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Harmful Beauty Products: सेहत से समझौता करती सौंदर्य उत्पाद बेचने वाली कंपनियां

Harmful Beauty Products: बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग, बूढ़े, स्त्री, पुरुष... हर इंसान में जैसा वह दिखता है, उससे बेहतर दिखने की चाह होती है। इसी कमजोरी का फायदा उठाती हैं सौंदर्य और पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स कंपनियॉं।

Harmful Beauty Products compromising on health

इनका कारोबार किस कदर फल-फूल रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत में अभी 26.8 बिलियन डॉलर का यह बाजार अगले तीन सालों में बढ़कर 37.2 बिलियन डॉलर का हो जायेगा। ये सिर्फ भारत के आंकड़े हैं। ऐसे में यह आश्चर्यजनक है कि इस विशाल बाजार के बावजूद ब्यूटी और केयर प्रॉडक्ट्स की उत्पादक, बड़ी-बड़ी कंपनियॉं हमारे देश में स्वास्थ्य मानकों की निरंतर अनदेखी कर रही हैं।

जॉनसन एंड जॉनसन फिर से विवादों में

ताजा मामला बच्चों की देखभाल संबंधी उत्पाद बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन से संबंधित है। बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंपनी के बेहद लोकप्रिय उत्पाद जॉनसन बेबी पाउडर के वितरण व बिक्री पर रोक लगा दी है। अलबत्ता कंपनी चाहे तो अपना उत्पादन जारी रख सकती है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भी आदेश दिये हैं कि वह नये सिरे से पाउडर के सैंपल की जॉंच कराये। उल्लेखनीय है कि कुछ अर्सा पहले महाराष्ट्र एफडीए ने मुलुंड, मुंबई, पुणे और नासिक से जॉनसन बेबी पाउडर के कुछ सैंपल लिये थे। जॉंच में यह पाउडर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं पाया गया।

इसलिए सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 17 सितंबर को कंपनी का लाइसेंस रद्द कर, उत्पादन पर रोक लगा दी थी। कंपनी ने इसके खिलाफ याचिका दायर की। बुधवार को हाईकोर्ट ने इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश जारी किये।

बड़ी-बड़ी कंपनियॉं कर रही सेहत से खिलवाड़

पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स मैनुफैक्चरिंग में हानिकारक उत्पाद बना और बेच रही कंपनियों में जॉनसन एंड जॉनसन अकेली नहीं है। अभी तीन हफ्ते पहले ही अमेरिका में मल्टी नेशनल कंपनी यूनिलीवर के डव, नेक्सस, सुआवे, टिगी और ट्रेसमे जैसे कई शैंपू ब्रांड्स में कैंसर पैदा करने वाला बेंजीन केमिकल पाये जाने की खबर आयी थी। जिसके बाद कंपनी को ये सभी प्रॉडक्ट्स बाजार से वापस मंगाने पड़े थे।

ज्ञातव्य है कि बेंजीन नाक, मुंह और त्वचा आदि के माध्यम से इंसानों के शरीर में जा सकती है और ल्यूकेमिया और ब्लड कैंसर की वजह बन सकती है। पिछले डेढ़-दो सालों के भीतर ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब सनस्क्रीन, स्किन और हेयर स्प्रे, शैम्पू जैसे पर्सनल केयर उत्पादों में एयरसोल या बेंजीन की मौजूदगी की वजह से उन्हें बाजार से वापस मंगाया गया।

इनमें प्रॉक्टर एंड गैम्बल के तीस से अधिक एयराेसाेल स्प्रे हेयरकेयर प्रॉडक्ट्स और एक दर्जन से ज्यादा ओल्ड स्पाइस व सीक्रेट ब्रांड के डियोड्रेंट्स और स्प्रे के अलावा एजवेल पर्सनल केयर कंपनी का बनाना बोट, बेजर्सडॉर्फ एजी का कॉपरटोन और जॉनसन एंड जॉनसन का न्यूट्रोजिना आदि शामिल हैं।

