बस्तर का नया मॉडल: दूध उत्पादन से लेकर पर्यटन तक, जानें कैसे बदलेगी आदिवासियों की किस्मत और मिलेगा रोजगार
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बस्तर के 2030 विकास विजन का अनावरण करते हैं, जो आय के लिए डेयरी-आधारित मॉडल, विस्तारित सिंचाई, डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल, बेहतर पर्यटन और AI व सेमीकंडक्टर में रणनीतिक निवेश पर जोर देता है ताकि रोज़गार सृजन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल सके।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में बस्तर के विकास का व्यापक विजन पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का नया मॉडल बनेगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। इसके साथ ही एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को तेजी से विकसित राज्य बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर में डेयरी मॉडल को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि गांवों में स्थायी आय का स्रोत तैयार हो सके। इससे महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा और गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियां विकसित होंगी।
उन्होंने बताया कि सरकार ने अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है।
32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेगी सिंचाई सुविधा
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की दो बड़ी परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। इन परियोजनाओं से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से खेती बेहतर होगी और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल और अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।
डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल से मजबूत होंगी स्वास्थ्य सेवाएं
बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा।
सुरक्षा शिविर बनेंगे 'सेवा डेरा’
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब "सेवा डेरा" के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। वहीं सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर काम जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है। इससे होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प, दुकानदारों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
निवेश और तकनीक आधारित विकास पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निवेश, सुशासन और तकनीक आधारित विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं और निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके अलावा 341 पीएमश्री स्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
डिजिटल सेवाओं से जुड़े 33 लाख किसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म और अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के जरिए सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन शुरू किए गए हैं। इन मिशनों से युवाओं को रोजगार, तकनीक और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे।
उद्योग और निर्यात को मिली नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और निर्यात को नई गति मिली है। खेल सामग्री, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-एथेनॉल, गारमेंट और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 'एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के जरिए राज्य के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 761.76 करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज किया गया, जिसमें खुशबूदार चावल का सबसे बड़ा योगदान रहा। इससे किसानों, कारीगरों और उद्यमियों की आय में वृद्धि हो रही है।












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