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F-16 फाइटर जेट के बाद अब 'आजाद कश्मीर', क्या धुर्त अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते फिर बन गये?

अगर ध्यान से देखा जाए, तो अब पाकिस्तान में द ग्रेट अमेरिकी गेम का खुलासा होता हुआ दिख रहा है। 10 अप्रैल को इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाया जाता है और फिर उसके बाद...
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इस्लामाबाद/वॉशिंगटन, अक्टूबर 03: पाकिस्तान को एफ-16 फाइटर जेट को अत्याधुनिक बनाने के लिए अमेरिका ने 450 मिलियन डॉलर का पैकेज देने का ऐलान किया है, जिसको लेकर भारत और अमेरिका के बीच के रिश्ते में थोड़ी कड़वाहट घुली है, लेकिन अब पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत ने 'आजाद कश्मीर' का जिक्र किया है, जिसके बाद भारत और अमेरिका के बीच के संबंध में दूरी बनने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि, अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर 'आजाद जम्मू-कश्मीर' लिखा है, जो पाकिस्तान का नजरिया है, लेकिन वो भारत का क्षेत्र है, लिहाजा अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते फिर से बनने लगे हैं?

पाकिस्तान पर अमेरिका का नया प्लान?

पाकिस्तान पर अमेरिका का नया प्लान?

अगर ध्यान से देखा जाए, तो अब पाकिस्तान में द ग्रेट अमेरिकी गेम का खुलासा होता हुआ दिख रहा है। 10 अप्रैल को इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाया जाता है, जिनका आरोप होता है, कि अमेरिकी शक्ति ने उनकी सरकारी गिराई है, वहीं 31 जुलाई को काबुल के पॉश इलाके में तालिबान के एक बड़े अधिकारी के घर में छिपा अलकायदा का सबसे बड़ा आतंकवादी अयमान अल-जवाहिरी अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा जाता है, जिसको लेकर तालिबान ने साफ तौर पर कहा, कि पाकिस्तान ने अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने दिया। इसके अगले महीने यानि अगस्त में अचानक आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 1.6 अरब डॉलर के लोन को लेकर समझौता हो जाता है और आईएमएफ पाकिस्तान को राहत पैकेज देने के लिए तैयार हो जाता है, जिसने इमरान खान की सरकार से बातचीत तक बंद कर दी थी और उसके बाद अचानक अमेरिका पाकिस्तानी एफ-16 विमानों के मरम्मत के लिए 450 मिलियन डॉलर के पैकेज देने की घोषणा करता है और पूर्व डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उस फैसले को पलट देता है, जिसमें पाकिस्तान को किसी भी तरह के सैन्य मदद देने पर रोक लगा दी गई थी। वहीं, अब पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा वॉशिंगटन के आधिकारिक दौरे पर गये हैं। तो ये सारे घटनाक्रम यही बताते हैं, कि अमेरिका और पाकिस्तान एक बार फिर से साथ आ गये हैं।

अब सत्ता में ना आ पाएं इमरान खान!

अब सत्ता में ना आ पाएं इमरान खान!

अमेरिका जिस तरह से शहबाज सरकार को अपना पूर्ण समर्थन दे रहा है और पाकिस्तान को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए मदद दे रहा है, उससे साफ जाहिर होता है, कि अमेरिका पाकिस्तान को आर्थिक झंझावातों से बाहर निकालकर इमरान खान को फिर सत्ता के करीब पहुंचने नहीं देना चाहता है। इमरान खान लगातार अमेरिका के खिलाफ आक्रामक रहे और उन्होंने बार बार कहा, कि अमेरिका नहीं चाहता था, कि वो सत्ता में बने रहें। और अब जब इमरान खान को सत्ता से बाहर हुए 6 महीने का वक्त बीत चुका है, तो फिर ऐसा लगता है, कि इमरान खान के आरोप बेबुनियाद नहीं थे, क्योंकि इमरान खान ने यहां तक कहा था, कि 'अमेरिका ने कहा है, कि अगर इमरान खान को सत्ता से हटा दिया जाता है, तो अमेरिका पाकिस्तान को माफ कर देगा।' और जो भी घटनाक्रम बने हैं, उससे यही जाहिर हो रहा है, कि अमेरिका ने पाकिस्तान को वाकई माफ कर दिया है। वहीं, जिस सीक्रेट चिट्ठी की बात बार बार इमरान खान करते थे, वो चिट्ठी भी अब प्रधानमंत्री कार्यालय में नहीं है और ऐसी रिपोर्ट है, कि उसे जनरल बाजवा ने अपने संरक्षण में ले लिया है।

