Ganga Prasad Nishad Attack: सपा सरकार में मंत्री रहे गंगा निषाद पर हथौड़े से वार, Haren Pandya की तरह हुआ हमला

Ganga Prasad Nishad Attack: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में 14 मई की सुबह एक पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री पर उनके ही गांव में पड़ोसियों ने क्रूर हमला कर दिया। सेटरिंग के हथौड़े से सिर पर किए गए ताबड़तोड़ वारों से गंगा प्रसाद निषाद गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना मॉर्निंग वॉक के दौरान घर के बाहर हुई, जो स्थानीय स्तर के एक लंबे विवाद से उपजी मानी जा रही है।

खुटहन खास गांव (गुलरिहा थाना क्षेत्र) निवासी गंगा प्रसाद निषाद सुबह करीब 5-6 बजे घर के बाहर टहल रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले श्रीभागवत निषाद, उनके बेटे अजय निषाद, विजय निषाद और कुछ अन्य लोगों ने उन पर हमला बोल दिया। परिवार के मुताबिक, हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के हथौड़े से उनके सिर पर कई वार किए। बाईं आंख के ऊपर गहरी चोट आई और हथौड़े का नुकीला हिस्सा करीब दो इंच तक सिर में धंस गया।

Former SP Minister Ganga Prasad Nishad

घायल अवस्था में जमीन पर गिरे गंगा निषाद को देखकर परिजन चीख-पुकार मचाते हुए बाहर निकले। उन्होंने उन्हें तुरंत चरगांवा सीएचसी ले जाया, जहां से डॉक्टरों ने उन्हें गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल रेफर कर दिया। वहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। बेटे सुरेंद्र निषाद ने पुलिस को बताया कि यह हमला पूर्व नियोजित लगता है। परिवार का आरोप है कि हमलावर लंबे समय से मनमुटाव रखते थे।

विवाद की जड़: मकान की नींव और गड्ढा

मामला करीब 10 दिन पुराना बताया जा रहा है। पड़ोसियों ने गंगा निषाद के मकान की नींव से सटे इलाके में गड्ढा खुदवाया था। बारिश के मौसम को देखते हुए गंगा निषाद ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि गड्ढे में पानी भरने से मकान की नींव कमजोर हो सकती है और पूरा घर गिरने का खतरा है। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों में कई दिनों से तीखी बहस और मनमुटाव चल रहा था।

पुलिस के अनुसार, गुलरिहा थाना टीम आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह ने आश्वासन दिया कि जल्द गिरफ्तारियां होंगी। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि तहरीर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

Who Is Ganga Prasad Nishad: राजनीतिक सफर कैसा रहा?

गंगा प्रसाद निषाद निषाद समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है, खासकर पूर्वांचल में। वे समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 2022 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा। छत्तीसगढ़ सरकार के संसदीय सचिव और विधायक कुंवर सिंह निषाद ने उन्हें शामिल करते हुए कहा था कि निषाद समाज बड़ी संख्या में यूपी में बसा है और कांग्रेस उसके हक-हुकूक के लिए लड़ाई लड़ेगी।

खुटहन गांव राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है। यहां से पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद निषाद भी आए हैं, जिन्होंने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ा था। गंगा निषाद को जमुना प्रसाद का करीबी माना जाता है। निषाद राजनीति यूपी में हाल के सालों में काफी सक्रिय रही है। संजय निषाद की निषाद पार्टी के जरिए BJP गठबंधन तक पहुंच बनाई गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर जातीय और पारिवारिक विवाद अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं।

Haren Pandya Attack: सिमिलैरिटी और अंतर

इस हमले की तुलना गुजरात के पूर्व गृह मंत्री और BJP नेता हरेन पंड्या से की जा रही है। 26 मार्च 2003 को अहमदाबाद के लॉ गार्डन में मॉर्निंग वॉक के बाद पंड्या को उनकी कार में गोली मार दी गई थी। पांच-छह गोलियां मारी गईं और लाश कार में काफी देर तक पड़ी रही। यह मामला राजनीतिक साजिशों, 2002 दंगों और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता को लेकर विवादों में रहा। Gujarat High Court ने बाद में कई आरोपियों को बरी कर दिया था।

समानताएं क्या हैं?

  • दोनों हमले सुबह के समय, घर/पार्क के पास, रोजमर्रा की गतिविधि (वॉक) के दौरान।
  • लक्ष्य राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति।
  • शुरुआती जांच में साजिश के संकेत।

अंतर क्या है?

  • पंड्या पर गोलीबारी (संगठित हमला माना गया), जबकि गंगा निषाद पर हथौड़े से (स्थानीय विवाद से उपजा)।
  • पंड्या की हत्या राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनी, जबकि यह स्थानीय घटना लगती है।

निषाद समुदाय और यूपी की राजनीति में संदर्भ

निषाद (मल्लाह/केवट) समुदाय नदियों और जल संसाधनों से जुड़ा है। यूपी में यह OBC श्रेणी में आता है और BJP, SP, BSP सभी पार्टियां इस वोट बैंक को साधने की कोशिश करती हैं। संजय निषाद जैसे नेता इस समुदाय को मुख्यधारा में लाए, लेकिन स्थानीय स्तर पर जमीन, पानी और पारिवारिक विवाद अक्सर हिंसा का रूप ले लेते हैं। गोरखपुर जैसे क्षेत्र में जातीय समीकरण संवेदनशील हैं।

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