Waste Management Scam : कर्नाटक में कचरा टेंडर पर संग्राम, भाजपा ने कांग्रेस पर लगाए करोड़ों के घोटाले का आरोप
Waste Management Scam :कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कचरा प्रबंधन के एक बड़े टेंडर को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर 39,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि शहर के कचरा प्रसंस्करण और निपटान के लिए जारी किए गए दीर्घकालिक टेंडर में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं और इसके जरिए करोड़ों रुपये का घपला किया गया है।
बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक ने आरोप लगाया कि 'देश के इतिहास में पहली बार कचरे के नाम पर इतनी बड़ी लूट हुई है। उन्होंने इस टेंडर को "हाईकमान ब्लैक मनी टेंडर" करार देते हुए कहा कि 'यह पूरा मामला गंभीर जांच की मांग करता है।'

35 साल के लिए एक ही कंपनी को मिला ठेका
भाजपा नेता के अनुसार, कचरा प्रसंस्करण और निपटान का यह ठेका दिल्ली स्थित MSW Solutions Ltd या उसकी मूल कंपनी Ramky Group को 30 वर्षों के लिए दिया गया है। इसके साथ ही 5 साल के विस्तार का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे कुल अनुबंध अवधि 35 साल हो जाती है। अशोक का आरोप है कि इतने लंबे समय के लिए एक ही कंपनी को ठेका देना सार्वजनिक हित के खिलाफ है और इससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा।
अभी कितना खर्च, नए टेंडर में कितना बढ़ेगा?
अशोक ने बताया कि वर्तमान में बेंगलुरु में कचरा संग्रहण और परिवहन पर 514 करोड़ रुपये, कचरा प्रसंस्करण और निपटान पर 380 करोड़ रुपये तथा 11 हजार सफाई कर्मचारियों के वेतन पर 444 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इस तरह कुल वार्षिक खर्च लगभग 1,344 करोड़ रुपये है। उनका दावा है कि नए टेंडर के लागू होने के बाद कुल खर्च बढ़कर 39,437 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जिससे लगभग 33,320 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ जनता पर पड़ेगा।
टिपिंग फीस में 800 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान में कचरे के प्रति टन निपटान पर 260 रुपये की टिपिंग फीस ली जाती है, जबकि नए टेंडर में इसे बढ़ाकर 2,400 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक टन कचरे के प्रसंस्करण की लागत, जो अभी 2,151 रुपये है, वह अगले 30 वर्षों में बढ़कर 9,297 रुपये तक पहुंच सकती है। उनके अनुसार यह लगभग 430 प्रतिशत की वृद्धि है।
RITES की सिफारिशों को नजरअंदाज करने का दावा
अशोक ने कहा कि बेंगलुरु को उत्तर और दक्षिण दो पैकेजों में बांटकर टेंडर प्रक्रिया चलाई गई। उनका आरोप है कि सरकारी कंपनी RITES Limited की सिफारिशों को नजरअंदाज कर एक गैर-मान्यता प्राप्त सलाहकार की मदद ली गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि चयनित कंपनी को सरकारी भूमि के समर्थन से 1,500 करोड़ रुपये तक का ऋण जुटाने की अनुमति दी गई है।
वित्त विभाग ने भी जताई थी आपत्ति?
अशोक के मुताबिक राज्य के वित्त विभाग ने भी इस टेंडर को लेकर कई आपत्तियां दर्ज की थीं। विभाग ने दोनों पैकेज एक ही कंपनी को देने, 30 साल की अवधि रखने और 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के प्रावधान पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने अनुबंध अवधि को 10 वर्ष तक सीमित करने और वृद्धि दर को 2.5 प्रतिशत रखने की सलाह दी थी, लेकिन इन सुझावों को नजरअंदाज कर दिया गया।
रामकी पर भी उठाए सवाल
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि रामकी समूह का नाम पहले भी विवादों में रहा है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी को कथित नियम उल्लंघन और अनियमितताओं के कारण पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है और वर्ष 2016 में Bruhat Bengaluru Mahanagara Palike द्वारा उसका अनुबंध भी रद्द किया गया था।इसके बावजूद कांग्रेस सरकार ने उसी कंपनी को नया ठेका दे दिया, जो कई सवाल खड़े करता है।
राज्यपाल और लोकायुक्त से जांच की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अशोक ने Thawar Chand Gehlot से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पूरे टेंडर की जांच की मांग की। उन्होंने आवेदन करने वाली कंपनियों की पात्रता, डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया और टेंडर मंजूरी में कथित अनियमितताओं की जांच कराने का अनुरोध किया। इसके अलावा उन्होंने इस मामले को लेकर Karnataka Lokayukta में भी शिकायत दर्ज कराई है।














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