UP Police Mafia से माननीय बने लोगों पर सख्त, 66 लोगों की लिस्ट में तीन की मौत, कई अभी भी गिरफ्त से बाहर!
उत्तर प्रदेश में माफिया को मिट्टी में मिलाने की बात कहने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में यूपी पुलिस माफिया से माननीय बने आपराधिक इतिहास वाले नेताओं पर एक्शन ले रही है। 66 लोगों की लिस्ट तैयार की गई है। जानिए

उत्तर प्रदेश में आपराधिक इतिहास वाले कई माफिया माननीय बन चुके हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की बातें कही जाती हैं। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) कई ऐसे लोगों पर एक्शन ले चुकी है।
भले ही एनकाउंटर कठघरे में हैं, लेकिन न्यायिक जांच में क्लीन चिट भी मिली है। यूपी पुलिस के पास 66 माफियाओं की लिस्ट है। इनमें तीन लोगों की मौत हो चुकी है। कई ऐसे हैं जो अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
दरअसल, गत दिनों कानपुर में विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद प्रयागराज में पुलिस हिरासत में अतीक अहमद की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इसी बीच यूपी विधानसभा में सरकार ने एनकाउंटर के चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए।
सरकार ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में 6 साल में 10 हजार से अधिक एनकाउंटर हुए हैं। इसके बाद टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट में 66 ऐसे आपराधिक इतिहास वाले लोगों का जिक्र आया है जो यूपी पुलिस की लिस्ट में है।
पिछले महीने, उत्तर प्रदेश पुलिस ने 66 आपराधिक गिरोह के नेताओं की एक सूची जारी की, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माफिया के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया था।

UP Police Mafia के खिलाफ क्या कर रही है?
पुलिस ने सूची में शामिल लोगों को ट्रैक करने के लिए कई टीमों को तैनात किया है। इस सूची में जमानत पर बाहर घूम रहे लोग भी शामिल हैं। सूचीबद्ध गैंगस्टरों में से तीन मारे गए हैं, जबकि एक को पकड़ लिया गया है, 38 जेल में हैं। बाकी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
गैंगस्टर से राजनेता बने मुख्तार अंसारी के करीबी हरविंदर सिंह को हाल ही में पंजाब पुलिस की गैंगस्टर विरोधी टास्क फोर्स ने गिरफ्तार किया था। पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के मुताबिक, वह एक वांछित अपराधी था, जिसके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम था। सूची में शामिल चार अन्य फरार हैं।
यादव ने ट्वीट किया, "एक बड़ी सफलता में, एजीटीएफ ने मुख्तार अंसारी के करीबी सहयोगी हरविंदर एस उर्फ जुगनू वालिया को गिरफ्तार किया। वह हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली आदि सहित कई आपराधिक मामलों में जुड़ा हुआ था।"
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सरकार उन सभी अपराधियों की निगरानी कर रही है जिनके नाम सूची में हैं। अधिकारी ने कहा, "हमारी टीमें अपराधियों की तलाश में हैं और अगर वे आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस पर गोली चलाते हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।"

ये भी दिलचस्प है कि यूपी पुलिस की लिस्ट में जिन 66 लोगों के नाम शामिल हैं, इसमें माफिया से माननीय बने पूर्व सपा सांसद अतीक अहमद का नाम शामिल नहीं था। प्रयागराज में अतीक और उनके भाई अशरफ को उनके भाई के साथ मार डाला गया था।
विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार के अनुसार, "पुलिस हर किसी पर नजर रख रही है। किसी को भी राज्य में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।'' उन्होंने कहा कि फरार चल रहे माफियाओं की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन किया गया है।
जमानत पर छूटे माफियाओं की गतिविधियों पर पुलिस की पैनी नजर है। पुलिस समय-समय पर उनका सत्यापन करती है। मुख्यमंत्री ने ऐसे तत्वों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की कसम खाने के हफ्तों बाद माफिया सूची जारी की गई थी। इन लोगों के नाम पर एक नजर-