75 वर्षों से भारत में माैजूद है जॉनसन एंड जॉनसन

128 साल पुरानी इस अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी का कारोबार दुनिया के 175 देशों में फैला है। कंपनी ने भारत में 1947 में ही पदार्पण कर दिया था। शैंपू, पाउडर, साबुन आदि बेबी केयर उत्पादों की खासी बड़ी रेंज रखने वाली इस कंपनी के उत्पाद आज देश के घर-घर में इस्तेमाल किये जाते हैं।

बेबी केयर उत्पादों के करीब 94,500 करोड़ रुपये के भारतीय बाजार में जॉनसन एंड जॉनसन की हिस्सेदारी 50% से अधिक है। बावजूद इसके कि पाउडर, शैम्पू, साबुन सहित जॉनसन के दूसरे कई उत्पाद भी बच्चों के लिए हानिकारक होने के आरोपों का सामना करते रहे हैं।

इस विवादास्पद कंपनी के खिलाफ दुनिया भर में 38 हजार से ज्यादा केस चल रहे हैं, जिनकी वजह से इसे पिछले पाँच सालों में विभिन्न मुकदमों में एक बिलियन डॉलर से ज्यादा का भुगतान करना पड़ा है। कंपनी की मानें तो उसे सेटलमेंट के मामले सुलझाने के लिए लगभग 3.5 बिलियन डॉलर का पेमेंट करने के लिए मजबूर किया गया है। अमेरिका में विभिन्न अदालतों में करीब 1200 महिलाओं ने जॉनसन के खिलाफ मुकदमें दायर कर रखे हैं कि उसके उत्पादों की वजह से उन्हें गर्भाशय का कैंसर हुआ।

अगस्त माह में कंपनी ने घोषणा की थी कि वह अगले साल से दुनिया भर में अपना बेबी टैल्कम पाउडर बेचना बंद कर देगी और इसकी बजाय कॉर्नस्टार्च बेस्ड पाउडर बाजार में लायेगी। ऐसे में भारत में अपना उत्पादन और बिक्री जारी रखवाने के लिए उसका कोर्ट की शरण में जाना हैरान करने वाला है।

भारत को यह कंपनी कितने हल्के में लेती है, इसी से समझा जा सकता है कि कंपनी जिस पाउडर की बिक्री अमेरिका और कनाडा में 2020 से ही बंद कर चुकी है, वही पाउडर भारत में वह धड़ल्ले से बेच रही है।

पिछले साल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने डीसीजीआई (भारतीय औषधि महानियंत्रक) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को बुलाकर पूछा भी था कि जॉनसन एंड जॉनसन के शैंपू और टैलकम पाउडर में कैंसर कारक तत्वों फॉर्मलाडेहाइड और एस्बेस्टस की उपस्थिति का पता लगाने के लिए परीक्षण विधियों में एकरूपता क्यों नहीं है।

विवादों से है पुराना नाता

भारत में पहली बार कंपनी 2007 में विवादों में आई, जब महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने बेबी टैल्कम पाउडर में कैंसरकारक केमिकल एथेलीन ऑक्साइड से स्टरलाइज्ड करने के चलते उत्पादन पर रोक लगा दी थी। 2013 में भी इसी वजह से राज्य में जॉनसन एंड जॉनसन का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।

2015 में मुंबई के आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. अजीत तेलंग ने कंपनी के पाउडर से कैंसर का खतरा होने को लेकर मुंबई हाईकोर्ट में केस दायर किया था। उनका कहना था कि कंपनी के टैल्कम पाउडर में जेनोट़ॉक्सिक एथेलीन ऑक्साइड है, जिसकी वजह से बच्चों में कैंसर का खतरा होने की आशंका बढ़ जाती है। फरवरी 2019 में राजस्थान ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की जॉंच में, जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी शैम्पू में कैंसर का कारण बनने वाले फॉर्मलाडेहाइड की उपस्थिति की बात सामने आयी थी।

