मिठाई नहीं इस मंदिर में मां काली को लगाया जाता है न्यूडल्स का भोग, टेंपल का नाम और भी दिलचस्प
कोलकाता, 27 अगस्त। भारत में हर मंदिर की अलग-अलग मान्यताएं है और तरह-तरह के भोग लगाने की प्रथा है। अक्सर आपने मंदिरों में भगवान को भोग लगाने के लिए लड्डू-पेड़ा, मिठाई और फलों का उपयोग होते देखा होगा, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे धार्मिक स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं जहां प्रसाद में भगवान को नूडल्स (चाऊमीन) चढ़ाया जाता है। जी हां, वहां के श्रद्धालु अपने इष्ट देव को भोग लगाने के लिए अलग-अलग रेसपी से बने नूडल्स लाते हैं। इस मंदिर का नाम सुनकर आप और भी दंग रह जाएंगे।

मंदिर में लगाया जाता है नूडल्स का भोग
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के टंगरा क्षेत्र में स्थित मशहूर 'चाइनीज काली मंदिर' के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन यहां आने वाले भक्तों का तंता लगा रहता है। इस मंदिर में श्रद्धालु काली मां को भोग के रूप में नूडल्स और चॉप्सी चढ़ाते हैं फिर उसे प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है। जिस जगह ये मंदिर है वह चाइना टाउन के नाम से मशहूर है। यहां की ज्यादातर आबादी तिब्बती है।

हिंदुस्तान और चीन की मिली जुली संस्कृति
तिब्बती शैली की ऐतिहासिक गली में बना काली माता का ये मंदिर टूरिस्टों को भी काफी आकर्षित करता है। यहां ओल्ड कोलकाता और पूर्वी एशिया की खूबसूरत संस्कृति का मेलजोल देखने को मिलता है। दिलचस्प बात तो ये है कि यहां देवी मां को भोग में मिठाई या फल नहीं बल्कि चाइनीज डिशेज चढ़ाई जाती हैं, इतना ही नहीं मंदिर में जलाई जाने वाली अगरबत्ति भी चाइनीज ही होती है।

लगाए जाते हैं चाइनीज भोग
अगरबत्ति के अगल सुगंध के चलते काली मां का मंदिर बाकी मंदिरों से अलग खुशबू में नहाया होता है। हालांकि मंदिर की देखभाल और पूजा करने वाले पुजारी हिंदू हैं। मंदिर में बुरी आत्माओं को दूर रखने के लिए खास मौके पर हांथ से बने कागज जलाने की भी प्रथा है। मंदिर में चाइनीज भोजन का भोग लगाने की वजह की बात करें तो इसे 20 साल पहले चीनी और बंगालियों ने मिलकर बनवाया था।

मंदिर से जुड़ा है ये चमत्कार
बताया जाता है कि मंदिर बनाए जाने से पहले यहां एक पेड़ के नीचे देवी मां की पूजा सिर्फ हिंदुओं द्वारा की जाती थी। स्थानीय लोग बताते हैं कि कई साल पहले यहां एक चीनी लड़का गंभीर रूप से बीमार हो गया था, उसकी उम्र 10 साल थी और किसी भी प्रकार का इलाज उसे ठीक नहीं कर पा रहा था। एक दिन लड़के के माता-पिता ने उसी पेड़ के नीचे अपने बेटे को लिटाकर माता से प्रार्थना की। चमत्कार ये हुआ कि लड़का पूरी तरह से स्वस्थ हो गया।

चीनी सुमदाय के लिए आस्था का केंद्र बना मंदिर
इस घटना के बाद से ही काली माता का ये मंदिर हिंदुओं के साथ-साथ चीनी सुमदाय के लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र बन गया। जब मंदिर में चीनी श्रद्धालुओं ने आना शुरू किया तो अपनी संस्कृति के अनुसार वो भोग भी लगाने लगे। तब से ही माता के मंदिर में भोग के रूप में नूडल्स, चॉप्सी आदि चढ़ने लगे। अन्य भक्तों की तरह चीनी समुदाय के लोग भी मंदिर में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल बाहर ही उतारते हैं।
(नोट: इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारी और मान्यताओं पर आधारित हैं, वनइंडिया हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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