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Mayawati Birthday: 69 साल की हुईं 'बहन जी', मायावती के जन्मदिन पर जानिए उनके शौक-संपत्ति से जुड़ी दिलचस्प बाते

Mayawati 69th Birthday: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने जन्मदिन के मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाए। प्रेस वार्ता में मायावती के साथ पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद भी मौजूद थे।

मायावती आज अपना 69वां जन्मदिन (Mayawati Birthday) मना रही हैं। 15 जनवरी 1956 को जन्मी मायावती ने अपनी पहचान एक बड़े दलित नेता के रूप में स्थापित की है। हर साल 15 जनवरी को मायावती का जन्मदिन उनकी पार्टी द्वारा 'जनकल्याणकारी दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

Mayawati Birthday

इस खास मौके पर आज उन्होंने गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों के उत्थान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करने की अपील की। साथ ही उन्होंने देश की मौजूदा राजनीति और अन्य दलों की नीतियों पर भी सवाल उठाए।
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दूसरे दलों की नीतियों पर निशाना

मायावती ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान दलितों और गरीबों के लिए जो योजनाएं शुरू की गईं, उन्हें कई राज्यों में लागू किया गया। लेकिन, अब कुछ राजनीतिक पार्टियां दलित वोट बैंक को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने सपा, कांग्रेस और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सभी पार्टियां जातिवादी हैं और उन्होंने आरक्षण को कमजोर करने का काम किया है।

मायावती ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनके शासन में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और अन्य दलित नेताओं की अनदेखी की गई। भाजपा पर भी उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि इस पार्टी के नेताओं ने बाबा साहेब का अपमान किया और उसका पश्चाताप भी नहीं किया।

अल्पसंख्यकों और गरीबों की स्थिति पर चिंता

मायावती ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय खुद को दबा हुआ महसूस कर रहा है और गरीब तथा बेरोजगार लोग परेशान हैं। उन्होंने दलितों और पिछड़ों को चेतावनी दी कि वे ऐसी सरकारों को वोट न दें जो उनके अधिकारों को दबाती आई हैं। उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि चुनाव के दौरान लोग उन्हीं दलों को सत्ता में लाते हैं, जो उनके हितों का ख्याल नहीं रखते।

दिल्ली चुनाव को लेकर मायावती का विश्वास

दिल्ली चुनाव पर बात करते हुए मायावती ने कहा कि बसपा पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रही है। अगर चुनाव निष्पक्ष और EVM में गड़बड़ी के बिना होते हैं, तो पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले यूपी और बिहार के गरीब लोगों के साथ हो रहे बुरे व्यवहार पर चिंता जताई। मायावती ने कहा कि दिल्ली में लोगों को सोच-समझकर वोट करना चाहिए।

मायावती का जीवन (Mayawati Life Story)

मायावती, जिन्हें आमतौर पर "बहनजी" के नाम से जाना जाता है, भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं। वे बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख हैं और देश की सबसे प्रमुख दलित नेताओं में से एक हैं। मायावती ने अपने जीवन और राजनीतिक सफर में कई कठिनाइयों का सामना करते हुए, समाज के वंचित वर्गों के लिए आवाज उठाई और देश की राजनीति में एक विशेष पहचान बनाई।

मायावती का प्रारंभिक जीवन (Mayawati Early Life)

मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय दलित परिवार में हुआ। उनका पूरा नाम मायावती प्रभु दास है। उनके पिता प्रभु दास डाक विभाग में कार्यरत थे। मायावती ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली में पूरी की और इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने बाद में बी.एड. किया और कुछ समय के लिए शिक्षिका के रूप में कार्य किया।
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मायावती का राजनीति में प्रवेश (Mayawati Political Journey)

मायावती का राजनीतिक सफर 1977 में शुरू हुआ जब वे कांशीराम, बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक, से मिलीं। कांशीराम ने मायावती की नेतृत्व क्षमता को पहचाना और उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद मायावती ने बसपा के मंच से दलितों, पिछड़ों और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया।

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने का सफर

मायावती भारत की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप में चार बार कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने 1995, 1997, 2002 और 2007 में मुख्यमंत्री पद संभाला। 1995 में, मायावती पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और यह उपलब्धि उन्हें भारत की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करती है। 2007 में, उनकी पार्टी ने पूर्ण बहुमत से चुनाव जीता, जो उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री

2 जून 1995 को, मायावती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उस समय उनकी उम्र केवल 39 वर्ष थी। इस उपलब्धि ने उन्हें भारतीय राजनीति में एक मिसाल बना दिया। वो अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले मायावती भारत की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री बनी थीं।

जूते-चप्पलों की शौकीन मायावती

मायावती के जूते-चप्पल का कलेक्शन अक्सर चर्चा में रहा है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को उनके सादगी भरे अंदाज और राजनीतिक सूझबूझ के लिए जाना जाता है, लेकिन उनके शू कलेक्शन ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। कहा जाता है कि उनके पास जूतों और चप्पलों का एक खास कलेक्शन है, जिसमें ब्रांडेड और डिजाइनर फुटवियर शामिल हैं।

फोर्ब्स की सबसे अमीर मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में बनाई जगह

अपने मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल के दौरान मायावती फोर्ब्स की सबसे अमीर सीएम की लिस्ट में शामिल थी। मायावती, बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री, अक्सर अपनी संपत्ति और जीवनशैली के कारण सुर्खियों में रही हैं। Forbes या अन्य प्रतिष्ठित आर्थिक प्रकाशनों में उनकी संपत्ति का उल्लेख किया गया है, और कई बार उन्हें भारत के प्रमुख नेताओं में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जिनकी संपत्ति उल्लेखनीय है।

मायावती की नीतियां और उपलब्धियां

मायावती ने अपने कार्यकाल के दौरान दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं शुरू कीं।
अंबेडकर ग्राम विकास योजना: ग्रामीण क्षेत्रों में दलितों के लिए सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास।
मूर्ति निर्माण और स्मारक: मायावती ने अंबेडकर, कांशीराम और अन्य दलित नेताओं के स्मारक और मूर्तियां बनवाकर समाज के वंचित वर्गों को प्रेरणा देने का प्रयास किया।
कानून और व्यवस्था: उनके शासनकाल को सख्त कानून और व्यवस्था के लिए भी जाना जाता है।
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