Huzaifa कौन है? ISI-अंडरवर्ल्ड मॉड्यूल का मुख्य लिंक-ATS ने दबोचा, Dawood के करीबी Munna से था सीधा संपर्क

Mumbai ATS Arrested Huzaifa: महाराष्ट्र एटीएस की स्पेशल सेल ने मंगलवार (2 जून 2026) को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के साथ मिलकर एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया। फरार संदिग्ध हुफैजा को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया है। हुफैजा (Huzaifa) को ISI और अंडरवर्ल्ड के गठजोड़ का सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा था। वह पाकिस्तान स्थित दाऊद इब्राहिम के करीबी मुन्ना झिंगाड़ा (सैयद मुदस्सर हुसैन) के सीधे संपर्क में था और दिल्ली-मुंबई समेत कई शहरों में ग्रेनेड हमले व गोलीबारी की साजिश रच रहा था।

इस गिरफ्तारी से ISI और डी-कंपनी के मिले-जुले आतंकी नेटवर्क की कई परतें खुलने की उम्मीद है। पुलिस पूछताछ में Huzaifa से महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। आइए विस्तार से जानते हैं...

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Who Is Huzaifa: हुफैजा कौन है? मॉड्यूल का मुख्य ऑपरेटिव

हुफैजा मुंबई का रहने वाला है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह ISI के हैंडलर्स (यावर खान आदि) और मुन्ना झिंगाड़ा के बीच मुख्य समन्वयक की भूमिका निभा रहा था।

ATS के मुताबिक, Huzaifa ने तौकीर और अरबाज नामक दो गिरफ्तार आतंकियों को दिल्ली और मुंबई में संवेदनशील प्रतिष्ठानों, सुरक्षा ठिकानों और पुलिसकर्मियों पर हमले का काम सौंपा था। दोनों आरोपी हमले की तैयारी कर चुके थे। वह पाकिस्तानी माफिया शहजाद भट्टी और मुन्ना झिंगाड़ा के इशारे पर काम कर रहा था। युवाओं को नशे (हेरोइन/चिट्टा) और पैसे का लालच देकर मॉड्यूल में शामिल किया जा रहा था। दिल्ली स्पेशल सेल ने पहले विजय नामक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसकी पूछताछ में तौकीर-अरबाज का नाम सामने आया। मुंबई से इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद Huzaifa का नाम मुख्य सरगना के रूप में उभरा।

Who Is Munna Jhingada: मुन्ना झिंगाड़ा कौन है? दाऊद का पुराना और खतरनाक सहयोगी

मुन्ना झिंगाड़ा का असली नाम सैयद मुदस्सर हुसैन है। वह मुंबई के जोगेश्वरी इलाके का मूल निवासी है और लंबे समय से दाऊद इब्राहिम व छोटा शकील का करीबी माना जाता है।

उसके आपराधिक इतिहास की मुख्य बातें:

कैटेगरी डिटेल
असली नाम सैयद मुदस्सर हुसैन
उपनाम मुन्ना झिंगाड़ा (चरस की गोलियों के कारण)
मूल स्थान जोगेश्वरी, मुंबई
संबंध दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील का भरोसेमंद शूटर
मुकदमे मुंबई में 70+ मामले (हत्या, रंगदारी, गैंगवार)
चर्चित घटना 2000 में बैंकॉक में छोटा राजन पर हमला
वर्तमान स्थान पाकिस्तान (कराची) में रहने का दावा

2000 बैंकॉक हमला: दाऊद के निर्देश पर मुन्ना झिंगाड़ा छोटा राजन को मारने बैंकॉक गया था। हमले में राजन बाल-बाल बचा, लेकिन उसका सहयोगी रोहित वर्मा मारा गया। थाईलैंड पुलिस ने झिंगाड़ा को गिरफ्तार किया। भारत-पाकिस्तान के बीच नागरिकता विवाद चला। अंत में थाई अदालत ने उसे पाकिस्तानी नागरिक माना और वह पाकिस्तान चला गया।

जांच एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान में बैठकर मुन्ना झिंगाड़ा डी-कंपनी को नया जीवन देने की कोशिश कर रहा था। उसने ISI के साथ मिलकर भारत में 'जिहादी ब्रिगेड' तैयार करने की साजिश रची। Huzaifa इसी नेटवर्क का मुंबई में ऑपरेटिव था।

ISI Module कैसे काम कर रहा था?

  • फंडिंग और लॉजिस्टिक्स: ISI और अंडरवर्ल्ड से पैसे, हथियार और निर्देश आ रहे थे।
  • नशे का जाल: युवाओं को हेरोइन देकर लत लगाई जाती और फिर पैसे का लालच देकर आतंकी कामों में शामिल किया जाता।
  • टारगेट: दिल्ली, मुंबई समेत चार शहरों में महत्वपूर्ण जगहों पर ग्रेनेड हमले और गोलीबारी की योजना।
  • संपर्क: Huzaifa वीडियो कॉल/चैट के जरिए मुन्ना झिंगाड़ा, शहजाद भट्टी और ISI हैंडलर्स से जुड़ा था।

पुलिस को आशंका थी कि Huzaifa देश छोड़कर भाग सकता है, इसलिए LOC जारी करने की तैयारी थी। मुंबई में छापेमारी के दौरान उसे दबोचा गया।

सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी

यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, महाराष्ट्र ATS और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त मेहनत का नतीजा है। वक्त रहते मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर एक बड़ी साजिश को नाकाम किया गया।

डी-कंपनी का नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुआ था। दाऊद और छोटा शकील की उम्र बढ़ने के साथ नए चेहरे जोड़कर इसे फिर मजबूत करने की कोशिश की जा रही थी। Huzaifa और मुन्ना झिंगाड़ा इसी रणनीति के अहम हिस्से थे।

एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की फाइनेंशियल ट्रेल, हथियार सप्लाई चेन और अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं। पंजाब के गुरदासपुर में हथियार गिराए जाने और 20 लाख रुपये की मांग जैसे खुलासे भी सामने आए हैं।

Huzaifa से पूछताछ में और नाम सामने आने की संभावना है। पुलिस पूरे मॉड्यूल की फंडिंग, विदेशी कनेक्शन और अन्य शहरों में छिपे सदस्यों की तलाश कर रही है। महाराष्ट्र ATS और दिल्ली स्पेशल सेल की यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र की सतर्कता को दर्शाती है। हुफैजा की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता है, लेकिन यह पूरी कहानी का अंत नहीं। मुन्ना झिंगाड़ा जैसे पाकिस्तान में बैठे ऑपरेटिव्स अभी भी सक्रिय हैं। सुरक्षा एजेंसियों को डिजिटल निगरानी, नशा नियंत्रण और बॉर्डर सुरक्षा को और मजबूत करना होगा।

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