बदन सिंह बद्दो
सूचीबद्ध माफियाओं में से एक बदन सिंह बद्दो है, जो पिछले चार साल से फरार चल रहा है। गाजियाबाद में अदालत की पेशी के बाद मेरठ के एक भोजनालय में रुकने के बाद जब पुलिस पार्टी उसे फर्रुखाबाद जेल वापस ले जा रही थी, तब वह भागने में सफल रहा था।
किन अपराधों में नाम शामिल हैं
सभी पुलिसकर्मी कथित तौर पर शराब के नशे में धुत थे और उन्होंने स्थिति का फायदा उठाया। पुलिस अब तक बद्दो को गिरफ्तार नहीं कर पाई है, जिसके खिलाफ हत्या, लूट और फिरौती के मामले दर्ज हैं।
मनोज आसे और हाजी इकबाल
पिछले सप्ताह फरार माफिया मनोज आसे को गौतमबुद्धनगर में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। जवाबी फायरिंग में वह भी घायल हो गया। बसपा के पूर्व एमएलसी और सहारनपुर के खनन माफिया हाजी इकबाल उर्फ बाला भी फरार है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया है। उनके भाई और बेटे जेल में हैं।
20 से अधिक लोग पुलिस की कैद से बाहर
यूपी पुलिस की 66 लोगों सूची में शामिल 20 से अधिक लोग टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर या कोर्ट से मिली जमानत के कारण बाहर घूम रहे हैं। कैद से आजाद ऐसे लोगों की लिस्ट पर एक नजर-
- मेरठ निवासी विनय त्यागी
- प्रयागराज के जावेद उर्फ पप्पू
- अंबेडकरनगर के अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही
- मुजफ्फरनगर के सुशील मूच
- प्रतापगढ़ के अनूप सिंह व प्रदीप सिंह
- सुधीर सिंह, राकेश यादव और विनोद उपाध्याय तीनों गोरखपुर के
- कानपुर के सौद अख्तर
- लखनऊ के बच्चू यादव, राजेश यादव, कमरुल हसन और जाबिर
- प्रयागराज के हुसैन जमानत पर बाहर हैं।
माफिया से माननीय बनने की यात्रा
पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह (वाराणसी) और संजीव द्विवेदी उर्फ रामू द्विवेदी (देवरिया के) भी जमानत पर हैं। जेल में बंद माफिया से माननीय बनने वाले लोगों में पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी, पूर्व सांसद रिजवान जहीर, त्रिभुवन सिंह, अमित कसाना, सुंदर भाटी और सुभाष ठाकुर शामिल हैं।
साठगांठ पर पुलिस के एक्शन का असर
अधिकारियों के अनुसार, माफिया अपने नेटवर्क को जेल के अंदर से संचालित करते थे, लेकिन माफिया और जेल अधिकारियों के बीच साठगांठ पर पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद उनका विश्वास हिल गया है।
जेल अधिकारियों पर भी योगी सरकार का एक्शन
मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास और उसकी पत्नी के बीच चित्रकूट जेल में बंद अवैध मुलाकात और बरेली जेल में अशरफ की लोगों से मुलाकात सहित कई मामलों में जेल अधिकारियों, कर्मचारियों और अपराधियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है।
यूपी के सीएम का संकल्प- मिट्टी में मिला दूंगा
गौरतलब है कि पूर्व सपा सांसद अतीक अहमद के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ गरमागरम बहस के दौरान यूपी विधानसभा में आक्रामक लहजे में कहा था, "माफियाओं को मिट्टी में मिला दूंगा।"
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विगत चार मई को गैंगस्टर अनिल दुजाना मेरठ में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स के साथ मुठभेड़ में मारा गया। अनिल के खिलाफ हत्या और जबरन वसूली सहित 60 से अधिक मामले दर्ज थे। इस पर यूपी एसटीएफ महानिदेशक अमिताभ यश ने कहा, वांछित अपराधी अनिल दुजाना ने बचने के लिए पुलिस की टीम पर फायरिंग की। जवाबी फायरिंग में दुजाना मारा गया।
इससे पहले 12 अप्रैल को स्पेशल टास्क फोर्स ने पुलिस हिरासत से भागे आदित्य राणा उर्फ रवि को मार गिराया था। अमिताभ यश के अनुसार, पुलिस विशेष अभियान के तहत फरार घोषित अपराधियों की तलाश कर रही है।

शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अपने प्रचार अभियान के दौरान, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और राज्य के मंत्री विपक्षी दलों पर हमलावर हैं। आरोप लग रहे हैं पूर्ववर्ती सरकारों ने ऐसे अपराधियों को शरण दी है। सीएम योगी जीरो टॉलरेंस की बात कह रहे हैं।
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