बेबी प्रॉडक्ट्स ही नहीं, बल्कि कंपनी के दूसरे प्रॉडक्ट्स भी संदेह के घेरे में बने रहे हैं। 2018 में जॉनसन, भारत में दोषपूर्ण हिप रिप्लेसमेंट सिस्टम बेचने को लेकर भी अपनी गलती मान चुकी है। कंपनी ने भारत में साढ़े तीन हजार से अधिक मरीजों को ऐसे सिस्टम बेचे, जिन्हें अमेरिका में रिजेक्ट किया जा चुका था और कंपनी द्वारा दुनिया भर से रिकॉल कर लिया गया था।

कंपनी की इस लापरवाही की वजह से मरीजों की जान पर बन आयी थी। इनमें चार मरीजों को तो अपनी जान से हाथ धोना भी पड़ा। इस मामले को लेकर गठित केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की समिति ने अपनी रिपोर्ट में जॉनसन की ओर से वर्ष 2025 तक सब मरीजों के सिस्टम बदलने और उन्हें बीस-बीस लाख रुपये मुआवजा दिये जाने की सिफारिश की थी।

क्यों खतरनाक है टैल्क बेस्ड बेबी पाउडर

जॉनसन बेबी पाउडर को 1894 में लॉन्च किया गया था। पहली बार इस पाउडर के त्वचा के लिए हानिकारक होने का मामला 1930 में सामने आया था। इस दौरान, पाउडर को लेकर कई शोध प्रकाशित किए गए जिनमें दावा किया गया कि इस पाउडर से कैंसर हो सकता है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने वर्ष 2000 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें बताया गया कि जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी वर्षों से इस बात को जानती थी कि उसके पाउडर में एस्बेस्टस (अभ्रक) मौजूद है। एस्बेस्टस को कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ के रूप में जाना जाता है। इस रिपोर्ट में कंपनी के अंदरूनी रिकॉर्ड और गवाहों के हवाले से बताया गया कि कंपनी के द्वारा उत्पादित 1971 से 2000 के बीच बेबी पाउडर में एस्बेस्टस की थोड़ी - थोड़ी मात्रा पायी गयी थी।

बेबी पाउडर और दूसरे पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स व कॉस्मेटिक्स में इस्तेमाल किया जाने वाला टैल्क एक प्राकृतिक खनिज है। इसमें सिलिकॉन, मैग्नीशियम, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन जैसे तत्व पाये जाते हैं। यह एक हाइड्रोस मैग्नीशियम सिलिकेट होता है, जो नमी सोखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इसे खतरनाक इसलिए माना जाता है कि जिस जगह से इसे निकाला जाता है, वहीं पर शरीर के लिए खतरनाक अभ्रक भी निकलता है। ऐसे में अभ्रक और टैल्क के आपस में मिलने की आशंका बनी रहती है। जॉनसन एंड जॉनसन, भविष्य में टैल्क के स्थान पर जिस कॉर्नस्टार्च को इस्तेमाल करने की बात कर रही है, वह प्राकृतिक और मोटे कणों की वजह से टैल्क की तुलना में काफी सुरक्षित माना जाता है।

बचने के लिए सावधानी और संयम जरूरी

अमेरिका के हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस डिपार्टमेंट के अंतर्गत काम करने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के न्यूजलेटर एनआईएच में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स के खतरों पर कई चेतावनीपूर्ण जानकारियॉं पेश करती है। इसके मुताबिक सौंदर्य और पर्सनेल केयर के लिए इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद मानव के लिए निरापद नहीं हैं। इनमें फेथलेट्स, बैराबेंस, पीएफएएस, पारा और लेड जैसे रसायनों और धातुओं का उपयोग होता है।

एक सामान्य व्यक्ति के लिए यह जानना बहुत मुश्किल हो सकता है कि वह जिस उत्पाद का इस्तेमाल करने जा रहा है, उसमें कौन-कौन से रसायन या धातुएं मौजूद हैं। वह लेबल पर इनकी जानकारी पा सकता है, लेकिन वह इतनी बारीक लिखाई या संक्षिप्त नामों के साथ मौजूद रहती है कि उसके लिए समझ पाना बहुत कठिन होता है।

इसलिए जब भी आप ऐसा कोई उत्पाद खरीदने जायें, उसके बारे में जानकारी हासिल करने में भी समुचित समय लें। आजकल गूगल जैसे सर्च इंजन इसमें काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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