Panchdev Puja:आषाढ़ में करें पंचदेवों की पूजा, हर समस्या हो जाएगी छू मंतर, मिलेगी खुशी
Panchdev Puja: आषाढ़ मास का हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष स्थान है। यह महीना 12 जून से शुरू हुआ है और 10 जुलाई 2025 तक रहेगा। इस महीने में मुख्यत: तो देवी दुर्गा की पूजा, आराधना की जाती है, किंतु शास्त्रों का कथन है कि इसमें पंचदेवों की पूजा का विधान है, जो मनुष्य के जीवन की हर समस्या का समाधान कर देते हैं।
पंच देव हैं सूर्य, विष्णु, गणेश, शिव और दुर्गा। आषाढ़ मास में इन पंचदेवों का पूजन सभी गृहस्थों को अनिवार्य रूप से करना चाहिए।

पंचदेव पूजा का धार्मिक आधार
स्मार्त परंपरा में पंचदेव पूजा का विशेष स्थान है। आदि शंकराचार्य ने सभी मतों में समन्वय स्थापित करने के लिए पंचदेव पूजा को महत्व दिया ताकि व्यक्ति संकीर्णता से ऊपर उठकर सार्वभौमिक भक्ति की ओर अग्रसर हो सके। सर्वदेव नमस्कारः केशवं प्रति गच्छति - सभी देवताओं को किया गया पूजन अंततः परमात्मा तक पहुंचता है। इसलिए पंचदेव पूजन व्यक्ति को समष्टि दृष्टि और आध्यात्मिक समन्वय सिखाता है।
पंचदेव पूजा से क्या लाभ (Panchdev Puja)
पंचदेव में शामिल प्रत्येक का एक-एक दिशा पर आधिपत्य है और पंचदेव की पूजा करने से मनुष्य की समस्त दिशाओं से रक्षा होती है। इस सभी दिशाओं में संतुलन स्थापित होता है और मनुष्य के संकट दूर हो जाते हैं।
- शिव - पूर्व दिशा (ज्ञान, योग)
- विष्णु - पश्चिम दिशा (पालन, धर्म)
- गणेश - उत्तर दिशा (बुद्धि, बाधा निवारण)
- दुर्गा - दक्षिण दिशा (शक्ति, रक्षण)
- सूर्य - आकाश (ऊर्जा, आत्मस्फूर्ति)
- पंचतत्त्व और पंचदेवों का समन्वय
- गणेश - पृथ्वी (स्थिरता)
- विष्णु - जल (प्रवाह)
- शिव - आकाश (शून्यता)
- दुर्गा - अग्नि (शक्ति)
- सूर्य - वायु (प्राण शक्ति)
किसे करना चाहिए पंचदेव पूजन? (Panchdev Puja)
पंचदेव का पूजन गृहस्थों को पारिवारिक सुख और संतुलन के लिए अवश्य करना चाहिए। साधकों को अपनी साधना में एकाग्रता और समर्पण के लिए करना चाहिए। इसी प्रकार किसी भी नए कार्य, व्यापार, यज्ञ, गृह प्रवेश आदि से पहले पंचदेव पूजा का विधान है। सर्व-सामान्य भक्तों को भी अपने भक्ति में समन्वय और समरसता के लिए पंचदेव पूजना चाहिए।
पंचदेव पूजा विधि (Panchdev Puja)
- प्रातः स्नान करके, पांचों देवताओं की मूर्तियां या चित्र स्थापित करें।
- पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करें - जल, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि।
- प्रत्येक देवता के मंत्रों का जप करें। चाहें तो एक-एक माला सभी देवों के मंत्र जपना चाहिए।












Click it and Unblock the Notifications