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जयशंकर ने क्यों कहा पाकिस्तान को इंटरनेशनल टेररिस्ट एक्सपर्ट?

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का विशेषज्ञ' बताया है। जयशंकर ने एक कार्यक्रम में कहा, "हमारा एक पड़ोसी है। जैसे हम इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) के विशेषज्ञ हैं, वो इंटरनेशनल टेररिस्ट्स (IT) का एक्सपर्ट है।''

Pakistan as International Terrorists Expert said s jaishankar

पाकिस्तान को लेकर भारत के विदेश मंत्री का बयान बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले कई दशकों से भारत में जितने भी आतंकी हमले हुए हैं उन सभी के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए मिलते हैं। यही नही, भारत सहित वैश्विक स्तर पर भी हर आतंकी हमले में पाकिस्तान का कोई न कोई लिंक सामने जरूर आता है।

किसने शुरू किया पाकिस्तान में आतंक का वैश्विक नेटवर्क?

पाकिस्तान के तानाशाह जनरल जिया उल हक ने 1987 में हामिद गुल नाम के एक सैनिक अधिकारी को वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) का मुखिया बनाया। 'द नेशन' में 15 फरवरी 1999 को प्रकाशित एक लेख " द कॉस्ट ऑफ अफगान विक्ट्री" के अनुसार जिया ने पाकिस्तान की राजनीति में इस्लाम को जोड़ दिया। इस एकतरफा गठजोड़ ने पाकिस्तान में अफगानी चरमपंथियों को जन्म दिया।

उनकी इस योजना में उन्हें हामिद गुल का भरपूर सहयोग मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सीनियर के साथ साल 1989 से 1992 के दौरान अफगानिस्तान के मामलों पर काम कर चुके पीटर थॉमसन ने अपनी पुस्तक 'द वार्स ऑफ अफगानिस्तान' में हामिद गुल को तालिबान और वैश्विक जिहाद का सरगना बताया है। वे आगे लिखते है, "हामिद गुल के ओसामा बिन लादेन से भी बहुत करीबी संबंध थे।"

हामिद गुल, आईएसआई के सबसे बदनाम मुखियाओं में से एक थे। उन्होंने आईएसआई के माध्यम से पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ बना दिया। जाहिद हुसैन अपनी पुस्तक 'फ्रंटलाइन पाकिस्तान - द स्ट्रगल विद मिलिटेंट इस्लाम' में लिखते है, "9 जनवरी 2001 को पाकिस्तान में 300 से अधिक कट्टरपंथी धार्मिक संगठनों की एक सभा हुई जिसमें हामिद गुल सहित पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल असलम बेग भी शामिल हुए। इस सभा में सभी ने मिलकर तालिबान सरकार और ओसामा बिन लादेन के साथ खड़े होने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।"

भारत में आतंकवाद फैलाने के पीछे पाकिस्तान

फरवरी 1989 में सोवियत की अफगानिस्तान से वापसी के बाद हरकत-उल-मुजाहिद्दीन नाम के एक तालिबानी जिहादी संगठन का रुख भारत की ओर हो गया। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद को इन आतंकी गतिविधियों का केंद्र बनाया गया। मुजाहिद्दीन ने हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी के साथ मिलकर 1993 में हरकत-उल-अंसार नाम का नया आतंकी समूह बनाया जोकि भारत के जम्मू-कश्मीर सहित म्यांमार में जिहाद के नाम पर दहशत फैलाने लगा।

यह भी पढ़ें: India's IT vs Pakistan's IT: भारतीय विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को कैसे दिखाया आइना?

इस बीच हरकत-उल-अंसार अथवा मुजाहिद्दीन के तीन प्रमुख सरगनाओं को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया। पहले नसरुल्लाह मंसूर पकड़ा गया जोकि इसका मुखिया रह चुका था। जनवरी 1994 में श्रीनगर से सज्जाद अफगानी और मसूद अज़हर भी सुरक्षा बलों की गिरफ्त में आ गए। इन गिरफ्तारियों से अंसार एकदम कमजोर पड़ गया और आईएसआई के इशारे पर लश्कर-ए-तोइबा में शामिल हो गया। 1997 में हरकत-उल-अंसार पर अमेरिका ने प्रतिबन्ध लगा दिया क्योंकि इसके तार ओसामा बिन लादेन और अलकायदा से जुड़े हुए थे।

