Ashad Shivratri 2025: आषाढ़ मास की शिवरात्रि आज, जानिए पूजा विधि, महत्व और उपाय
Ashad Shivratri 2025 : आषाढ़ में आने वाली मास शिवरात्रि का बड़ा महत्व होता है, क्योंकि एक शिवरात्रि श्रावण मास प्रारंभ होने से ठीक पहले आती है। आज आषाढ़ी मास शिवरात्रि है। मासिक शिवरात्रि हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है और यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है।
यह व्रत महाशिवरात्रि जितना ही प्रभावशाली माना गया है, विशेषकर साधकों, व्रतधारियों और पारिवारिक सुख की कामना करने वालों के लिए इसका विशेष महत्व होता है।

मासिक शिवरात्रि की मध्यरात्रि में शिवजी का पूजन अभिषेक किया जाता है। रात्रि जागरण करके शिवजी के भजन आदि किए जाते हैं। इसका पूजन अभिषेक शिवरात्रि की तरह ही किया जाता है। विभिन्न कामनाओं के अनुसार पूजन करने का तरीका और विधि बदल जाती है।
मासिक शिवरात्रि पर क्या उपाय करें
- कर्ज से मुक्ति हेतु: एक कटोरी में काले तिल और जल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। "ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नमः" मंत्र का जाप करें।
- संतान प्राप्ति हेतु: दूध में केसर डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। "ॐ सोमाय नमः" का जाप करें।
- वैवाहिक सुख हेतु: गुलाब जल में शहद मिलाकर शिव-पार्वती की पूजा करें। रात्रि में "ॐ पार्वतीपतये नमः" का जाप करें।
- रोग निवारण हेतु: महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। बिल्वपत्र पर \"ॐ नमः शिवाय\" लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।
- आर्थिक लाभ के लिए: गन्ने के रस से अभिषेक करें। \"ॐ श्रीं शिवाय नमः\" मंत्र का जप करें।
108 बिल्व पत्र का प्रयोग (Ashad Shivratri 2025)
आषाढ़ी मास शिवरात्रि के दिन बिल्व पत्र का विशेष प्रयोग करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन 108 बिल्व पत्र लीजिए। ये बिल्व पत्र बिलकुल साफ सुथरे होने चाहिए कोई भी कटा-फटा न हो। इन सभी बिल्व पत्र में अष्टगंध से ऊं नम: शिवाय लिखिए।
मास शिवरात्रि में ठीक मध्यरात्रि में निशिथकाल में करें (Ashad Shivratri 2025)
बिल्व पत्र में तीन पत्तियां होती हैं, एक पर ऊं, दूसरी पर नम: और तीसरी पर शिवाय लिखिए। अब इन्हें एक-एक कर इसी मंत्र का जाप करते हुए शिवजी को अर्पित करते जाएं। इससे पूर्व विधिवत संकल्प लें। इस प्रयोग को मास शिवरात्रि में ठीक मध्यरात्रि में निशिथकाल में करें।












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