मैदान पर छक्के छुड़ाने वाले वैभव सूर्यवंशी अब बनेंगे केस स्टडी, IIM इंदौर करेगा उन पर रिसर्च
Vaibhav Sooryavanshi: आईपीएल के मैदान पर अपनी आतिशी बल्लेबाजी से दुनिया को हैरान करने वाले पंद्रह वर्षीय युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी का नाम पढ़ाई लिखाई की दुनिया में गूंजने वाला है. क्रिकेट पिच पर गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले इस बाल कौतुक पर भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर एक बहुत ही खास रिसर्च करने की तैयारी में जुटा है।
PTI के अनुसार इस विशेष अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि इतनी छोटी उम्र में अचानक मिलने वाली बड़ी कामयाबी, पैसा और शोहरत का किसी बच्चे के दिमाग पर क्या असर पड़ता है। प्रबंधन संस्थान यह जानने की कोशिश करेगा कि सोशल मीडिया का भारी दबाव और आम लोगों की उम्मीदें किसी बाल प्रतिभा के मानसिक विकास को कैसे प्रभावित करती हैं।

सूर्यवंशी ने इस सीजन में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से रनों का अंबार लगा दिया था। पीटीआई ने अपनी खबर में बताया कि टूर्नामेंट की सोलह पारियों में सात सौ छियात्तर रन बनाकर उन्होंने ऑरेंज कैप जीती और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट दो सौ सैंतीस से ऊपर रहा।
इस युवा बल्लेबाज ने अपनी आतिशी पारी के दौरान रिकॉर्ड बहत्तर छक्के जड़े और जसप्रीत बुमराह जैसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों के खिलाफ निडर होकर रन बनाए। मैदान पर उनके इसी बेखौफ अंदाज और शानदार खेल प्रदर्शन के कारण उन्हें टूर्नामेंट के सबसे मूल्यवान खिलाड़ी यानी मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर के प्रतिष्ठित खिताब से भी नवाजा गया था।
प्रबंधन संस्थान के विशेषज्ञ अगले दो हफ्तों में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर देंगे जिसे पूरा होने में करीब तीन महीने का समय लगेगा। इस महत्वपूर्ण अध्ययन को अंजाम देने के लिए मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और व्यवहार विज्ञान जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई है जो खिलाड़ी के व्यवहार का बारीकी से विश्लेषण करेगी।
संस्थान से प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस अध्ययन से जो भी निष्कर्ष निकलेंगे उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के साथ साझा किया जाएगा। क्रिकेट बोर्ड इन सुझावों की मदद से ऐसी नीतियां बना सकेगा जो भविष्य में आने वाले युवा खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने और खेल के मैदान पर उनका करियर लंबा खींचने में मददगार साबित होंगी।












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