US-पाकिस्तान संबंध पर भारत की नजर

US-पाकिस्तान संबंध पर भारत की नजर

भारत लगातार इन घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है और पिछले हफ्ते भारतीय विदेश मंत्री ने वॉशिंगटन में एफ-16 जेट पैकेज को लेकर अमेरिका पर काफी आक्रामक बयान भी दिया था। उन्होंने तो साफ तौर पर कहा था, कि F-16 फाइटर जेट का इस्तेमाल किसके खिलाफ होगा, उसे लेकर किसी को 'मूर्ख नहीं समझा जाए'। जिसके जवाब में अमेरिका की तरफ से जो प्रतिक्रिया दी गई, उसमें कहा गया, कि अमेरिका के लिए भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों से अलग अलग संबंध हैं और भारत और पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की अपनी अलग अलग प्राथमिकताएं हैं। वहीं, नई दिल्ली ने इन सभी घटनाओं पर ध्यान दिया है और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है, कि अमेरिका और प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी (पाकिस्तान) के बीच लेन-देन संबंध फिर से शुरू हो गए हैं। और पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में अचानक यू-टर्न लेने, अचानक से किसी टॉप आतंकवादी को बेनकाब करने या बलि का बकरा बनाने, जैसे अयमान अल जवाहिरी को मारा गया और अपने अल्पकालिक लाभ के लिए अमेरिका और चीन, डबल गेम खेलने में माहिर है और पाकिस्तान के पास ये क्षमता बेजोड़ है। लिहाजा, पाकिस्तान एक बार फिर से चीन और अमेरिका के बीच अपना फेवरेट डबल गेम खेलने लगा है, जिसको लेकर पिछले हफ्ते चीन ने अपनी नाराजगी के संकेत भी दिए थे।

अपनी नीति-रणनीति पर डटा है भारत

अपनी नीति-रणनीति पर डटा है भारत

एक तरफ पाकस्तान, जो पाले बदलने में माहिर और कुख्यात है, तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सभ्यता, संस्कृति और इतिहास के साथ, अपने राष्ट्रीय हित के लिए खड़ा है, चाहे वह यूक्रेन युद्ध हो या फिर जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक भलाई हो के मुद्दे हों, भारत की अपनी अलग विदेश नीति है। यह बिल्कुल स्पष्ट है, कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों सहित एफ-16 फाइटर जेट का इस्तेमाल करेगा, ना कि किसी तीसरे देश के खिलाफ, फिर भी अमेरिका ने पाकिस्तान को पैकेज देकर यकीनन भारत के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। इसके साथ ही, अमेरिका पाकिस्तान को फिर से अपना हथियार बेचना चाहता है और अगर अमेरिका पाकिस्तान को हथियार बेचता है, तो फिर अमेरिका को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने का टेंशन नहीं रहेगा, लेकिन भारत के साथ ये स्थिति नहीं है। भारत अगर कोई हथियार खरीदता है, तो अब भारत की पहली शर्त ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और हार्डवेयर प्लेटफॉर्म का निर्माण भारत में करना होता है। लेकिन, पाकिस्तान की ऐसी कोई शर्त नहीं होती है।

