Red Fort Attack: 'आतंकियों का UP-हिंदू बहुल आबादी भी था टारगेट', NIA की चार्जशीट में क्या-क्या खुलासे?
Delhi Red Fort Attack: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए भीषण आतंकी कार बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 14 मई को 7,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस दस्तावेज में खुलासा हुआ है कि यह हमला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे भारत में समन्वित आतंकी हमलों की बड़ी साजिश का हिस्सा था। आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद (AGUH), जो अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) की शाखा है, से जुड़े मॉड्यूल ने उत्तर प्रदेश के सत्ता केंद्रों और हिंदू बहुल आबादी वाले इलाकों को विशेष रूप से निशाना बनाने की योजना बनाई थी।
इस हमले में 11 से 15 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। NIA की जांच अब साबित कर रही है कि यह घटना एक बड़े भारत-विरोधी आतंकी नेटवर्क का हिस्सा थी, जिसमें पेशेवर लोग, चिकित्सा विशेषज्ञ और AQIS विचारधारा से प्रभावित युवा शामिल थे। आइए जानते हैं विस्तार से...

क्या है पूरा मामला?
10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले क्षेत्र में एक कार बम विस्फोट हुआ। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। NIA के अनुसार, यह विस्फोट रिमोट डिटोनेशन डिवाइस से किया गया था। सामग्री दिल्ली के भागीरथ पैलेस से मंगाई गई थी और हमले से पहले इसका परीक्षण भी किया गया था। हमले के तुरंत बाद NIA ने मामले की जांच शुरू की। अब दाखिल चार्जशीट में 10 आरोपियों के नाम शामिल हैं, जिनमें मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर उन नबी (मृत) भी शामिल हैं। बाकी 9 आरोपी फिलहाल जांच एजेंसी की गिरफ्त में हैं।
NIA चार्जशीट के प्रमुख खुलासे
NIA ने अपनी 7,500 पन्नों की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं:
- देशव्यापी साजिश: मॉड्यूल फरीदाबाद तक सीमित नहीं था। इसकी योजना कई शहरों और राज्यों में समन्वित हमले करने की थी। खासतौर पर उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक सत्ता केंद्रों को निशाना बनाया गया था।
- हिंदू बहुल इलाकों पर फोकस: आरोप पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि समूह ने हिंदू-बहुसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों की पहचान की थी। इसका मकसद साम्प्रदायिक तनाव पैदा करना और बड़े पैमाने पर दहशत फैलाना था।
- लखनऊ ऑपरेशनल हब: समूह ने लखनऊ में एक सक्रिय परिचालन केंद्र स्थापित किया था। यहां से विस्फोटक बनाने के लिए रसायनों और अन्य सामग्रियों की खरीदारी की गई। स्थानीय स्तर पर रसद सहायता के लिए सहयोगियों की पहचान की गई थी।
- रिकी और टारगेट प्लानिंग: लखनऊ में राजभवन, उत्तर प्रदेश विधानसभा और सचिवालय समेत महत्वपूर्ण इमारतों की रेकी की गई। नक्शे तैयार किए गए और हमले के लिए मार्गों की प्लानिंग की गई थी। NIA के अनुसार, समूह ने "खरीद, विनिर्माण और योजना के समन्वय" के लिए उत्तर प्रदेश में एक कार्यात्मक केंद्र-सचिवालय स्थापित किया था।
मॉड्यूल की विचारधारा और संरचना
NIA चार्जशीट बताती है कि यह मॉड्यूल AQIS/AGUH की विचारधारा से गहराई से प्रभावित था। बुरहान वानी और अन्य आतंकी नेताओं की मौत के बाद समूह के सदस्यों में आक्रोश था, जिसने उन्हें हिंसक कार्रवाई की ओर धकेला। समूह में चिकित्सा पेशेवरों समेत विभिन्न क्षेत्रों के कट्टरपंथी शामिल थे। मुज्जमिल तांत्रिक नामक एक करीबी सहयोगी की मौत के बाद संगठन ने नेतृत्व का पुनर्गठन किया और अंतरिम कमान संरचना बनाई। AQIS के साथ वैचारिक और संचालन संबंध स्थापित करने की कोशिश की गई, जो अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव को दर्शाता है।
आरोपी और कानूनी कार्रवाई
- चार्जशीट में 10 आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराएं लगाई गई हैं:
- UAPA (Unlawful Activities Prevention Act)
- भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएं
- विस्फोटक पदार्थ अधिनियम
- शस्त्र अधिनियम
- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकथाम अधिनियम
- मामला दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित विशेष NIA अदालत में विचाराधीन है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़े सबक
यह चार्जशीट कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है:
- 1. शहरी आतंकवाद का बढ़ता खतरा: लखनऊ जैसे शहरों में ऑपरेशनल बेस बनाना और पेशेवर लोगों का शामिल होना दिखाता है कि आतंक अब सिर्फ सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। शहरी केंद्र, युवा और शिक्षित वर्ग भी रेडिकलाइजेशन का शिकार हो रहे हैं।
- 2. साम्प्रदायिक टारगेटिंग: हिंदू बहुल इलाकों को चुनिंदा निशाना बनाने की योजना साम्प्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की सोची-समझी रणनीति लगती है। NIA की जांच इस दिशा में और गहराई से आगे बढ़ेगी।
- 3. AQIS का भारत में पैर पसारना: AGUH के जरिए AQIS का भारत में सक्रिय होना चिंताजनक है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान आधारित नेटवर्क से जुड़ाव की जांच जरूरी है।
- 4. खुफिया तंत्र की भूमिका: इस साजिश को पहले पकड़ने में खुफिया एजेंसियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। दिल्ली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इतनी बड़ी तैयारी कैसे हो सकी?
- 5. युवाओं में कट्टरपंथ का प्रसार: सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्रोपगैंडा और विदेशी फंडिंग के जरिए युवाओं को आकर्षित करने की रणनीति पर अंकुश लगाने की जरूरत है।
वर्तमान स्थिति और आगे की जांच
NIA की जांच अभी जारी है। चार्जशीट में उल्लिखित CCTV फुटेज, वित्तीय लेन-देन, मोबाइल लोकेशन, चैट और अन्य डिजिटल सबूतों का विश्लेषण चल रहा है। एजेंसी अन्य सहयोगियों और विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली पुलिस, UP ATS और अन्य राज्य एजेंसियों के साथ समन्वय में काम चल रहा है। केंद्र सरकार ने भी इस मामले को उच्च प्राथमिकता दी है।













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