क्या है Birth Tourism जिसपर अमेरिका ने कसा शिकंजा? क्यों इससे चिढ़ते हैं ट्रंप? भारतीयों पर क्या होगा असर?
Birth Tourism America: अमेरिका ने ऐलान किया कि उसने विदेशों में कई "बर्थ टूरिज्म" नेटवर्क्स को खत्म कर दिया है। इसके साथ ही यूरोप और अफ्रीका से जुड़े सैकड़ों विदेशी नागरिकों के वीजा भी रद्द कर दिए गए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ये लोग मुख्य रूप से अमेरिका जाकर बच्चों को जन्म देने और उन्हें अमेरिकी नागरिकता दिलाने के मकसद से वहां पहुंचते थे। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि बर्थ टूरिज्म है क्या, यह कैसे काम करता है और क्या इसका असर भारतीयों पर भी होगा?

बच्चा पैदा करवाने के लिए जाते थे अमेरिका
अमेरिकी विदेश विभाग ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि यूरोप, पश्चिम अफ्रीका और उत्तरी अफ्रीका में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने ऐसे नेटवर्क्स की पहचान की है। इन नेटवर्क्स का काम विदेशी नागरिकों को अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से विजिटर वीजा दिलाने में मदद करना था। विदेश विभाग ने कहा-
"हमने इन नेटवर्क्स को बंद कर दिया है, संबंधित लोगों के वीजा रद्द कर दिए हैं और कई धोखाधड़ी करने वालों को भविष्य में अमेरिका आने से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।"यूरोप में 400 से ज्यादा संदिग्ध मामलों का खुलासा
विदेश विभाग के मुताबिक यूरोप में स्थित एक अमेरिकी दूतावास ने 2024 से अब तक 400 से अधिक संदिग्ध बर्थ टूरिज्म मामलों की पहचान की है। जांच में पता चला कि ये मामले कम से कम छह ऐसी कंपनियों से जुड़े हुए थे, जो लोगों को वीजा इंटरव्यू के लिए विशेष ट्रेनिंग देती थीं। ये कंपनियां अमेरिका में रहने की व्यवस्था करती थीं, अस्पतालों से संपर्क करवाती थीं और प्रसव से जुड़ी पूरी योजना तैयार करती थीं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन सभी नेटवर्क्स को बंद कर दिया गया है।
भारतीयों पर भी होगा असर?
अभी तक हुई अमेरिकी कार्रवाई में किसी भी भारतीय शख्स या भारतीय नेटवर्क का नाम नहीं आया है। हालांकि अमेरिका में सभी बाहरियों को समान नजरिए से देखने का चलन सामान्य है। इसलिए भारतीयों को इस बात का डर है कि कहीं उन्हें इस मामले में जबरन न घसीटा जाए।
अफ्रीका में भी सामने आए बड़े नेटवर्क
विदेश विभाग ने बताया कि पश्चिम अफ्रीका और उत्तरी अफ्रीका में भी इसी तरह के कई नेटवर्क्स का पता लगाया गया। पश्चिम अफ्रीका के एक देश में अधिकारियों ने 100 से अधिक विदेशी नागरिकों से जुड़े एक बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि ये लोग अमेरिका का वीजा पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों और तथाकथित "वीजा फिक्सर्स" की मदद लेते थे ताकि अमेरिका जाकर अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिला सकें। विदेश विभाग ने कहा-
"हमने इस नेटवर्क को बंद कर दिया है, संबंधित विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं और ऐसे अन्य नेटवर्क्स की पहचान कर उन्हें खत्म करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं।"उत्तरी अफ्रीका में 100 से ज्यादा वीजा रद्द उत्तरी अफ्रीका में स्थित एक अमेरिकी दूतावास ने भी बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने ऐसे 100 से अधिक माता-पिता के वीजा रद्द कर दिए, जिन पर आरोप था कि वे मुख्य रूप से अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के मकसद से अमेरिका गए थे। विदेश विभाग ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अपने सिटीजनशिप सिस्टम की रक्षा करने के लिए ऐसा कर रहा है।
कैसे हुआ खुलासा?
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इन नेटवर्क्स की पहचान करने में एजेंसियों और डेटा एनालिटिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जांच एजेंसियों ने कई देशों में फैले नेटवर्क्स की गतिविधियों को ट्रैक किया और उन लोगों की पहचान की जो अमेरिकी सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे थे।
जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर ट्रंप प्रशासन का पुराना रुख
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि अमेरिकी संविधान हर उस बच्चे को स्वतः नागरिकता नहीं देता जो अमेरिकी धरती पर पैदा होता है। अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश में अमेरिका में जन्मे उन बच्चों की नागरिकता सीमित करने का प्रस्ताव था, जिनके माता-पिता अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे थे या अस्थायी वीजा पर वहां मौजूद थे।
अदालतों ने रोका ट्रंप का आदेश
हालांकि ट्रंप का यह कार्यकारी आदेश कभी लागू नहीं हो सका। जिस भी निचली अदालत ने इस आदेश की समीक्षा की, उसने इसे "स्पष्ट रूप से असंवैधानिक" बताया। अदालतों का मानना था कि यह आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन से टकराता है, जो जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार देता है।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
यह मामला अब अमेरिका की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में दोनों पक्षों की दलीलें सुन ली हैं और जल्द ही इस पर अपना फैसला सुना सकता है। इस फैसले का असर न केवल बर्थ टूरिज्म से जुड़े मामलों पर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका की जन्मसिद्ध नागरिकता नीति के भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।
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