पाकिस्तान को है मदद की जरूरत

पाकिस्तान को है मदद की जरूरत

इसके साथ ही पाकिस्तान को आने वाले वक्त में भारी-भरकम चीनी कर्ज चुकाना है और पाकिस्तान ने उच्च ब्याज दर पर चीन से काफी अरबों डॉलर कर्ज ले रखे हैं। इसके साथ ही सीपीईसी प्रोजेक्ट में चीन ने जो डॉलर्स लगाए हैं, उसे भी चुकाने का वक्त काफी करीब आ रहा है, जो पाकिस्तान के लिए सफेद हाथी साबित हुआ है, लिहाजा अब पाकिस्तान को एक ऐसे देश की जरूरत है, जो उसके कंधे का बोझ उतार ले या कम कर दे और अमेरिका से बेहतर और कौन हो सकता है। वहीं, अमेरिका जो भी करता है, उसको लेकर इस्लामाबाद यस मैन की भूमिका में भी रहता है, वहीं अफगानिस्तान में ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए अमेरिका को सैन्य अड्डा चाहिए, जिसे देने से पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इनकार कर दिया था, लेकिन शहबाज शरीफ की सरकार के सामने इस तरह की कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान को अमेरिकी रक्षा सहायता ऐसे समय में मिली है, जब इस्लामाबाद को बाढ़ राहत प्रदान करने के लिए धन की आवश्यकता थी।

भारत के साथ पश्चिम का डबल गेम?

भारत के साथ पश्चिम का डबल गेम?

अमेरिका को इंडो-पैसिफिक में अगर वर्चस्व बनाना है और अगर चीन को काउंटर करना है, तो फिर उसे भारत के मदद की ही जरूरत है, वहीं भारत को भी चीन की आक्रामकता को काउंटर करने के लिए अमेरिका की जरूरत है, लिहाजा भारत के साथ अमेरिका के साथ संबंध बनाकर रखना होगा, लेकिन भारत पश्चिम के डबल गेम को जानता है। भारत भलि-भांति जानता है, कि प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकवादी संगठन एसएफजे का अड्डा अमेरिका में भी है और एसएफजे का आतंकवादी पन्नू अमेरिका में बैठकर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहता है, लेकिन अमेरिका उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता है। वहीं, आईएसआई भी भारत में आतंकियों को भेजते रहता है, जिसको लेकर अमेरिका लगातार अपनी आंखे मूंदे रहता है। लिहाजा, भारत और भारतवासी कभी भी अमेरिका को अपना दोस्त नहीं मानते हैं और अमेरिका अपनी इसी धुर्त नीति की वजह से भारतीयों के दिल में रूस के जैसा स्थान नहीं बना पाया।

कनाडा और ब्रिटेन भी खेल में शामिल

कनाडा और ब्रिटेन भी खेल में शामिल

अमेरिका के प्रमुख सहयोगी कनाडा और ब्रिटेन के साथ भी यही स्थिति है। इन दोनों देशों में भी पाकिस्तान को लेकर जबरदस्त पूर्वाग्रह की स्थिति है और इन देशों की सरकार में पाकिस्तान के प्रति हमेशा से सॉफ्ट कार्नर रहा है। खालिस्तानी आतंकियों का सबसे सुरक्षित घर कनाडा ही है, जहां खालिस्तानी आतंकी अलग खालिस्तान के लिए जडनमत संग्रह कराने वाले हैं, जिसे पाकिस्तान का समर्थन हासिल है। वहीं, किसी को यह भी नहीं भूलना चाहिए, कि तालिबान शासन को स्थापित करने में ब्रिटेन के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ निक कार्टर की क्या भूमिका थी, जिसके विनाशकारी परिणाम हुए। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच खुफिया जानकारी और पारस्परिक रूप से लाभकारी जानकारी और उच्च तकनीक के गहन साझाकरण के साथ एक मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं, लेकिन, अमेरिकी विजा प्राप्त करने के लिए अगर दोस्त देश भारत के लोगों को 800 दिनों का इंतजार करना पड़े, तो यकीनन दोस्ती पर सवाल उठते हैं। लिहाजा, एक्सपर्ट्स का यही कहना है, कि भारत को किसी पर भी निर्भर नहीं रहना चाहिए और अपनी राह खुद बनानी चाहिए।

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English summary
From F-16 package to US ambassador's Azad Kashmir statement, has the relationship between America and Pakistan been restored?
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