर तक बढ़ा देंगे।
ट्रंप बोले- 'मुलाकात मेरे लिए सम्मान की बात होगी', ईरान ने किया खारिज
दरअसल, 3 जून 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता से मिलने की इच्छा जताई थी। ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा था कि भले ही वह खामेनेई के पसंदीदा इंसान न हों, लेकिन अगर मौका मिला तो वह उनसे मिलना चाहेंगे।
ट्रंप ने कहा था, "मैं खुद से मिलने के लिए नहीं तड़प रहा हूं, लेकिन अगर हमारी मुलाकात होती है, तो यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी। मैं देखना चाहता हूं कि क्या हमारे बीच कोई डील (शांति समझौता) हो सकती है। अगर डील की संभावना बनी, तो मैं उनसे मिलने के लिए बिल्कुल तैयार हूं।"
लेकिन ईरान ने ट्रंप के इस पासे को पूरी तरह पलट दिया है। खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसेन रजाई ने 'सीएनएन' (CNN) को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप के अड़ियल रुख के कारण ही दोनों देशों के बीच शांति वार्ता पूरी तरह ठप (Deadlock) हो चुकी है।
$24 अरब डॉलर की मांग: 'यह हमारा पैसा है, अमेरिका का नहीं'
मोहसेन रजाई ने कहा कि अमेरिका को बातचीत की मेज पर आने से पहले ईरान का भरोसा जीतना होगा और इसके लिए उसे एक 'टेस्ट' पास करना होगा। उन्होंने अमेरिका के सामने मुख्य रूप से दो शर्तें रखी हैं:
जब्त फंड की बहाली: अमेरिका ईरान के जब्त किए गए 24 अरब डॉलर के एसेट्स (संपत्ति) को तुरंत रिलीज करे। रजाई ने कहा, "यह पैसा हमारा अपना है, अमेरिका का नहीं। अमेरिका जैसे अमीर देश के लिए 24 अरब डॉलर कोई बड़ी रकम नहीं है, लेकिन ईरान के लिए यह बेहद अहम है। यह ट्रंप के लिए भरोसे की परीक्षा है।"
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से नाकेबंदी हटाना: ईरान ने मांग की है कि अमेरिका सद्भावना के तौर पर इस क्षेत्र में जारी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत समाप्त करे।
'हिंद महासागर और अमेरिकी ठिकानों को बनाएंगे निशाना' - ईरान की खुली धमकी
ईरान के सैन्य सलाहकार ने अमेरिका को दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि तेहरान संघर्ष को लंबा खींचने से बिल्कुल नहीं डरता। यदि अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं हुआ और प्रतिबंध नहीं हटाए गए, तो ईरान युद्ध को एक नया और खतरनाक आयाम देगा।
मोहसेन रजाई ने कहा, अगर युद्ध जारी रहता है और नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई जाती है, तो हम इस जंग को हिंद महासागर, बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandab), लाल सागर (Red Sea) और भूमध्य सागर (Mediterranean) तक खींच ले जाएंगे। इन क्षेत्रों में मौजूद अन्य अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीधे हमले किए जाएंगे।
ट्रंप को सलाह- 'इजरायल के दबाव से बाहर निकलें'
ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप को अपने निजी हितों से ऊपर उठकर अमेरिकी जनता के बारे में सोचने की सलाह दी है। रजाई ने कहा कि ट्रंप को इजरायल के प्रभाव और दबाव से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से फैसले लेने चाहिए। उन्होंने कहा, "ट्रंप को इजरायल से अलग हटकर सोचना होगा। यदि उनमें हिम्मत है, तो वे ईरानी लोगों का हक उन्हें वापस दें, नाकेबंदी रोकें और हमारे फंड रिलीज करें।
इसी रास्ते से अमेरिका और ईरान के भविष्य के लिए एक नया क्षितिज खुल सकता है। अगर वे ऐसा साहस दिखाते हैं, तो भविष्य की कई जटिल समस्याएं पल भर में सुलझ सकती हैं।" राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह ताजा धमकी वैश्विक तेल आपूर्ति और हिंद महासागर के व्यापारिक मार्गों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर ऊर्जा संकट गहराने के आसार हैं।














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