Parvati Chalisa: प्रदोष व्रत पर अखंड सौभाग्य के लिए करें माता पार्वती चालीसा का पाठ, क्या है नियम?

Parvati Chalisa: प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। शास्त्रानुसार, इस दैवीय तिथि पर सायंकाल शिव-पार्वती की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

प्रदोष काल में माता पार्वती की स्तुति के लिए पार्वती चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पार्वती चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Parvati Chalisa

पार्वती चालीसा

॥ दोहा ॥

  • जय गिरी तनये डग्यगे शम्भू प्रिये गुणखानी
  • गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवामिनी

चालीसा

  • ब्रह्मा भेद न तुम्हरे पावे , पांच बदन नित तुमको ध्यावे
  • शशतमुखकाही न सकतयाष तेरो , सहसबदन श्रम करात घनेरो ।
  • तेरो पार न पाबत माता, स्थित रक्षा ले हिट सजाता
  • आधार प्रबाल सद्रसिह अरुणारेय , अति कमनीय नयन कजरारे ।
  • ललित लालट विलेपित केशर कुमकुम अक्षतशोभामनोहर
  • कनक बसन कञ्चुकि सजाये, कटी मेखला दिव्या लहराए ।
  • कंठ मदार हार की शोभा , जाहि देखि सहजहि मन लोभ
  • बालार्जुन अनंत चाभी धारी , आभूषण की शोभा प्यारी ।
  • नाना रत्न जड़ित सिंहासन , टॉपर राजित हरी चारुराणां
  • इन्द्रादिक परिवार पूजित , जग मृग नाग यज्ञा राव कूजित।
  • श्री पार्वती चालीसा गिरकल्सिा,निवासिनी जय जय ,
  • कोटिकप्रभा विकासिनी जय जय ।।6।।
  • त्रिभुवन सकल , कुटुंब तिहारी , अनु -अनु महमतुम्हारी उजियारी
  • कांत हलाहल को चबिचायी , नीलकंठ की पदवी पायी ।
  • देव मगनके हितुसकिन्हो , विश्लेआपु तिन्ही अमिडिन्हो
  • ताकि , तुम पत्नी छविधारिणी , दुरित विदारिणीमंगलकारिणी ।
  • देखि परम सौंदर्य तिहारो , त्रिभुवन चकित बनावन हारो
  • भय भीता सो माता गंगा , लज्जा मई है सलिल तरंगा ।
  • सौत सामान शम्भू पहायी , विष्णुपदाब्जाचोड़ी सो धैयी
  • टेहिकोलकमल बदनमुर्झायो , लखीसत्वाशिवशिष चड्यू ।
  • नित्यानंदकरीवरदायिनी , अभयभक्तकरणित अंपायिनी।
  • अखिलपाप त्र्यतपनिकन्दनी , माही श्वरी , हिमालयनन्दिनी।
  • काशी पूरी सदा मन भाई सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायीं।
  • भगवती प्रतिदिन भिक्षा दातृ ,कृपा प्रमोद सनेह विधात्री ।
  • रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे , वाचा सिद्ध करी अबलाम्बे
  • गौरी उमा शंकरी काली , अन्नपूर्णा जग प्रति पाली ।
  • सब जान , की ईश्वरी भगवती , पति प्राणा परमेश्वरी सटी
  • तुमने कठिन तपस्या किणी , नारद सो जब शिक्षा लीनी।
  • अन्ना न नीर न वायु अहारा , अस्थिमात्रतरण भयुतुमहरा
  • पत्र दास को खाद्या भाऊ , उमा नाम तब तुमने पायौ ।
  • तब्निलोकी ऋषि साथ लगे दिग्गवान डिगी न हारे।
  • तब तब जय , जय ,उच्चारेउ ,सप्तऋषि , निज गेषसिद्धारेउ ।
  • सुर विधि विष्णु पास तब आये , वार देने के वचन सुननए।
  • मांगे उबा, और, पति, तिनसो, चाहत्ताज्गा , त्रिभुवन, निधि, जिन्सों ।
  • एवमस्तु कही रे दोउ गए , सफाई मनोरथ तुमने लए
  • करी विवाह शिव सो हे भामा ,पुनः कहाई है बामा।
  • जो पढ़िए जान यह चालीसा , धन जनसुख दीहये तेहि ईसा।

।।दोहा।।

  • कूट चन्द्रिका सुभग शिर जयति सुच खानी
  • पार्वती निज भक्त हिट रहाउ सदा वरदानी।
Parvati Chalisa

प्रदोष व्रत पर पार्वती चालीसा का महत्व

प्रदोष व्रत शिव-पार्वती की संयुक्त उपासना का पर्व है। माता पार्वती को शक्ति, सौभाग्य और करुणा की देवी माना गया है। प्रदोष व्रत के दिन पार्वती चालीसा का पाठ करना आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष पुण्यकारी होता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से माता पार्वती का स्मरण करते हैं, उनके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है। पार्वती चालीसा का पाठ न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि यह आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है ।

पार्वती चालीसा पाठ की सरल विधि

प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त या प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीपक प्रज्वलित कर पुष्प, अक्षत और फल अर्पित करें। इसके पश्चात "ॐ पार्वत्यै नमः" मंत्र का जप करें और पूर्ण श्रद्धा व एकाग्रता के साथ पार्वती चालीसा का पाठ करें। अंत में शिव-पार्वती की आरती कर परिवार के सुख व समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

पार्वती चालीसा पाठ के लाभ

  • दांपत्य जीवन में प्रेम और आपसी सामंजस्य में वृद्धि।
  • घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास।
  • मनोकामनाओं की शीघ्र पूर्ति का आशीर्वाद।
  • मानसिक तनाव और नकारात्मकता का निवारण।
  • सौभाग्य वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति।

FAQs

1. प्रदोष व्रत पर पार्वती चालीसा का पाठ क्यों किया जाता है?

प्रदोष व्रत शिव-पार्वती की उपासना का विशेष दिन है। इस दिन पार्वती चालीसा का पाठ करने से माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

2. पार्वती चालीसा का पाठ किस समय करना चाहिए?

प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त से पहले और बाद का जो विशेष समय होता है, उसमें पार्वती चालीसा का पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।

3. क्या महिलाएं और पुरुष दोनों पार्वती चालीसा का पाठ कर सकते हैं?

जी हां, पार्वती चालीसा का पाठ महिलाएं और पुरुष दोनों ही श्रद्धा के साथ कर सकते हैं।

4. पार्वती चालीसा पढ़ने से क्या लाभ मिलता है?

इससे वैवाहिक जीवन में सुख, मानसिक शांति, सौभाग्य, पारिवारिक खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

5. क्या प्रदोष व्रत में केवल पार्वती चालीसा का पाठ करना पर्याप्त है?

पार्वती चालीसा के साथ यदि भगवान शिव की पूजा, मंत्र जप और आरती भी की जाए, तो व्रत का फल और अधिक शुभ व प्रभावशाली माना जाता है।

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