उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, मेजर जनरल से कैसे बने थे 2 बार राज्य के सीएम?
Bhuwan Chandra Khanduri: उत्तराखंड की राजनीति और भारतीय सेना का बड़ा चेहरा रहे पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (Bhuvan Chandra Khanduri) का 18 मई 2026 को निधन हो गया। उनके जाने से उत्तराखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर है। सेना से लेकर राजनीति तक, उन्होंने अपने अनुशासन, ईमानदार छवि और सख्त फैसलों से अलग पहचान बनाई।
खंडूड़ी उन नेताओं में गिने जाते थे जिन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम माना। सड़क, पारदर्शिता और पहाड़ी इलाकों के विकास को लेकर उनका काम आज भी याद किया जाता है। उनके निधन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने गहरा दुख जताते हुए उन्हें राज्य की राजनीति का ईमानदार और प्रेरणादायक नेता बताया। भुवन चंद्र खंडूड़ी (Bhuvan Chandra Khanduri) का जीवन सेना, राजनीति और समाज सेवा का ऐसा सफर रहा जिसने उन्हें देश के सम्मानित नेताओं की सूची में खड़ा किया।

कौन थे भुवन चंद्र खंडूड़ी (Bhuwan Chandra Khanduri)?
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (Bhuwan Chandra Khanduri) का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को हुआ था। उन्होंने साल 1954 में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर शुरुआत की। वह इंजीनियर्स कोर का हिस्सा रहे और करीब 37 साल तक सेना में सेवाएं दीं। अपने काम और नेतृत्व के दम पर वह मेजर जनरल के पद तक पहुंचे।
साल 1983 में उन्हें भारतीय सेना में शानदार योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया था। सेना में उनकी पहचान अनुशासित और जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर बनी।
सेना से राजनीति तक का सफर
सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ राजनीति में कदम रखा। साल 1991 में वह पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने चार बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
राजनीति में भी उनकी छवि साफ-सुथरे और सख्त नेता की रही। वह सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात खुलकर करते थे।
वाजपेयी सरकार में निभाई बड़ी जिम्मेदारी
पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee की सरकार में भुवन चंद्र खंडूड़ी (Bhuvan Chandra Khanduri) को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। साल 2000 से 2003 तक उन्होंने इस विभाग की जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला।
उनके कार्यकाल में सड़क और हाईवे परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ। खासकर पहाड़ी राज्यों में सड़क कनेक्टिविटी सुधारने के लिए उन्होंने कई अहम फैसले लिए।
दो बार संभाली उत्तराखंड की कमान
भुवन चंद्र खंडूड़ी (Bhuwan Chandra Khanduri) दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। पहली बार उन्होंने 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक राज्य की जिम्मेदारी संभाली। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने नेताओं की सुविधाओं में कटौती, सरकारी खर्च कम करने और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर दिया। उनकी छवि ऐसे मुख्यमंत्री की रही जो सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटते थे।
परिवार ने आगे बढ़ाई विरासत
उनकी बेटी Ritu Khanduri Bhushan ने भी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वह उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला स्पीकर बनीं। भुवन चंद्र खंडूड़ी (Bhuwan Chandra Khanduri) सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों से भी जुड़े रहे। वह चंद्र बल्लभ ट्रस्ट की देखरेख करते थे, जिसकी शुरुआत उनके दादा ने साल 1917 में गढ़वाल क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की थी।
ईमानदारी और अनुशासन के लिए याद किए जाएंगे
भुवन चंद्र खंडूड़ी (Bhuwan Chandra Khanduri) को ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने सेना की अनुशासन वाली सोच को राजनीति में भी अपनाया। उन्होंने हमेशा साफ प्रशासन, जवाबदेही और विकास की राजनीति को प्राथमिकता दी। उत्तराखंड की राजनीति में उनका नाम एक ईमानदार और सख्त प्रशासक के तौर पर लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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