मसूद अजहर सहित भारतीय जेलों में कैद अन्य दोनों आतंकी सरगनाओं को बाहर निकलवाने के लिए लगभग सात सालों तक कई प्रयास किये गए। शुरुआती सभी कदम नाकाम रहे जिनमें विदेशी नागरिकों को भारत में बंधक बनाकर सरकार पर दवाब बनाया जाता था। एक बार सज्जाद अफगानी जेल तोड़कर भागने में कामयाब तो हो गया लेकिन सुरक्षा बलों ने उसे जवाबी कार्यवाही में मार गिराया। फिर दिसंबर 1999 में काठमांडू से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइन्स के विमान IC 814 को आतंकियों ने हाईजेक कर लिया। विमान को जबरन कंधार ले जाया गया जोकि उस समय तालिबान के कब्जे में था। विमान में सवार यात्रियों के बदले मसूद अजहर के साथ-साथ दो अन्य आतंकियों को छुड़ाने में पाकिस्तान सफल हो गया।

भारत से निकलने के बाद मसूद अजहर सीधे ओसामा बिन लादेन के पास गया। साल 2000 में आईएसआई, तालिबान और अलकायदा ने मिलकर उसे जैश-ए-मोहम्मद को खड़ा करने में मदद दी। एक अमेरिकी अखबार ने साल 2002 में खुलासा किया कि मसूद का ओसामा से पुराना रिश्ता हैं। यूनाइटेड नेशनस सिक्यूरिटी काउंसिल (UNSC) को भी इन संबंधों की पूरी जानकारी है। काउंसिल के मुताबिक जैश को अलकायदा और तालिबान से पैसा, योजना, सुविधा और तैयारी के लिए सहयोग मिला था।

ग्लोबल टेररिज्म डाटाबेस के अनुसार जैश ने भारत में 2000 से 2017 के बीच 73 आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया। इन 17 सालों में 294 लोगों की मौत और घायलों की संख्या 425 बताई गई हैं। हमलों में नागरिकों सहित पुलिस और सेना को खासकर निशाना बनाया जाता रहा हैं। नई दिल्ली में दो और हैदराबाद में एक बार के अलावा अधिकतर हमलें श्रीनगर, त्राल, राजौरी, दीनानगर, साम्बा, कठुआ, नगरोटा, उरी, बारामुला, पठानकोट, उधमपुर, पुलवामा और सोपोर में हुए। हालाँकि, भारत सरकार ने अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट 1967 (यूएपीए) के तहत जैश ए मोहम्मद पर प्रतिबन्ध लगा रखा है।

ओसामा बिन लादेन से लेकर मसूद अजहर तक सबको पाकिस्तान का संरक्षण

भारत के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर आतंकी हमला हुआ। इस घातक हमलें में अर्धसैनिक बल के 40 जवान शहीद हो गए। इस घटना को जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया था। भारत ने जैश के खिलाफ जवाबी कार्यवाही करते हुए बालाकोट और पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकाने एयर स्ट्राइक से तबाह कर दिए थे।

बालाकोट से एबटाबाद की दूरी सिर्फ 62 किलोमीटर हैं। एबटाबाद पाकिस्तान का वही शहर है, जहाँ से अमेरिकी फौज ने ओसामा को पकड़ा था। मुंबई हमले (2008) के बाद पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी डेविड कोलमेन हेडली ने खुलासा किया था कि ओसामा बिन लादेन जम्मू-कश्मीर पर हमेशा नज़र रखता था। जब उसे मारा गया तो उसके पास राज्य का नक्शा और अखबार मिले थे।

पाकिस्तान की इन्ही कारगुजारियों के चलते वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force- FATF) की ब्लैक लिस्ट में जाने का खतरा झेल रहा है। फिलहाल वह एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शुमार है। हालांकि, उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जारी की नई सूची का अनुपालन करते हुए 88 आतंकवादियों को प्रतिबंधित किया है जिसमें हाफिज़ सईद और मसूद अज़हर के नाम शामिल है। फिर भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। इस्लामिक आतंकवाद को हथियार बनाकर भारत ही नहीं पूरी दुनिया में अपना सिक्का चलाना चाहता है। इसलिए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अगर पाकिस्तान को इंटरनेशनल टेररिस्ट पैदा करनेवाला देश कहा है तो बिल्कुल सही कहा है।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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